लुधियाना जिले के जगराओं और आसपास के इलाकों में सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के किसानों ने ट्रैक्टर और बाइक मार्च निकाला। जगराओं व सिधवां बेट ब्लॉक के किसान स्थानीय अनाज मंडी में एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने शहर और गांवों में एक विशाल मार्च निकाला। इस दौरान स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर सरकार के फैसले का जोरदार विरोध दर्ज कराया गया। किसानों की प्रमुख मांगों में चिप वाले स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला तुरंत रद्द करना, मीटर उतारकर दफ्तर में जमा करवाने वाले उपभोक्ताओं को पुराने मीटर वापस लगाना और किसानों को भेजे गए कानूनी नोटिस तुरंत वापस लेना शामिल था। इसके अतिरिक्त, मनरेगा योजना को खत्म करने की साजिश रोकने और बिजली एक्ट व बीज एक्ट जैसे किसान-विरोधी कानूनों को वापस लेने की भी मांग की गई। किसान नेता बोले- किसानों-मजदूरों पर थोपे जा रहे काले कानून रैली को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहड़का और ब्लॉक अध्यक्ष तरसेम सिंह ने कहा कि संसद के बजट सत्र में किसानों और मजदूरों के खिलाफ काले कानून थोपे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली एक्ट से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि बीज एक्ट के जरिए किसानों से अपने बीज रखने का अधिकार छीना जा रहा है। ब्लॉक सचिव रछपाल सिंह और जसविंदर सिंह ने चेतावनी दी कि मनरेगा खत्म करने, पुराने श्रम कानून रद्द करने और लेबर कोड लागू करने से ग्रामीण दलितों व मजदूरों की आजीविका पर सीधा हमला होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि उनका संगठन 12 फरवरी की देशव्यापी मजदूर हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होगा। रैली के बाद, ट्रैक्टरों और झंडों से सजी मोटरसाइकिलों का काफिला अनाज मंडी से रवाना हुआ। यह काफिला लाजपत राय रोड, कमल चौक, झांसी चौक, तहसीलदार रोड, बस स्टैंड, मलक रोड, रायकोट रोड से होते हुए लगभग एक दर्जन गांवों तक पहुंचा, जिसमें किसानों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर भी आवाज बुलंद की किसान नेताओं गुरतेज सिंह और निर्मल सिंह ने पंजाब सरकार से मांग की कि दर्ज पर्चे तुरंत रद्द किए जाएं, मजदूर नेता मुकेश मलौद को बिना शर्त रिहा किया जाए। प्रदर्शनकारियों में इंद्रजीत सिंह, मनजिंदर सिंह, प्रीतपाल सिंह, रणजीत सिंह, जगविंदर सिंह समेत ग्रामीण मजदूर यूनियन (मसाल) के नेता मदन सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान व मजदूर शामिल रहे।


