प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर हुए हंगामे और उससे जुड़े विवादों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया है कि उनके शिविर के बाहर हुए हंगामे के मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीसीटीवी फुटेज बयां करेंगे सच जब उनसे पूछा गया कि हंगामा करने वाले समूह की ओर से उनके शिष्यों पर मारपीट के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो शंकराचार्य ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो मौजूद हैं, जो अपने आप सच्चाई सामने रख देते हैं। स्टैंड स्पष्ट, सम्मान के साथ ले जाने तक स्नान नहीं मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और आगे के स्नान पर्वों को लेकर उठे सवालों पर शंकराचार्य ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका निर्णय पहले से तय है और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। शंकराचार्य ने दो टूक कहा, जब तक प्रशासन पूरे सम्मान के साथ हमें गंगा स्नान के लिए ले जाने नहीं आता, तब तक हम स्नान नहीं करेंगे।उन्होंने साफ किया कि यह किसी तिथि या पर्व से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि सम्मान और मर्यादा से जुड़ा विषय है। प्रशासन द्वारा विधिवत सम्मान दिए जाने के बाद ही संगम स्नान किया जाएगा। औरंगजेब टिप्पणी पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को जवाब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘औरंगजेब’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताने के सवाल पर शंकराचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि यह किसी संत की नहीं बल्कि एक आस्थावान हिंदू की भाषा है।शंकराचार्य ने कहा, जिन लोगों ने मंदिर तोड़े, मंदिरों में पूजित मूर्तियों को खंडित किया, उनके लिए औरंगजेब शब्द का प्रयोग करना गलत कैसे हो सकता है? आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिरों को तोड़ा गया और मूर्तियां हटाई गईं, तब अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की ओर से कोई विरोध क्यों नहीं हुआ।शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि मुख्यमंत्री के लिए एक शब्द के प्रयोग पर पीड़ा जताई जाती है, लेकिन जिस समय मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, मूर्तियां हटाई जा रही थीं, तब किसी को पीड़ा नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मंदिरों की जगह अब रेस्टोरेंट, बस स्टैंड और अन्य व्यावसायिक ढांचे खड़े कर दिए गए हैं, जो आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है। भगवान की भक्ति ही संत की पहचान शंकराचार्य ने कहा कि उनकी दृष्टि में वही व्यक्ति संत कहलाने योग्य है, जिसका मन भगवान से जुड़ा हो, न कि केवल नेताओं से। उन्होंने कहा, अगर भगवान पर आक्रमण हो रहा हो और उस समय कोई मौन रहे, तो यह ठीक नहीं है। भगवान की रक्षा के लिए आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मूर्तियों को तोड़ने से मना करने वाले हिंदू मजदूरों के साथ भेदभाव किया गया, जिसे उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है।


