भाजपा नेत्री को बोलेरो से दम तोड़ने तक कुचला था:भाजपा सांसद हिमाद्री की महिला असिस्टेंट की मर्डर मिस्ट्री, मौत के 7 दिन बाद SIT गठित

भाजपा नेत्री को बोलेरो से दम तोड़ने तक कुचला था:भाजपा सांसद हिमाद्री की महिला असिस्टेंट की मर्डर मिस्ट्री, मौत के 7 दिन बाद SIT गठित

शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह की महिला असिस्टेंट रहीं भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला की मौत अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक खौफनाक मर्डर मिस्ट्री बन चुकी है। रोशनी को सरेराह तब तक कारों से कुचला गया, जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं। जान बचाकर भाग रही महिला नेत्री को पहले कार से टक्कर मारकर गिराया गया, फिर दूसरी कार आगे-पीछे होकर उसे रौंदती रही। लोग जब पहुंचे, तब तक शरीर का ज्यादातर हिस्सा क्षत-विक्षत हो चुका था। कार के नीचे दबी रोशनी को बचाने 15 लोगों ने करीब 45 मिनट तक कार हटाने के लिए मशक्कत की। महिला प्रत्यक्षदर्शी ने कहा- मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी बेरहम मौत नहीं देखी। पिता कहते हैं- बेटी की डोली उठाने का सपना था, लेकिन इन्हीं कंधों पर उसकी अर्थी उठाई। बेटी का सिर से लेकर गर्भाशय और पैरों तक शरीर का कोई हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा था। 48 घंटे उसने जो सहा, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस दहशत भरे मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए रीवा एसपी ने रोशनी की मौत के सात दिन बाद 23 जनवरी को एसआईटी का गठन किया। रोशनी की मौत के बाद भास्कर टीम वारदात स्थल पहुंची और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की। पढ़िए, चश्मदीद, परिवार और पुलिस के अनुसार बताए पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट… 14 जनवरी को संक्रांति की मिठाई से लेकर मौत तक
14 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह की रीवा से करीब 50 किमी दूर बेलवा की रहने वाली असिस्टेंट रोशनी शुक्ला को एक कॉल आया। कॉल उस दलिया प्लांट के संचालक का था, जिसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी हाल ही में रोशनी को सौंपी गई थी। वह एक दिन पहले ही सांसद हिमाद्री के दिल्ली स्थित आवास से लौटकर आई थी। संचालक ने मकर संक्रांति की मिठाई और शुभकामनाएं देने, उसे प्लांट आने को कहा था। रोशनी ने भाई से कहा- साथ चलो, लेकिन घरेलू काम में व्यस्त होने के कारण भाई ने कहा- मैं अभी मेन रोड तक छोड़ देता हूं। वहां से तुम बस से निकल जाना। ठंड भी ज्यादा है, बस से जाना ठीक रहेगा। भाई ने उसे बस स्टॉप तक छोड़ दिया। रोशनी बस से रीवा स्थित दलिया प्लांट पहुंची और यहां करीब आधे घंटे रुकी। उसने घर पर कॉल कर बताया कि काम पूरा हो गया है और वह बस से लौट रही है। बस ने रात करीब 8.45 बजे उसे बेलवा मोड़ पर उतार दिया। बस स्टॉप पहुंचने से कुछ देर पहले ही रोशनी ने भाई को फोन कर कहा कि वह पहुंचने वाली है। अंधेरा हो गया है, इस कारण उसे लेने आ जाए। भाई- उसे लेने पहुंचता, इसके पहले ही बस स्टॉप पर पहुंच चुकी थी। युवक ने बदतमीजी की तो रोशनी ने कहा- चप्पल से मारूंगी
बेलवा मोड़ पर उतरी रोशनी ने सोचा भाई आ रहा है। यहां खड़े रहने से अच्छा है कि तब तक पैदल आगे बढ़ूं। स्टॉप से करीब 300 मीटर आगे वह मोड़ पर पहुंची ही थी कि दो बोलेरो गाड़ियां उसे खड़ी नजर आईं। वह गाड़ी के पास से गुजरी तो बोलेरो सवार युवक ने रोशनी से बदतमीजी की। रोशनी ने गुस्से में कहा- अगर अब हरकत की तो तुझे चप्पल से मारूंगी। इतना कहकर रोशनी आगे बढ़ गई। दोनों गाड़ियां रोशनी के पीछे चल दीं। कुछ दूर बाद एक गाड़ी रोशनी के आगे हो ली, जबकि दूसरी पीछे। रोशनी बचने के लिए इधर-उधर देखती हुई दौड़ी। हालांकि कुछ दूर बाद दोनों गाड़ियां तेजी से आगे निकल गईं। ड्राइवर आगे-पीछे गाड़ी करते हुए रोशनी को रौंदता रहा
