कालीमोरी अंडरपास का काम तीन साल बाद फिर शुरू:2 किलोमीटर की दूरी-200 मीटर में होगी पूरी;यू-आकार का बनेगा आरयूबी

कालीमोरी अंडरपास का काम तीन साल बाद फिर शुरू:2 किलोमीटर की दूरी-200 मीटर में होगी पूरी;यू-आकार का बनेगा आरयूबी

अलवर में करीब तीन साल से बंद पड़ा कालीमोरी रेलवे अंडरपास (आरयूबी) का निर्माण कार्य एक बार फिर शुरू हो गया है। शनिवार सुबह पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर मौके पर पहुंचे और नाप-तोल कर अंडरपास की नई जगह निर्धारित की। पहले जहां अंडरपास प्रस्तावित था, उसे अब कालीमोरी फाटक की ओर करीब 50 मीटर सरका दिया गया है।अब ये अंडरपास यू आकार में बनेगा। नए ले-आउट में रेलवे का पिलर नंबर 75/2 बीच में आ रहा था, जिसे करीब 5 फीट साइड में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया गया है। पिलर के सरकने के बाद अंडरपास पिलर नंबर 75/2 और 75/4 के बीच बनाया जाएगा। अंडरपास बनने से करीब 2 किलोमीटर का चक्कर घटकर मात्र 200 मीटर रह जाएगा, जिससे आमजन और कॉलेज छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। कालीमोरी फाटक पर आरयूबी निर्माण के लिए पहले 3 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। कार्य शुरू होने के बाद रेलवे, पीडब्ल्यूडी और बिजली निगम की ओर से 1.47 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि की मांग की गई, जिसे मंजूरी मिलने के बाद अब यह अंडरपास 4.47 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। हालांकि आधिकारिक रूप से कार्य शुरू करने की तिथि 28 फरवरी तय है, लेकिन शनिवार से मौके पर काम शुरू कर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी को जून 2022 में अंडरपास का काम शुरू कर दिसंबर 2022 तक पूरा करना था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही काम बंद हो गया था। जलदाय विभाग की पेयजल लाइन और जयपुर डिस्कॉम की बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने से कार्य अटक गया था। नवंबर 2022 तक पीडब्ल्यूडी अंडरब्रिज के लिए 11 बॉक्स तैयार कर चुका था। इसके बाद फरवरी 2023 में रेलवे से ब्लॉक की अनुमति मांगी गई। पीडब्ल्यूडी ने रेलवे को सर्विस चार्ज के रूप में 18.48 लाख रुपए जमा कराए, लेकिन अक्टूबर 2023 में रेलवे ने 25.80 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग कर दी, जिससे काम आगे नहीं बढ़ सका। बाद में अतिरिक्त राशि स्वीकृत होने के बाद अब निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो पाया है। कालीमोरी रेलवे अंडरपास बनने से रेलवे लाइन के दोनों ओर स्थित अल्कापुरी, बैंक कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, मोती नगर, हीराबास सहित दर्जनों कॉलोनियों के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही जयपुर डिस्कॉम कार्यालय, औद्योगिक इकाइयों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों के लिए भी आवागमन आसान हो जाएगा।

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