Electronic Warfare: दुनिया के सियासी गलियारों में इस समय एक ही शब्द गूंज रहा है ,”डिस्कॉम्बोबुलेटर” (Trump Secret Weapon Discombobulator)। ऐसा दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro Capture Details) को पकड़ने के लिए एक ऐसे गुप्त हथियार का इस्तेमाल किया, जिसके बारे में बात करने तक की अनुमति नहीं है। यह कोई सामान्य मिसाइल या बम नहीं, बल्कि तकनीक का एक ऐसा मायाजाल है जिसने बिना खून बहाए तख्तापलट जैसी स्थिति पैदा कर दी।
क्या है ‘डिस्कॉम्बोबुलेटर’? एक रहस्यमयी तकनीक
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इस ‘सीक्रेट वैपन’ का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने इसके तकनीकी विवरण शेयर करने से साफ इनकार कर दिया। ‘डिस्कॉम्बोबुलेटर’ (Discombobulator) का शाब्दिक अर्थ होता है-‘पूरी तरह से भ्रमित कर देने वाला’।
यह एक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) टूल (US Special Operations Venezuela)
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह एक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) टूल हो सकता है। यह तकनीक दुश्मन के संचार तंत्र, रडार और यहां तक कि इंसानी दिमाग के निर्णय लेने की क्षमता को कुछ समय के लिए सुन्न कर सकती है। वेनेजुएला के मामले में, ऐसा लगता है कि इसी तकनीक ने मादुरो की सुरक्षा घेरे को पूरी तरह ‘डिस्कनेक्ट’ कर दिया, जिससे अमेरिकी ऑपरेशन सफल रहा।
मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी रणनीति (Trump Venezuela Foreign Policy)
निकोलस मादुरो लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद सत्ता पर काबिज थे। लेकिन ट्रंप के इस “गुप्त ऑपरेशन” ने रातोंरात बाजी पलट दी। यह रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला में सीधे सैन्य हमले के बजाय ‘साइकोलॉजिकल और तकनीकी’ हमले को चुना।
ट्रंप की विदेश नीति की सबसे बड़ी जीत
इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य मादुरो को उनके ही देश में अलग-थलग करना था। जब संचार के सारे साधन ठप हो गए और सुरक्षाकर्मियों में भ्रम फैल गया, तब अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के लिए काम आसान हो गया। ट्रंप इसे अपनी विदेश नीति की सबसे बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं।
अब दुनिया रह गई दंग
इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
रूस और चीन: इन दोनों देशों ने अमेरिका पर ‘अवैध तकनीकों’ के इस्तेमाल और दूसरे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
वेनेजुएला की जनता की राय
वहां का एक बड़ा वर्ग इस बदलाव से खुश है, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल ने भविष्य के लिए डर भी पैदा कर दिया है।
सैन्य विशेषज्ञ: वे इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि क्या अमेरिका के पास वाकई ऐसा कोई हथियार है जो रडार और उपग्रहों को पूरी तरह चकमा दे सकता है।
भविष्य के युद्धों का चेहरा
इस घटना का एक बड़ा पहलू यह है कि अब युद्ध केवल तोप और टैंकों से नहीं लड़े जाएंगे। ‘डिस्कॉम्बोबुलेटर’ जैसी तकनीकें यह बताती हैं कि आने वाले समय में ‘साइबर-इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक’ हथियार ही दुनिया पर राज करेंगे। यदि अमेरिका के पास ऐसा हथियार है, जो किसी देश के नेतृत्व को “अंधा और बहरा” कर सकता है, तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल देगा।
क्या है ट्रंप की अगली योजना ?
खुलासे पर रोक: अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियां इस हथियार की जानकारी सार्वजनिक होने से रोकने में जुटी हुई हैं, ताकि दुश्मन देश इसका तोड़ न ढूंढ सकें।
कानूनी बहस: क्या किसी देश के राष्ट्रपति के खिलाफ ऐसी तकनीक का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है? इस पर संयुक्त राष्ट्र में बहस छिड़ने की संभावना है।
अगला निशाना: सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप इस हथियार का डर दिखाकर अन्य विरोधी देशों (जैसे उत्तर कोरिया या ईरान) को भी झुकाने की कोशिश करेंगे?
डोनाल्ड ट्रंप का यह ‘सीक्रेट वैपन’
बहरहाल,डोनाल्ड ट्रंप का यह ‘सीक्रेट वैपन’ कहानी है या हकीकत, यह तो समय बताएगा। लेकिन निकोलस मादुरो का गिरना और वेनेजुएला में अमेरिकी प्रभाव का बढ़ना इस बात का गवाह है कि परदे के पीछे कुछ न कुछ ऐसा जरूर हुआ जिसने विज्ञान और युद्ध के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है।


