मप्र हाईकोर्ट की अनुमति के बाद एमपीपीएससी परिसर के बाहर चार दिन से चल रहा धरना आज दोपहर बाद खत्म हो जाएगा। धरना खत्म होने से पहले नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के नेतृत्व में स्टूडेंट आयोग को अपनी मांगों को पूरी करने के लिए ज्ञापन सौंपेंगे। एमपीपीएससी के ओएसडी डॉ. रवींद्र पंचभाई ने आयोग का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि आज स्टूडेंट ज्ञापन सौंपेंगे। उनकी मांगों का अध्ययन करने के बाद ही हम अपना पक्ष रख सकेंगे। दरअसल, ठीक 13 महीने पहले दिसंबर 2024 में भी सैकड़ों पीएससी अभ्यर्थियों ने इसी तरह का आंदोलन किया था, जो करीब एक सप्ताह तक चला था, तब जिला प्रशासन ने कई मांगें मानने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन वादों में से अधिकांश आज तक पूरे नहीं हुए। याचिकाकर्ता संस्था ने 22 से 28 जनवरी तक MPPSC कार्यालय के बाहर धरना देने की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है और पूर्व में ऐसे प्रदर्शनों से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन के अनुमति न देने के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया। कोर्ट ने शर्तों के साथ 24 जनवरी से 27 जनवरी 2026 की दोपहर तक प्रदर्शन की अनुमति दी। आदेश के मुताबिक, 26 जनवरी को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के कारण प्रदर्शन स्थगित रहेगा। 27 जनवरी को दोपहर 12 बजे MPPSC के सक्षम अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा। हालांकि NEYU के संयोजक राधे जाट ने कहा कि हमारी मांगें जब तक मान नहीं ली जाती, हम तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। पिछली मांगें अधूरी, नाराजगी बरकरार
पिछले आंदोलन के दौरान जिन 6–7 मांगों को मानने की बात कही गई थी, उनमें से केवल दो ही लागू हो सकीं। अधिक पदों पर भर्ती का वादा पूरा नहीं हो सका। अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत मांगें आज भी लंबित हैं। सबसे बड़ी मांग: इंटरव्यू अंकों में कटौती
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग स्टेट सर्विस परीक्षा के इंटरव्यू अंकों को लेकर है। उनका कहना है कि185 अंकों का इंटरव्यू अत्यधिक है, इससे चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका रहती है। इसे घटाकर 100 अंक किया जाए।


