संजीत गुप्ता | लातेहार झारखंड का लातेहार जिला आज राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह स्थानीय विकास, रोजगार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनता जा है। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं की नेतरहाट और बेतला जैसे विश्वसनीय प्राकृतिक स्थलों ने लातेहार को पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाई है। नेतरहाट, जिसे छोटानागपुर की रानी भी कहा जाता है। यह अपनी वादियों, सूर्योदय–सूर्यास्त, पाइन वन, जलप्रपातों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। वहीं पलामू टाइगर रिजर्व अंतर्गत बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी, वन्यजीव दर्शन, ऐतिहासिक राजा मेदिनी राय पलामू किला और प्राकृतिक ट्रेल्स के कारण पर्यटकों का बड़ा आकर्षण केंद्र है। इन दोनों स्थलों के साथ लोध जलप्रपात, घाघरी जलप्रपात, कोयल व्यू प्वाइंट, मैग्नोलिया पॉइंट, ताहिर टॉप और जंगल ट्रेल्स, सुगा बांध, मिर्चईया फॉल जैसे अन्य पर्यटन स्थल लातेहार को एक संपूर्ण पर्यटन सर्किट बनाते हैं।पर्यटन के विस्तार से स्थानीय लोगों विशेषकर जनजातीय समुदाय के लोगों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। होटल, होम-स्टे, कॉटेज, टूर गाइड, वाहन संचालन, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। युवाओं की पर्यटन व्यवसाय में बढ़ती भागीदारी से पलायन की समस्या में कमी आई है। अब स्थानीय युवा अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार पा रहे हैं और अपनी परंपराओं, लोककला व संस्कृति को जीवित रखते हुए आत्मनिर्भर बन रहे हैं। पर्यटन ने यहां छोटे व्यापार, परिवहन सेवा, गाइडिंग और खाद्य व्यवसाय को भी बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। ^पर्यटन विशेषज्ञ लातेहार टूरिज्म के गोविंद पाठक बताते हैं कि यदि सड़क, संचार, प्रशि क्षण, ठहराव सुवि धाओं और प्रचार प्रसार पर और ध्यान दिया जाए, तो लातेहार राज्य का प्रमुख ईको-ट रिज्म केंद्र बन सकता है। नेतरहा –बेतला पर्यटन मॉडल यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए विकास संभव है। यही कारण है कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार, आत्मनि र्भरता और सम्म नजनक जीवन का माध्यम बन रहा है।^ -गोव दिपक, पर्यटन विशेषज्ञ


