नवादा में युवक ने पारिवारिक विवाद के बाद जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है। युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना जिले के नारदीगंज प्रखंड के फल्गु गांव में हुई। पति-पत्नी और बेटे के बीच हुए विवाद के बाद युवक ने यह कदम उठाया। तबीयत बिगड़ने पर उसे नारदीगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में भर्ती कराया गया, जहां से उसकी चिंताजनक हालत को देखते हुए नवादा रेफर कर दिया गया। घायल युवक की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है। बेटे की बात से हुआ था आहत परिजन के अनुसार, अनिल का अपनी पत्नी से विवाद हुआ था। जब बेटे ने इसका विरोध किया, तो उससे भी बहस हो गई। बेटे ने गुस्से में कहा था, ‘अगर हम मरेंगे तो फिर क्या होगा?’ इसी बात से आहत होकर अनिल ने घर में रखी ‘विक्टर’ नामक दवा खा ली। ‘विक्टर’ नामक यह दवा एक प्रमुख सिस्टमिक कीटनाशक है। इसका उपयोग फसलों में रस चूसने वाले कीड़ों जैसे माहू, थ्रिप्स, जेसिड्स और सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से इमिडाक्लोप्रिड तकनीक का इस्तेमाल होता है। अस्पताल में चल रहा इलाज परिवार के सदस्य तुरंत दवा का पैकेट लेकर अस्पताल पहुंचे, जिससे डॉक्टरों को बेहतर इलाज करने में मदद मिली। अस्पताल में भर्ती मरीज का पल्स रेट और ऑक्सीजन स्तर कम हो रहा था, लेकिन डॉक्टरों द्वारा सुरक्षित और प्रभावी इलाज किया जा रहा है। नवादा में युवक ने पारिवारिक विवाद के बाद जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है। युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना जिले के नारदीगंज प्रखंड के फल्गु गांव में हुई। पति-पत्नी और बेटे के बीच हुए विवाद के बाद युवक ने यह कदम उठाया। तबीयत बिगड़ने पर उसे नारदीगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में भर्ती कराया गया, जहां से उसकी चिंताजनक हालत को देखते हुए नवादा रेफर कर दिया गया। घायल युवक की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है। बेटे की बात से हुआ था आहत परिजन के अनुसार, अनिल का अपनी पत्नी से विवाद हुआ था। जब बेटे ने इसका विरोध किया, तो उससे भी बहस हो गई। बेटे ने गुस्से में कहा था, ‘अगर हम मरेंगे तो फिर क्या होगा?’ इसी बात से आहत होकर अनिल ने घर में रखी ‘विक्टर’ नामक दवा खा ली। ‘विक्टर’ नामक यह दवा एक प्रमुख सिस्टमिक कीटनाशक है। इसका उपयोग फसलों में रस चूसने वाले कीड़ों जैसे माहू, थ्रिप्स, जेसिड्स और सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से इमिडाक्लोप्रिड तकनीक का इस्तेमाल होता है। अस्पताल में चल रहा इलाज परिवार के सदस्य तुरंत दवा का पैकेट लेकर अस्पताल पहुंचे, जिससे डॉक्टरों को बेहतर इलाज करने में मदद मिली। अस्पताल में भर्ती मरीज का पल्स रेट और ऑक्सीजन स्तर कम हो रहा था, लेकिन डॉक्टरों द्वारा सुरक्षित और प्रभावी इलाज किया जा रहा है।


