मुंबई के मेयर पद पर महासंग्राम, शिंदे ने भाजपा की मांग ठुकराई, अब क्या करेंगे फडणवीस?

मुंबई के मेयर पद पर महासंग्राम, शिंदे ने भाजपा की मांग ठुकराई, अब क्या करेंगे फडणवीस?

मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election) के नतीजे आए 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन देश की सबसे अमीर नगर निगम को अब तक अपना नया महापौर (Mayor) नहीं मिल सका है। भाजपा (BJP) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत होने के बावजूद सत्ता के बंटवारे पर पेंच फंस गया है। इस बीच, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अचानक सतारा स्थित अपने पैतृक गांव ‘दरे’ चले गए हैं। शिवसेना के 29 नगरसेवकों (पार्षद) का स्वतंत्र गुट के तौर पर रजिस्ट्रेशन करवाने का फैसला भी भाजपा के लिए झटका माना जा रहा है।  

जानकारी के मुताबिक, बीएमसी में मेयर और स्थायी समिति के अध्यक्ष पद को लेकर सत्ताधारी महायुति (भाजपा और शिंदे सेना) के भीतर घमासान जारी है। शिंदे की शिवसेना और भाजपा (BJP) के बीच सत्ता बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच, भाजपा की एक बड़ी मांग को शिंदे सेना ने नकार दिया है और भाजपा से अलग गुट के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने का फैसला लिया है।

शिंदे का बड़ा ‘पावर प्ले’

बीजेपी चाहती थी कि मुंबई महानगरपालिका में भाजपा के 89 नगरसेवक और शिंदे सेना के 29 नगरसेवक मिलकर एक संयुक्त समूह के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराएं। हालांकि, एकनाथ शिंदे ने इसे ठुकराते हुए अपनी पार्टी के 29 नगरसेवकों की स्वतंत्र ग्रुप के रूप में रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया है।

शिंदे के सातारा में होने के कारण मंगलवार को राहुल शेवाले और शीतल म्हात्रे शिवसेना के नगरसेवकों को लेकर रजिस्ट्रेशन के लिए सीबीडी बेलापुर स्थित कोकण भवन जाएंगे। इससे पहले सभी नगरसेवक दादर के स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक पर एकत्र होंगे और फिर बालासाहेब ठाकरे स्मृति स्थल के दर्शन के बाद बस से गुट रजिस्ट्रेशन के लिए बेलापुर रवाना होंगे। माना जा रहा है कि स्वतंत्र रजिस्ट्रेशन करवाकर शिंदे सेना मेयर पद और स्थायी समिति में अपनी अलग ताकत दिखाना चाहती है।

शिंदे के ‘होटल पॉलिटिक्स’ से नाराजगी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएमसी चुनाव के बाद शिंदे द्वारा अपने नगरसेवकों को मुंबई के होटल में शिफ्ट करने से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व नाखुश बताया जा रहा है। दिल्ली से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को साफ निर्देश मिले हैं कि बीएमसी के मेयर पद को लेकर कोई भी समझौता न किया जाए।

दरअसल शिवसेना की ओर से मांग की गई थी कि मुंबई में पहले ढाई वर्षों के लिए मेयर पद दिया जाए और स्थायी समिति समेत अन्य समितियों में पार्टी को उचित प्रतिनिधित्व मिले। लेकिन 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी मेयर पद पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। शिंदे गुट का कहना है कि पहले मेयर शिवसेना से ही होना चाहिए क्योंकि 2026 में पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी है।

शिंदे का गांव जाने से सियासी अटकलें तेज

रविवार दोपहर तक मुंबई में मौजूद एकनाथ शिंदे अचानक सातारा के दरे गांव रवाना हो गए। आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है कि वे जिला परिषद चुनाव के प्रचार के लिए गए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे शिवसेना और भाजपा के बीच बढ़ती तल्खी से जोड़कर देखा जा रहा है।

दावोस से लौटे फडणवीस, फिर भी नहीं बनी बात

मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद सीएम फडणवीस दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड चले गए थे। इस दौरान मुंबई के मेयर पद को लेकर महायुति में जबरदस्त राजनीतिक खींचतान देखने को मिली। इसी समय शिंदे गुट के 29 नगरसेवकों को होटल में ठहराने का फैसला भी सुर्खियों में रहा, जिसे भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश माना गया। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने इस दबाव को नजरअंदाज करते हुए मेयर पद पर सख्त रुख अपनाया है।

दावोस से लौटने के बाद भी फडणवीस और शिंदे के बीच कोई निर्णायक बैठक नहीं हो पाई। गणतंत्र दिवस के दिन दोनों नेता मुंबई में मौजूद थे, लेकिन बीएमसी को लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। इसके बाद शिंदे सतारा रवाना हुए।

उद्धव गुट ने क्या कहा?

शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने दावा किया कि मुंबई में भाजपा का ही मेयर बनेगा और वह इस पद को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ कभी साझा नहीं करेगी। राउत ने कहा कि भले ही शिंदे सेना मेयर पद को लेकर नाराज हो, लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं है। लेकिन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने इस मामले को उठाने पर उन्हें बीएमसी में कुछ अन्य पद मिल सकते हैं।

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