लखनऊ में दरगाह शाहमीना शाह में प्रेसवार्त का आयोजन हुआ । इसमें दरगाह के सज्जादा नशीन राशिद मिनाई , विधायक रविदास मेहरोत्रा , शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद , सैयद बाबर अशरफ समेत बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्म गुरुओं और दरगाह से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान केजीएमयू प्रशासन की नोटिस को गैर कानूनी बताया। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सैयद बाबर अशरफ ने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के सभी आरोप गलत है। जिन मजारों को नोटिस दिया गया है वो केजीएमयू के बनने से पहले की है। नोटिस देने केजीएमयू प्रशासन के अधिकार क्षेत्र के बाहर है। सीमाओं को लांघ कर फर्जी तरीके से नोटिस दिया गया है। प्रशासन सूफ़ी दरगाहों और वक़्फ़ संपत्तियों में फर्जी हस्तक्षेप करके माहौल खराब करना चाह रहा है। ये कानून के खिलाफ है साथ ही की गंगा जमुनी सांस्कृतिक विरासत पर हमला है। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा ये धार्मिक स्थल 500 से 600 वर्ष पुराने है ,इसके कागज मांगा जा रहा है इससे बड़ा कोई मजाक नहीं हो सकता। सरकार के पास 30 साल पुराने डॉक्यूमेंट सुरक्षित नहीं रहते और हमसे 600 साल पुराने कागज मांगे जाते हैं। सरकार हमारे साथ मजाक कर रही है। जुल्म और न इंसाफी की भी इंतिहा होती है। जो दूसरी धार्मिक स्थल बने हैं उनके कागज कहां है यह भी बताया जाए। सभी थानों में एक धार्मिक स्थल बना हुआ है , उसके बारे में कोई बात नहीं करता। सभी पार्कों को धार्मिक स्थल बने है उसपर कार्रवाई कब होगी। विधायक रविदास ने कहा की मजारों को नोटिस देना यह माहौल खराब करने की कोशिश है। कोई भी व्यक्ति मजार की एक ईंट भी नहीं गिरा सकता। हम लोग मुंह तोड़ जवाब देंगे। किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ कोई अवैध कार्रवाई नहीं हो सकती। बुलडोजर को पहले हमारे ऊपर से गुजरना होगा। दरगाह शाहमीना और केजीएमयू में बने मजारों में हम लोगों की आस्था है यहां हिंदू मुस्लिम हर धर्म के लोग आते हैं।


