बरेली : प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नीतियों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह इस्तीफा सौंपा, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने 5 पेज के त्यागपत्र में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़कर कथित रूप से मारपीट की गई, जो ब्राह्मण समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता का अपमान है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि वह इससे मानसिक रूप से आहत हैं और ऐसे माहौल में सरकारी सेवा में बने रहना उनके लिए संभव नहीं है।
शंकराचार्य के शिष्यों से दुर्व्यवहार पर जताई नाराजगी
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि शिखा और चोटी साधु-संतों की धार्मिक पहचान का प्रतीक हैं। प्रशासन द्वारा इस तरह का व्यवहार केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपमान है। उन्होंने इसे चिंताजनक प्रवृत्ति बताते हुए अपने इस्तीफे का प्रमुख कारण बताया।
UGC की नीतियों के खिलाफ भी उठाई आवाज
इस्तीफा देने से पहले अलंकार अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने UGC के एक फैसले का विरोध किया। पोस्ट में उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए वापस लेने की मांग की थी। यह पोस्ट कुछ ही समय में वायरल हो गई और इसके बाद उनके इस्तीफे की पुष्टि हुई।
PCS अफसर के रूप में रहा है मजबूत करियर
ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री वर्ष 2019 में PCS अधिकारी बने थे। उन्होंने परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की थी। PCS में चयन से पहले वह करीब 10 वर्षों तक आईटी सेक्टर में कार्य कर चुके थे। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी पहचान एक सख्त और निर्णय लेने वाले अधिकारी की रही है।
प्रशासनिक हलकों में मची खलबली
एक कार्यरत सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा सार्वजनिक रूप से सरकारी नीतियों के विरोध में उतरना और पद से इस्तीफा देना दुर्लभ माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद शासन-प्रशासन अलर्ट मोड में है और पूरे मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।


