धरती आबा अभियान: जनजातीय गांवों को मिली 24 घंटे बिजली:मुख्य ग्रिड से जुड़ने पर लाभुक गणतंत्र दिवस परेड में हुए सम्मानित, व्यवसाय नहीं होंगे प्रभावित

धरती आबा अभियान: जनजातीय गांवों को मिली 24 घंटे बिजली:मुख्य ग्रिड से जुड़ने पर लाभुक गणतंत्र दिवस परेड में हुए सम्मानित, व्यवसाय नहीं होंगे प्रभावित

भारत सरकार के ‘धरती आबा जनजातीय उत्थान अभियान’ के तहत जनजातीय बहुल इलाकों में बिजली पहुंचाई जा रही है। इस पहल से सुदूर वनांचल और दियारा क्षेत्रों के परिवारों को मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। पश्चिम चंपारण, सुपौल, पूर्णिया और कटिहार जिलों के कई गांव, जो पहले सीमित सौर ऊर्जा पर निर्भर थे, अब नियमित ऑन-ग्रिड बिजली आपूर्ति का लाभ उठा रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन क्षेत्रों के चयनित लाभार्थियों को रिपब्लिक डे परेड में शामिल होने का मौका मिला। यह योजना की सफलता का एक प्रमाण भी बना। ग्रामीणों के अनुसार पहले सौर प्रणाली से केवल कुछ घंटों के लिए बिजली मिलती थी, जिससे पढ़ाई, सिलाई, छोटे व्यवसाय और घरेलू कार्य प्रभावित होते थे। अब 24 घंटे बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई का समय बढ़ा है और महिलाएं भी स्वरोजगार गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। इस योजना से स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार की उम्मीद है, क्योंकि अब उपकेंद्रों में बिजली आधारित उपकरणों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। मोबाइल चार्जिंग, पंखे, लाइट और छोटे मोटर चालित उपकरणों की उपलब्धता से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। विद्युत आपूर्ति प्रमंडल बगहा के कार्यपालक अभियंता आलोक अमृतांशु ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी जनजातीय परिवार बिजली से वंचित न रहे। शेष बचे गांवों में भी लाइन विस्तार, ट्रांसफार्मर स्थापना और घरेलू कनेक्शन का कार्य तेजी से जारी है। भारत सरकार के ‘धरती आबा जनजातीय उत्थान अभियान’ के तहत जनजातीय बहुल इलाकों में बिजली पहुंचाई जा रही है। इस पहल से सुदूर वनांचल और दियारा क्षेत्रों के परिवारों को मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। पश्चिम चंपारण, सुपौल, पूर्णिया और कटिहार जिलों के कई गांव, जो पहले सीमित सौर ऊर्जा पर निर्भर थे, अब नियमित ऑन-ग्रिड बिजली आपूर्ति का लाभ उठा रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन क्षेत्रों के चयनित लाभार्थियों को रिपब्लिक डे परेड में शामिल होने का मौका मिला। यह योजना की सफलता का एक प्रमाण भी बना। ग्रामीणों के अनुसार पहले सौर प्रणाली से केवल कुछ घंटों के लिए बिजली मिलती थी, जिससे पढ़ाई, सिलाई, छोटे व्यवसाय और घरेलू कार्य प्रभावित होते थे। अब 24 घंटे बिजली उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई का समय बढ़ा है और महिलाएं भी स्वरोजगार गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। इस योजना से स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार की उम्मीद है, क्योंकि अब उपकेंद्रों में बिजली आधारित उपकरणों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। मोबाइल चार्जिंग, पंखे, लाइट और छोटे मोटर चालित उपकरणों की उपलब्धता से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। विद्युत आपूर्ति प्रमंडल बगहा के कार्यपालक अभियंता आलोक अमृतांशु ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी जनजातीय परिवार बिजली से वंचित न रहे। शेष बचे गांवों में भी लाइन विस्तार, ट्रांसफार्मर स्थापना और घरेलू कनेक्शन का कार्य तेजी से जारी है।  

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