एटा में मुख्यमंत्री का फर्जी निजी सचिव (पीए) बनकर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर तीन लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज प्रकरण में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले के खुलासे के बाद जिले में फर्जी नियुक्तियों के नाम पर चल रहे ठगी के नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अखिलेश तिवारी पुत्र सुरेंद्र तिवारी के रूप में हुई है। वह महाराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के वर्गदवा गांव का निवासी बताया जा रहा है। इस मामले की शिकायत कासगंज जनपद के कथावाचक आचार्य राजपांडेय ने एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्याम नारायण सिंह से की थी। शिकायत के अनुसार, नवंबर माह में आरोपी अखिलेश तिवारी और उसके साथी रामप्रकाश खन्ना ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ा बताते हुए आपदा प्रबंधन विभाग में चपरासी और क्लर्क की नौकरी दिलाने का दावा किया। भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने फर्जी अधिसूचना भी दिखाई। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग समय पर ऑनलाइन और नकद माध्यम से कुल तीन लाख रुपये वसूल लिए। इनमें 1 लाख 82 हजार रुपये और 1 लाख 18 हजार रुपये की रकम शामिल है। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली और पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया और गाली-गलौज की। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए नवंबर में ही दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्याम नारायण सिंह ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया। इसी क्रम में पुलिस ने मुख्य आरोपी अखिलेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है और पुलिस उसके नेटवर्क तथा अन्य संभावित पीड़ितों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। आरोपी को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में दरोगा प्रेमपाल सिंह, दरोगा अब्दुल कादिर, कॉन्स्टेबल कुलदीप और कॉन्स्टेबल करणपाल शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि दूसरे आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।


