फाइव डे बैंकिंग लागू करने की मांग को लेकर आज देशभर समेत सोनीपत में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की, जिसके चलते सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की अधिकांश शाखाओं में कामकाज ठप रहा। हड़ताल का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ा, जहां कैश लेन-देन से लेकर लोन और अन्य बैंकिंग सेवाएं बाधित रहीं। यूएफबीयू के बैनर तले हुई देशव्यापी हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले आज देशभर के बैंक कर्मचारियों ने एकदिवसीय हड़ताल की। इस दौरान अधिकांश बैंक शाखाएं बंद रहीं और कर्मचारियों ने काम से दूर रहकर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
हड़ताल के चलते बैंकों के कैश काउंटर, चेक क्लीयरेंस, पासबुक अपडेट, लोन संबंधी कार्य और अन्य ग्राहक सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित रहीं। कई जगहों पर ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
फाइव डे बैंकिंग मुख्य मांग
यूएफबीयू के प्रदेश सह सचिव जितेंद्र ने बताया कि बैंक कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित फाइव डे बैंकिंग की मांग ही हड़ताल का मुख्य कारण है। कर्मचारी चाहते हैं कि सप्ताह में केवल पांच दिन बैंकिंग कार्य हो और शनिवार-रविवार को पूर्ण छुट्टी लागू किया जाए। समझौते के बावजूद लागू नहीं हुआ फैसला
यूनियन नेताओं का कहना है कि मार्च 2024 में हुए समझौते में सभी शनिवार को छुट्टी देने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से इसे अब तक लागू नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सरकार के साथ बैठक बेनतीजा रही
जितेन्द्र सरदाना यूनियन सचिव ने बताया कि 23 जनवरी को सरकार के साथ हुई बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। कर्मचारियों की मांगों पर कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं होने से असंतोष और गहरा गया, जिसके चलते हड़ताल का फैसला लिया गया। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि कर्मचारियों की संख्या सीमित है। फाइव डे बैंकिंग लागू होने से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
शाखाओं के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी
हड़ताल के दौरान कई शहरों में बैंक कर्मचारियों ने शाखाओं के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। ग्राहकों से मांगी माफी, हड़ताल को बताया मजबूरी
AIPNBOA सर्कल प्रेजीडेंट प्रियंका भारद्वाज का कहना है कि वे हड़ताल नहीं करना चाहते और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं देना चाहते हैं, लेकिन काम के अत्यधिक दबाव के कारण मजबूरी में सांकेतिक हड़ताल करनी पड़ी। ग्राहकों को हुई असुविधा के लिए खेद जताते हुए कहा गया कि हड़ताल के बाद लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा।


