बिहारशरीफ नगर निगम बनने के 18 साल बाद भी कचरा प्रबंधन की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कचरा प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना का सपना अभी तक साकार नहीं हो पाया है। कचरा जहां-तहां डंप किया जा रहा है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जमीन की समस्या बनी सबसे बड़ी बाधा नगर निगम कचरा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 10 एकड़ जमीन की तलाश में जुटा है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। जिला प्रशासन ने भी इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं। नगर निगम के स्वच्छता मैनेजर कुंदन कुमार ने बताया कि शहर के आसपास 10 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है। अब हम लीज पर जमीन लेने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए जल्द ही विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। रोजाना 3-4 टन कचरे का बोझ शहर में प्रतिदिन घरों और नालियों से 3-4 टन कचरा निकलता है। इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित करने की कोई व्यवस्था न होने के कारण यह विभिन्न स्थानों पर अनियंत्रित तरीके से डंप किया जा रहा है। चकरसलपुर के पास बनाया गया डंपिंग यार्ड पूरी तरह भर चुका है और स्थानीय ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। इसी तरह बिहारशरीफ-राजगीर मार्ग के कोसुक गांव के पास पंचाने नदी के निकट भी कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है। नगर निगम पोकलेन मशीन से इस कचरे को समतल कर देता है ताकि दूर से यह दिखाई न दे, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
चार मेयरों के कार्यकाल में भी नहीं बना प्लांट 2002 में बिहारशरीफ को नगर परिषद और 2007 में नगर निगम का दर्जा मिला। इन 18 वर्षों में दिनेश कुमार, सुधीर कुमार, वीणा कुमारी और वर्तमान मेयर अनीता देवी का कार्यकाल रहा, लेकिन किसी भी कार्यकाल में इस समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई। करोड़ों की राशि खर्च, पर नतीजा शून्य शहरवासियों का कहना है कि सफाई और कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। कई बार दावे किए गए कि प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन किया जाएगा और जैविक खाद तैयार की जाएगी। हाल ही में एक सीमेंट कंपनी द्वारा प्लांट लगाने की बात भी सामने आई थी, लेकिन कोई भी दावा पूरा नहीं हुआ। बिहारशरीफ नगर निगम बनने के 18 साल बाद भी कचरा प्रबंधन की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कचरा प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना का सपना अभी तक साकार नहीं हो पाया है। कचरा जहां-तहां डंप किया जा रहा है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जमीन की समस्या बनी सबसे बड़ी बाधा नगर निगम कचरा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 10 एकड़ जमीन की तलाश में जुटा है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। जिला प्रशासन ने भी इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं। नगर निगम के स्वच्छता मैनेजर कुंदन कुमार ने बताया कि शहर के आसपास 10 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है। अब हम लीज पर जमीन लेने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए जल्द ही विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। रोजाना 3-4 टन कचरे का बोझ शहर में प्रतिदिन घरों और नालियों से 3-4 टन कचरा निकलता है। इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित करने की कोई व्यवस्था न होने के कारण यह विभिन्न स्थानों पर अनियंत्रित तरीके से डंप किया जा रहा है। चकरसलपुर के पास बनाया गया डंपिंग यार्ड पूरी तरह भर चुका है और स्थानीय ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। इसी तरह बिहारशरीफ-राजगीर मार्ग के कोसुक गांव के पास पंचाने नदी के निकट भी कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है। नगर निगम पोकलेन मशीन से इस कचरे को समतल कर देता है ताकि दूर से यह दिखाई न दे, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
चार मेयरों के कार्यकाल में भी नहीं बना प्लांट 2002 में बिहारशरीफ को नगर परिषद और 2007 में नगर निगम का दर्जा मिला। इन 18 वर्षों में दिनेश कुमार, सुधीर कुमार, वीणा कुमारी और वर्तमान मेयर अनीता देवी का कार्यकाल रहा, लेकिन किसी भी कार्यकाल में इस समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई। करोड़ों की राशि खर्च, पर नतीजा शून्य शहरवासियों का कहना है कि सफाई और कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। कई बार दावे किए गए कि प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन किया जाएगा और जैविक खाद तैयार की जाएगी। हाल ही में एक सीमेंट कंपनी द्वारा प्लांट लगाने की बात भी सामने आई थी, लेकिन कोई भी दावा पूरा नहीं हुआ।


