सिटी रिपोर्टर | नवादा भाकपा माले के दिवंगत नेत्री कॉ मधु मिश्रा की श्रद्धांजलि सभा होटल कृष्णा पैलेस के सभागार में भाकपा माले जिला सचिव भोला राम के अध्यक्षता आयोजित किया गया। सर्वप्रथम उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण कर एक मिनट के मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। दिवंगत नेत्री को श्रद्धांजलि देने में काफी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं एपवा के राष्ट्रीय महासचिव कॉ मीना तिवारी ने कहा कि जिस सामंती व्यवस्था में बेटियों को अपने जीने की शर्ते तय करने का अधिकार नहीं था, उसी सामंती व्यवस्था में लड़कियों को पढ़ने का अधिकार नहीं था इस सामंती दकियानूसी विचारधारा के खिलाफ सावित्री बाई फुले को बड़ी लड़ाई लड़ना पड़ा था। उसी नक्शे कदम पर चलने की कठिन डगर कॉ मधु मिश्रा ने चुना और मरनांतक उस विचारधारा पर चलते हुए हमलोगों से 18 जनवरी को हमेशा के लिए विदा हो गई। कॉ मधु मिश्रा के अधूरे कार्य को पूरा करके ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कॉ शिवसागर शर्मा ने कहा कॉ मधु जी जिस बहादुराना संघर्ष में हिस्सा ली और जिस कठिन संघर्ष को शहीद कॉ सुरेंद्र सिंह ने अपना रास्ता बनाया था। सिटी रिपोर्टर | नवादा भाकपा माले के दिवंगत नेत्री कॉ मधु मिश्रा की श्रद्धांजलि सभा होटल कृष्णा पैलेस के सभागार में भाकपा माले जिला सचिव भोला राम के अध्यक्षता आयोजित किया गया। सर्वप्रथम उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण कर एक मिनट के मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। दिवंगत नेत्री को श्रद्धांजलि देने में काफी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं एपवा के राष्ट्रीय महासचिव कॉ मीना तिवारी ने कहा कि जिस सामंती व्यवस्था में बेटियों को अपने जीने की शर्ते तय करने का अधिकार नहीं था, उसी सामंती व्यवस्था में लड़कियों को पढ़ने का अधिकार नहीं था इस सामंती दकियानूसी विचारधारा के खिलाफ सावित्री बाई फुले को बड़ी लड़ाई लड़ना पड़ा था। उसी नक्शे कदम पर चलने की कठिन डगर कॉ मधु मिश्रा ने चुना और मरनांतक उस विचारधारा पर चलते हुए हमलोगों से 18 जनवरी को हमेशा के लिए विदा हो गई। कॉ मधु मिश्रा के अधूरे कार्य को पूरा करके ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कॉ शिवसागर शर्मा ने कहा कॉ मधु जी जिस बहादुराना संघर्ष में हिस्सा ली और जिस कठिन संघर्ष को शहीद कॉ सुरेंद्र सिंह ने अपना रास्ता बनाया था।


