मुजफ्फरपुर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिला। ‘मुजफ्फरपुर परिवार’ के तत्वावधान में युवाओं ने सोमवार को शहर में 1100 फीट लंबी तिरंगा यात्रा निकाली। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और गौरव की भावना को जागृत करना था। देशभक्ति के गीतों और नारों के साथ तिरंगा यात्रा अखाड़ाघाट सिकंदरपुर रोड से प्रारंभ हुई। सैकड़ों युवाओं ने विशाल ध्वज थामे हुए सरैयागंज टावर, ऐतिहासिक बाबा गरीबस्थान मंदिर, हरिशभा चौक और कल्याणी से होते हुए मार्च किया। यात्रा का समापन वापस अखाड़ाघाट रोड पर हुआ। 1100 फीट लंबे तिरंगे को देखने के लिए लोग अपने घरों की छतों और खिड़कियों पर उमड़ पड़े। इस दौरान पूरा वातावरण ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के जयघोष से गूंज उठा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सांस्कृतिक गौरव की झांकी इस वर्ष की तिरंगा यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी थीम रही। मुजफ्फरपुर परिवार के संरक्षक आकाश कुमार सहनी ने बताया कि यात्रा को खास बनाने के लिए इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर आधारित विशेष झांकी के साथ निकाला गया। इस झांकी के माध्यम से भारतीय सेना की वीरता, अदम्य साहस और देश की सुरक्षा के लिए दिए गए बलिदानों को जीवंत रूप में दर्शाया गया। इसके साथ ही, बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी शानदार प्रदर्शन किया गया। झांकी में पटना का गौरव ‘गोलघर’, भगवान बुद्ध की ज्ञान भूमि और विश्व प्रसिद्ध ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ के स्वरूपों को शामिल किया गया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। युवाओं को जागरूक करने का संकल्प आकाश कुमार सहनी ने इस पहल के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं में देशप्रेम की भावना को मजबूत करना है। 1100 फीट लंबा तिरंगा हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास और वीर शहीदों के बलिदान को याद रखे। मुजफ्फरपुर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिला। ‘मुजफ्फरपुर परिवार’ के तत्वावधान में युवाओं ने सोमवार को शहर में 1100 फीट लंबी तिरंगा यात्रा निकाली। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और गौरव की भावना को जागृत करना था। देशभक्ति के गीतों और नारों के साथ तिरंगा यात्रा अखाड़ाघाट सिकंदरपुर रोड से प्रारंभ हुई। सैकड़ों युवाओं ने विशाल ध्वज थामे हुए सरैयागंज टावर, ऐतिहासिक बाबा गरीबस्थान मंदिर, हरिशभा चौक और कल्याणी से होते हुए मार्च किया। यात्रा का समापन वापस अखाड़ाघाट रोड पर हुआ। 1100 फीट लंबे तिरंगे को देखने के लिए लोग अपने घरों की छतों और खिड़कियों पर उमड़ पड़े। इस दौरान पूरा वातावरण ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के जयघोष से गूंज उठा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सांस्कृतिक गौरव की झांकी इस वर्ष की तिरंगा यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी थीम रही। मुजफ्फरपुर परिवार के संरक्षक आकाश कुमार सहनी ने बताया कि यात्रा को खास बनाने के लिए इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर आधारित विशेष झांकी के साथ निकाला गया। इस झांकी के माध्यम से भारतीय सेना की वीरता, अदम्य साहस और देश की सुरक्षा के लिए दिए गए बलिदानों को जीवंत रूप में दर्शाया गया। इसके साथ ही, बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी शानदार प्रदर्शन किया गया। झांकी में पटना का गौरव ‘गोलघर’, भगवान बुद्ध की ज्ञान भूमि और विश्व प्रसिद्ध ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ के स्वरूपों को शामिल किया गया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। युवाओं को जागरूक करने का संकल्प आकाश कुमार सहनी ने इस पहल के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं में देशप्रेम की भावना को मजबूत करना है। 1100 फीट लंबा तिरंगा हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास और वीर शहीदों के बलिदान को याद रखे।