गाड़ियों के गुजरने के बाद रोशनी की जान में जान आई। वह डरी-सहमी तेजी से आगे बढ़ने लगी। वह सड़क से ही लगे सुनीता सिंह के घर के पास पहुंची ही थी कि अचानक वही एक गाड़ी तेजी से दौड़ती हुई उसकी ओर आई। खुद को बचाने के लिए रोशनी घर में लगी नेट की तरफ भागी, लेकिन बच नहीं सकी। बोलेरो उसे कुचलते हुए आगे निकल गई। इसके तत्काल बाद बिना नंबर की दूसरी बोलेरो आई और उसे रौंदते हुए निकली। रोशनी चीखती रही और ड्राइवर आगे-पीछे गाड़ी करते हुए रोशनी को रौंदता रहा, आखिरकार गाड़ी पलट गई। रोशनी गाड़ी के नीचे दबी थी और उसकी चीख अब बंद हो चुकी थी। लोग रोशनी को बचाने दौड़े, ड्राइवर बोलेरो लेकर भागा
सबसे पहले जिस गाड़ी ने रोशनी को कुचला था, वह अब फिल्मी अंदाज में दोबारा लौटकर पास ही मैदान में खड़ी हो चुकी थी। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि लोग भी तत्काल नहीं पहुंच पाए।लोग रोशनी को बचाने दौड़े। मैदान में खड़ी गाड़ी तेजी से वहां से रवाना हो गई। कुछ लोगों ने उसका पीछा करने की कोशिश की, लेकिन वे पकड़ नहीं आए। लोगों ने देखा- रोशनी गाड़ी के नीचे दबी हुई है। इसके बाद उसे बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शी बोले- कार को उठाकर लड़की को बाहर निकाला
प्रत्यक्षदर्शी रामलखन आदिवासी ने बताया कि रात के करीब 9 बजे रहे होंगे, जब हम लोग लड़की को बचाने के लिए मौके पर पहुंचे, उसकी हालत देखकर मेरे तो होश उड़ गए। मैं वह नजारा देखकर सहम गया था। यह सोच रहा था कि इतनी बुरी हालत में लड़की की सांसें आखिर कैसे चल रही हैं। वह जिंदगी व मौत के बीच झूल रही थी। पास के एक घर में कुछ समय पहले निर्माण कार्य हुआ था, वहां से बड़ी-बड़ी बांस की बल्लियां लेकर आए। करीब 15 लोगों ने मिलकर कार को ऊपर उठाने की कोशिश की। रामलखन के मुताबिक- करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद बल्लियों की मदद से कार को उठाकर लड़की को बाहर निकाला। उसकी रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी, एक पैर तीन जगह से टूटा हुआ था। गर्भाशय करीब नष्ट हो चुका था। शरीर का कोई अंग सही नहीं बचा था। सिर के पीछे से लगातार खून बह रहा था। हालत देखकर उम्मीद नहीं लग रही थी कि वह जिंदा बचेगी। रामबुटान बोलीं- इससे ज्यादा दर्दनाक मौत नहीं हो सकती
प्रत्यक्षदर्शी रामबुटान रावत कहती हैं- अपनी पूरी जिंदगी में इससे अधिक दर्दनाक मौत उन्होंने नहीं देखी। लड़की की हालत देखकर मैं रो पड़ी थी। कड़ी मशक्कत के बाद जब उसे कार के नीचे से बाहर निकाला गया तो मैंने ही उसका चेहरा साफ किया था। सिर को अपनी गोद में रखा था। भले ही मैं उस लड़की को नहीं जानती थी, लेकिन उस पल वह मुझे अपनी बेटी जैसी ही लगी। यह सोचकर दिल पसीज गया कि आज भी किसी महिला और बेटी को इस तरह सरेराह कुचलकर मार दिया जाता है। उनकी हालत देखकर साफ समझ आ रहा था कि पेट और गर्भाशय से लेकर पैर के आखिरी अंगूठे तक शरीर का हर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। मरणासन्न अवस्था में युवती को मैं नम आंखों से देख रही थी, कुछ कर नहीं सकती थी। चार घंटे पहले से गाड़ी वाले घूम रहे थे, शायद रेकी कर रहे थे
प्रत्यक्षदर्शी सुनीता सिंह ने रोते हुए बताया कि ऐसा खौफनाक मंजर कभी नहीं देखा। मैं इसे कभी नहीं भूल पाऊंगी। घटना वाले दिन, दो फोर व्हीलर वाहन करीब 4 घंटे तक इलाके में घूमते रहे। दोनों वाहन शाम 5 बजे से ही 200 मीटर के दायरे में कभी खड़े होते तो कभी इधर-उधर चक्कर मार रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें किसी का इंतजार हो। जैसे ही रोशनी बस से उतरकर उनके घर के सामने से गुजरी, दोनों गाड़ी वालों ने उसका पीछा किया। रोशनी मेरे घर के कुछ आगे लगी नेट की जाली के पास ही पहुंची थी। इस दौरान तेजी से आई बोलेरो ने उसे कुचला और आगे निकल गई, फिर पीछे से दूसरी कार ने भी कुचल डाला। पहली कार फिल्मी अंदाज में वापस लौटकर पास के मैदान में खड़ी हो गई। रोशनी की मां बोलीं- इससे अच्छा तो मुझे मौत आ जाती
