Pregnancy Risk: आधे भारत की महिलाएं खतरे में 49.4% गर्भवती हाई रिस्क पर! क्या है इसका समाधान?

Pregnancy Risk: आधे भारत की महिलाएं खतरे में 49.4% गर्भवती हाई रिस्क पर! क्या है इसका समाधान?

Pregnancy Risk: मां बनना हर महिला के लिए उसके जीवन का सबसे बड़ा पड़ाव होता है और सभी इसे अच्छे और स्वस्थ तरीके से जीना चाहते हैं। इसके लिए अपने स्तर पर महिला और उसका परिवार प्रयास भी करते रहते हैं। जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके प्रति उनका ज्ञान भी बढ़ रहा है, लेकिन हाल ही में ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) की एक रिसर्च रिपोर्ट ने तहलका मचा दिया है।

आखिर क्या है इस रिपोर्ट में? ICMR के अनुसार भारत में लगभग 49.4% गर्भवती महिलाएं उच्च जोखिम श्रेणी में आती हैं। आइए जानते हैं कि यह उच्च जोखिम श्रेणी क्या होती है? इसके कारण, लक्षण और बचाव क्या होते हैं?

क्या होती है ‘उच्च जोखिम श्रेणी’ (What is High-Risk Category?)

जब मां, भ्रूण या दोनों के स्वास्थ्य या जीवन को सामान्य से अधिक खतरा होता है, तो यह स्थिति उच्च जोखिम श्रेणी कहलाती है। इस अवस्था में समय से पहले प्रसव (Pre-term birth), अत्यधिक रक्तस्राव या शिशु के विकास का रुक जाना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी महिलाओं को बहुत ज्यादा देखरेख और डॉक्टर की निगरानी में रहने की आवश्यकता रहती है।

उच्च जोखिम श्रेणी के कारण (Causes)

  • प्रसव के बीच कम अंतराल
  • पिछला सीजेरियन प्रसव
  • मधुमेह (Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड की समस्याएं।
  • 18 साल से कम (किशोरावस्था) या 35 साल से अधिक की उम्र में गर्भधारण

उच्च जोखिम श्रेणी के लक्षण क्या होते हैं?(High-risk Pregnancy Symptoms)

  • सिरदर्द या चक्कर आना।
  • हाथों, पैरों और चेहरे पर सूजन आना।
  • योनि से रक्तस्राव।
  • शिशु की हलचल (Fetal Movement) कम होना।
  • तेज बुखार या पेट दर्द।

उच्च जोखिम श्रेणी से बचाव कैसे करें?(High-risk Pregnancy Prevention)

  • दो बच्चों के बीच कम से कम 2 से 3 साल का अंतर
  • नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC)
  • आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की भरपूर मात्रा
  • अस्पताल में ही प्रसव (Institutional Delivery) का विकल्प चुनें

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *