सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग सेवा लागू करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर देशभर के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी आज मंगलवार 27 जनवरी को हड़ताल पर रहे। बैंक कर्मचारियों की आज की एक दिन की हड़ताल के कारण जिले में करोड़ों रुपए का कारोबार ठप रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंक कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के बीच इस मुद्दे पर 8 मार्च 2024 को एक समझौता हुआ था। इस समझौते को अंतिम मंजूरी के लिए भारत सरकार को भेजा गया, लेकिन लगभग दो साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। सुलह की कोशिशें भी रहीं बेनतीजा मामले को सुलझाने के लिए 22 और 23 जनवरी 2026 को मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) के साथ सुलह बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में IBA, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और UFBU के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बन पाई। बैंक कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब बातचीत के सभी रास्ते बंद हो गए, तो हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। झज्जर में दिखा हड़ताल का सीधा असर हड़ताल का असर सिर्फ बैंकिंग सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई। झज्जर जिले में लगभग 90 बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन में भाग लिया, जिससे करोड़ों रुपए का लेन-देन प्रभावित हुआ। व्यापारियों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस, ऋण प्रक्रियाओं और अन्य जरूरी बैंकिंग सेवाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। समझौता हुआ तो फैसला क्यों नहीं : कर्मचारी कर्मचारियों का कहना है कि सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग सेवा कोई नई या असंभव मांग नहीं है। कई सरकारी और निजी संस्थानों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। ऐसे में समझौते के बावजूद सरकार का निर्णय न लेना कर्मचारियों के मनोबल और भरोसे को तोड़ रहा है। बैंक कर्मचारी प्रतिनिधि ने कहा हम हड़ताल नहीं चाहते थे, लेकिन जब सरकार खुद किए गए समझौते पर भी फैसला नहीं लेती, तो कर्मचारियों के पास और कोई रास्ता नहीं बचा।