रोशनी की मां तारा शुक्ला कहती हैं- बेटी बीते कई सालों से शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह के यहां काम कर रही थी। वह परछाई की तरह उनके साथ रहती थी। दिल्ली स्थित आवास पर भी और शहडोल में भी सांसद का कामकाज संभालती थी। दो दिन पहले ही वह दिल्ली से घर लौटी थी। तारा ने कहा कि बेटी को पाल-पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया और उसकी हर जरूरत पूरी की, ताकि वह काबिल बन सके। जब लगा कि बेटी समझदार और सयानी हो गई है, तभी दरिंदों की नजर उस पर पड़ गई। यह सब देखने से अच्छा तो मुझे मौत आ जाती। मैं जिंदा थी और हत्या के बाद बेटी का शव हमारे सामने पड़ा था। तारा ने महिला सुरक्षा के दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब सरेराह मेरी बेटी को गाड़ियों के नीचे रौंद दिया, तब ये दावे कहां थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब बहन-बेटियों का घर से निकलना भी गुनाह हो गया है, क्या रीवा में महिलाएं सुरक्षित होकर काम भी नहीं कर सकतीं। पिता बोले- बेटी की डोली उठानी थी, अर्थी उठानी पड़ी
पिता शिवाकांत ने बताया कि रोशनी ने अपने करियर की शुरुआत पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के यहां काम करके की थी। चुनाव प्रचार सहित कई अहम जिम्मेदारियां उसने निभाईं। बाद में देवेंद्र दुबे के जरिए उसका परिचय शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह से हुआ, जिसके बाद उसने सांसद कार्यालय की जिम्मेदारी संभाली। वे भोपाल में नौकरी करते थे और बच्चे भी वहीं साथ रहते थे। तब से उसका अधिकतर समय दिल्ली और शहडोल के बीच आने-जाने में बीतता था। कुछ दिन पहले ही वह रीवा आई थी और बताया था कि दिल्ली के साथ-साथ देवेंद्र दुबे भैया के जरिए उसे एक दलिया प्लांट की देख-रेख की जिम्मेदारी भी मिली है, इसलिए अब दोनों जगह रहना होगा। भाई बोला- बहने ने संकेत दिया था, कहती थी- मुझे खतरा है
भाई प्रकाश शुक्ला ने बताया कि बहन ने पहले ही संकेत दिए थे कि उसे कुछ लोगों से खतरा है। वह चिंता और तनाव में रहती थी, लेकिन हमेशा कहती थी कि वक्त आने पर सब कुछ बताएगी। शायद वह नहीं चाहती थी कि सच जानकर परिवार परेशान हो जाए। प्रकाश ने कहा कि रोशनी से कई बार पूछा, लेकिन वह यही कहती रही- अभी इतना जान लो कि कुछ लोग मेरे पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। आखिरी दिन भी रोशनी ने फोन किया था। मैं, उसे लेने के लिए निकला था, जब तक पहुंच पाता, उसे बेरहमी से कुचल दिया गया था। उन्होंने बताया कि मैं तो थोड़ा आगे निकल गया था। भीड़ देखकर वापस लौटा तो पाया मेरी छोटी बहन जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रही थी। पुलिस बोली- अभी कार की जानकारी नहीं है
थाना प्रभारी दीपक तिवारी ने बताया कि जांच चल रही है। जिस कार से टक्कर मारी गई वह किसके नाम पर है, अभी इसकी जानकारी नहीं है। वारदात करने वाले चालक की जानकारी और गिरफ्तारी भी अभी नहीं हो पाई है। मामला हिट एंड रन का है या फिर हत्या का है, दोनों ही एंगल से जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट कर पाएंगे। यह बात तो तय है कि कार से टक्कर मारी गई, लेकिन किसी के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। एसडीओपी उमेश प्रजापति ने बताया कि मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। मर्ग कायम कर पड़ताल जारी है। एसपी ने एसआईटी को जांच सौंपी है। एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा ने कहा कि मामले की पड़ताल में जुटे हुए हैं। सभी तथ्यों और सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जा रहे हैं। जल्द मामले में आने वाले तथ्यों के साथ अग्रिम वैधानिक कार्रवाई करेंगे। मामले की गहन जांच के लिए रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह के द्वारा एसआईटी टीम गठित की गई है। संबंधित खबर पढ़ें… युवती को कार से कुचलने का आरोप:रीवा से भोपाल एम्स रेफर रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र के बेलवा मोड़ पर युवती रोशनी शुक्ला (25) को बोलेरो वाहन से कुचल दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। युवती को पहले सिरमौर अस्पताल, फिर संजय गांधी अस्पताल और अब भोपाल एम्स के लिए रेफर किया गया है। जहां भोपाल में ही उसका इलाज चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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