बीजापुर पुलिस ने मूसालूर जंगल में नवंबर 2025 में मिले अज्ञात शव के मामले को सुलझा लिया है। इस हत्याकांड में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह सफलता तकनीकी जांच और साइबर सेल की मदद से मिली। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 28 नवंबर 2025 को मूसालूर जंगल में एक अज्ञात पुरुष का शव मिला था। थाना नैमेड़ में मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। बाद में मृतक की पहचान नैमेड़ निवासी बदरू उरसा के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सिर और चेहरे पर ठोस वस्तु से गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौत हुई थी, जिसके बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव के निर्देश पर थाना नैमेड़ पुलिस और साइबर सेल ने जांच शुरू की। मृतक के मोबाइल कॉल डिटेल और टावर डंप का विश्लेषण किया गया। तकनीकी जांच में मृतक की पत्नी माहरी मज्जी, सौतेले बेटे शंकर मज्जी और संदेही रमेश मज्जी की लोकेशन घटनास्थल के आसपास पाई गई। इसके बाद शंकर मज्जी और रमेश मज्जी तेलंगाना फरार हो गए थे। निरीक्षक हरिनाथ रावत के नेतृत्व में गठित टीम ने तेलंगाना के जमीकुंटा और चेरूकुरू से रमेश मज्जी और शंकर मज्जी को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान, तीनों आरोपियों ने बदरू उरसा की हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की। दूसरी महिला लाने के नाम पर पत्नी को घर से निकाला पुलिस के अनुसार, बदरू उरसा ने माहरी मज्जी को कई वर्षों तक पत्नी के रूप में रखने के बाद दूसरी महिला लाने के नाम पर घर से निकाल दिया था। इसी बात से आक्रोशित होकर माहरी मज्जी, शंकर मज्जी और रमेश मज्जी ने बदरू की हत्या की योजना बनाई। मौका पाकर मूसालूर जंगल में लकड़ी के डंडे से उसके सिर और चेहरे पर वार कर हत्या कर दी गई और शव को झाड़ियों में फेंक दिया गया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल डंडा भी बरामद कर लिया है। तीनों आरोपियों रमेश मज्जी, शंकर मज्जी और माहरी मज्जी को 23 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय बीजापुर में पेश किया गया।


