बुलंदशहर। गंगा-यमुना-जेवर एयरपोर्ट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बुलंदशहर जिले के 39 गांवों में स्थित लगभग 8,700 किसानों की लगभग 677 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। प्रशासन ने किसानों से 4 फरवरी तक संबंधित तहसील में अधिग्रहण से संबंधित आपत्तियां या सुझाव दर्ज कराने की अपील की है। इसके अतिरिक्त, सात गांवों की जमीन का अधिग्रहण यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत जिले के लगभग 8,700 किसानों को करीब 1,500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। एडीएम प्रशासन प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि आपत्तियों के निस्तारण के बाद भूमि अधिग्रहण की आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपने दस्तावेजों को समय पर दुरुस्त कराने और आपत्तियां दर्ज कराने का आग्रह किया है। भूमि अधिग्रहण के दायरे में आने वाले गांवों में खुर्जा तहसील के अमानुल्लापुर उर्फ मारहरा, इनायतपुर उर्फ मधुपुरा, कपना, भगवानपुर, हसनपुर लडूकी, बीघेपुर, सनैता शफीपुर, भदौरा, वरतौली, खवरा, धरारी, दीनौल, खलसिया चूहरपुर, विचौला और धरांऊ शामिल हैं। इसी प्रकार, बुलंदशहर तहसील के औरंगाबाद, हिंगथला उर्फ भावसी, चरौरा मुस्तफाबाद, सैदपुरा, इस्माइला, सराय छबीला, अडौली, दोहली, चिरचिटा, मामन खुर्द, मामन कलां, भाईपुर, ऐमनपुर, कलौली, बंगला पूठरी और पिपाला गांवों की भूमि भी इस परियोजना के तहत अधिग्रहित की जाएगी। इसके अलावा, स्याना, शिकारपुर और अनूपशहर तहसीलों के भी कई महत्वपूर्ण गांव इस एक्सप्रेसवे मार्ग का हिस्सा हैं। इन गांवों की विस्तृत सूची संबंधित तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शित कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही, जेवर एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी मिलने से आवागमन और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे।


