पंजाब कांग्रेस में दलित Vs जट्ट सिख शुरू होते ही राहुल गांधी ने सारे नेता दिल्ली तलब कर लिए। 22 जनवरी को मीटिंग के बाद 4 दिन बीत गए लेकिन सभी नेता खामोश हो गए हैं। मीडिया से बात करना तो दूर, नेताओं ने सोशल मीडिया पर कुछ लिखने-बोलने से दूरी बना ली है। नेताओं को डर है कि कहीं CM कुर्सी की दावेदारी और नेतागिरी दिखाने के चक्कर में उनकी टिकट ही न छिन जाए। वहीं राहुल गांधी की मीटिंग के बाद जिस तरह से पूर्व CM चरणजीत चन्नी के बयान पर एतराज हुआ, उससे पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग की स्थिति पार्टी में मजबूत होती दिख रही है। यह इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी की मीटिंग के बाद महासचिव केसी वेणुगोपाल ने साफ कर दिया कि पंजाब में लीडरशिप चेंज नहीं होगी। उलटा अगर किसी ने इन सब बातों पर मीडिया या सोशल मीडिया पर कुछ कहा तो पार्टी अनुशासनहीनता मानकर सख्त कार्रवाई करेगी। हालांकि इसके बावजूद पंजाब कांग्रेस के भीतर सब कुछ ऑल इज वेल नहीं लग रहा है। कांग्रेस में अचानक खलबली क्यों मची थी
चंडीगढ़ में कांग्रेस SC सैल की मीटिंग में पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने अपनी ही पार्टी को घेरा। चन्नी ने कहा कि पार्टी में सभी बड़े पदों पर अपर कास्ट (जट्ट सिख) के नेता हैं। दलित कहां जाएं। पद कोई देते नहीं और चुनाव में सारा काम करवाने की उम्मीद करते हो। यूं तो यह बंद हॉल में हुआ लेकिन बातें मीडिया में लीक हो गईं। इसके बाद चन्नी का वह वीडियो भी आ गया, जिसमें वह आक्रामक तरीके से अपनी ही पार्टी को घेरते हुए नजर आए। जिससे विरोधियों को भी मुद्दा मिल गया कि कांग्रेस में दलितों को उचित जगह नहीं मिल रही। इस बयान से चन्नी की पॉलिटिक्स पर क्या असर पड़ा
पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री के दावेदारों में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की पोजिशन सबसे स्ट्रॉन्ग मानी जा रही थी। हालात यह थे कि राजा वड़िंग को यह कहना पड़ा था कि कांग्रेस में जो खुद को सीएम कैंडिडेट बताता है वो बनता नहीं है। चन्नी के पक्ष में सब कुछ ठीक चल रहा था। मगर, चन्नी के बयान ने सारे समीकरण बदल दिए। उन्हें दिल्ली बैठक में कड़ी फटकार सुननी पड़ी। पार्टी ने यहां तक कह दिया कि इस तरह के बयान से पार्टी की एकजुटता और चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंच सकता है। हाईकमान के सख्त रवैये से चन्नी की सीएम पद की दावेदारी कमजोर होती नजर आ रही है। पंजाब प्रभारी को पहले ही खटक रहा था चन्नी का रवैया
राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस ने पंजाब में मनरेगा स्कीम का नाम बदलने और उसमें किए गए बदलाव को लेकर विरोध शुरू किया। इसे मनरेगा महासंग्राम रैली का नाम दिया गया। कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल इन कार्यक्रमों में शामिल रहे। इस दौरान प्रधान राजा वड़िंग, विधायक दल नेता प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर रंधावा तो रैली में आए लेकिन चन्नी नजर नहीं आए। वड़िंग और रंधावा ने तो खुले मंच से यहां तक कह दिया कि वह चीफ मिनिस्ट्री के कैंडिडेट नहीं हैं। मगर, चन्नी ने कुछ नहीं कहा। चन्नी की पार्टी प्रोग्राम से गैरहाजिरी प्रभारी बघेल को भी खटक रही थी। उन्होंने सारी रिपोर्ट हाईकमान को दे दी। तब तक हाईकमान इग्नोर करता रहा लेकिन जैसे ही अपर कास्ट का मुद्दा उठाया तो भरी मीटिंग में चन्नी को हद में रहने की नसीहत दे दी गई। टिकट कटने का डर, नेताओं की चुप्पी
पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी के पीछे सबसे बड़ा कारण आगामी विधानसभा चुनाव और टिकट का सवाल माना जा रहा है। नेताओं को डर है कि अगर उन्होंने खुलकर किसी गुट का समर्थन किया या हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठाए, तो उनकी टिकट पर संकट आ सकता है। इसी वजह से टकसाली नेता भी “हाईकमान का ऑर्डर है” कहकर बात को टाल रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में इस समय हर नेता खुद को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। पूर्व मंत्री बोले- गुटबाजी जैसे शब्दों से कार्यकर्ता भ्रम में आते हैं
लुधियाना से पूर्व कांग्रेसी राकेश पांडे का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी नहीं है। सभी नेता अपने अपने स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस में गुटबाजी की बात कहकर कार्यकर्ता भ्रम में आते हैं। कांग्रेस में गुटबाजी का जानबूझकर शोर मचाया जाता है ताकि कार्यकर्ताओं को भ्रम में डाला जा सके लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता इस तरह के भ्रम में नहीं फंसते।
पंजाब कांग्रेस में उलझा चन्नी का मसला:राजा वड़िंग मजबूत हुए, राहुल गांधी की वॉर्निंग से नेता खामोश, CM कुर्सी दूर, अब टिकट कटने का डर


