पूर्णिया में 1.5 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त:बंगाल से लाई जा रही थी खेप, JCB से गड्ढा खोदकर कराया गया नष्ट

पूर्णिया में 1.5 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त:बंगाल से लाई जा रही थी खेप, JCB से गड्ढा खोदकर कराया गया नष्ट

पूर्णिया में सरकार के प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की तस्करी जारी है। बायसी पुलिस और मत्स्य विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.5 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त की है। मौके से वाहन चालक को हिरासत में लिया गया है। जिसकी पहचान पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के राणाघाट निवासी सुरंजोन विश्वास के तौर पर हुई है। जब्त खेप को जेसीबी से गड्ढा खोदकर नष्ट कर दिया है। जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी ऋतु राज ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने वैन को रोका। पूछताछ के दौरान चालक ने स्वीकार किया कि वाहन में 1.5 टन थाई मांगुर मछली लोड है, जिसे दूसरे स्थान पर सप्लाई किया जाना था। जब्त की गई मछली को डंगराहा स्थित महानंदा नदी के किनारे ले जाया गया, जहां मत्स्य विभाग के अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर पूरी नष्ट कर दिया गया, ताकि इसे दोबारा बाजार में न बेचा जा सके। रोक के बाद तस्कर बाज नहीं आ रहे बायसी थानाध्यक्ष शिव कुमार पासवान ने बताया कि वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है। मत्स्य विभाग की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। थाना क्षेत्र में अब तक 5 बार प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त की जा चुकी है, इसके बावजूद तस्कर चोरी-छिपे सप्लाई करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने साल 2000 में ही थाई मांगुर मछली के पालन, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। यह मछली स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। थाई मांगुर मछली सड़ा हुआ मांस तक खा लेती है, जिससे इसके शरीर में आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, मरकरी और लेड जैसे घातक हेवी मेटल्स जमा हो जाते हैं। यही कारण है कि मछली बहुत तेजी से बढ़ती है। मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ स्थानीय मछली प्रजातियों और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित मछली की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पूर्णिया में सरकार के प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की तस्करी जारी है। बायसी पुलिस और मत्स्य विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.5 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त की है। मौके से वाहन चालक को हिरासत में लिया गया है। जिसकी पहचान पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के राणाघाट निवासी सुरंजोन विश्वास के तौर पर हुई है। जब्त खेप को जेसीबी से गड्ढा खोदकर नष्ट कर दिया है। जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी ऋतु राज ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने वैन को रोका। पूछताछ के दौरान चालक ने स्वीकार किया कि वाहन में 1.5 टन थाई मांगुर मछली लोड है, जिसे दूसरे स्थान पर सप्लाई किया जाना था। जब्त की गई मछली को डंगराहा स्थित महानंदा नदी के किनारे ले जाया गया, जहां मत्स्य विभाग के अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर पूरी नष्ट कर दिया गया, ताकि इसे दोबारा बाजार में न बेचा जा सके। रोक के बाद तस्कर बाज नहीं आ रहे बायसी थानाध्यक्ष शिव कुमार पासवान ने बताया कि वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है। मत्स्य विभाग की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। थाना क्षेत्र में अब तक 5 बार प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली जब्त की जा चुकी है, इसके बावजूद तस्कर चोरी-छिपे सप्लाई करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने साल 2000 में ही थाई मांगुर मछली के पालन, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। यह मछली स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। थाई मांगुर मछली सड़ा हुआ मांस तक खा लेती है, जिससे इसके शरीर में आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, मरकरी और लेड जैसे घातक हेवी मेटल्स जमा हो जाते हैं। यही कारण है कि मछली बहुत तेजी से बढ़ती है। मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ स्थानीय मछली प्रजातियों और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित मछली की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।  

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