ममता कुलकर्णी का अविमुक्तेश्वरानंद पर निशाना, बड़े पद से पहले अहंकार त्यागना जरूरी

ममता कुलकर्णी का अविमुक्तेश्वरानंद पर निशाना, बड़े पद से पहले अहंकार त्यागना जरूरी

”आध्यात्मिक यात्रा केवल बाहरी दिखावे या पद से नहीं जुड़ी होती, बल्कि यह भीतर की अनुभूति और चेतना से जुड़ी होती है। मुझे कई ऐसी चीजें देखने और समझने का अवसर मिला है जो सामान्य जीवन में संभव नहीं होतीं। मैंने कल्कि अवतार को देखा है और यह भी देखा है कि भगवान परशुराम उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।”

‘आध्यात्मिक अनुभव बताने की चीज नहीं’

”आध्यात्मिकता के कुछ नियम होते हैं। हर बात को सार्वजनिक करना उचित नहीं होता। कुछ अनुभव केवल साधक और ईश्वर के बीच के होते हैं। मुझे बहुत कुछ पता है, लेकिन हर बात को बोलना या उजागर करना सही नहीं है।” यह बात ममता कुलकर्णी ने आईएएनएस से बातचीत में कही।

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर निशाना साधते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा, ”शंकराचार्य जैसे बड़े पद पर पहुंचने से पहले अहंकार का त्याग करना बेहद जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति के भीतर अहंकार बचा हुआ है, तो वह उस पद की गरिमा को नहीं समझ सकता।”

राम मंदिर मुद्दे पर ममता कुलकर्णी की टिप्पणी

राम मंदिर के मुद्दे पर ममता कुलकर्णी ने कहा, “जब लगभग पांच सौ साल के इंतजार के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब देश और समाज के लगभग सभी वर्गों ने इसका स्वागत किया था। उस समय शंकराचार्य को छोड़कर सभी ने इस ऐतिहासिक क्षण को स्वीकार किया। इसका दंड उन्हें मिला, जब उन्होंने राम मंदिर में न जाने की बात कही, उसी समय ज्योतिष मठ के पास भूस्खलन हुआ। यह ईश्वर का दंड था।”

ममता कुलकर्णी ने सत्य और धर्म पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सत्य से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं। धर्म का असली अर्थ ही सत्य है। अगर जीवन में सत्य नहीं है, तो किसी भी तरह का वस्त्र, पद, या पहचान बेकार है।

उन्होंने कहा, “मैं पिछले 25 सालों से भगवा वस्त्र पहन रही हूं और ध्यान, तप और साधना के मार्ग पर चल रही हूं। यही मेरी जीवनशैली है, लेकिन मैं खुद को किसी वस्त्र या पद से बंधा हुआ नहीं मानती।”

‘मुझे कट्टरता पसंद नहीं ‘

राजनीति पर बोलते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा, ”मुझे कट्टरता पसंद नहीं है और धर्म एक निजी विषय होना चाहिए।” उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राजनीतिक झुकाव पर भी टिप्पणी की और सवाल उठाया कि अगर समाजवादी पार्टी सत्ता में आ भी जाए, तो क्या गो-हत्या रुक जाएगी? उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात पर राय देते हुए कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, तब तक उन्हें दूर-दूर तक कोई दूसरा नेता दिखाई नहीं देता। वहीं, कांग्रेस के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से ज्यादा प्रियंका गांधी में संभावना दिखती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *