खनिज, युवा और विरासत से झारखंड की वैश्विक पहचान: सीएम:झारखंड में संभावनाओं पर कई देशों के प्रतिनिधियों से संवाद

खनिज, युवा और विरासत से झारखंड की वैश्विक पहचान: सीएम:झारखंड में संभावनाओं पर कई देशों के प्रतिनिधियों से संवाद

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लंदन दौरे के दौरान झारखंड की आर्थिक ताकत, औद्योगिक संभावनाओं, प्राकृतिक संसाधनों और युवा शक्ति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा। भारत के उच्चायोग में स्वागत समारोह में उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा, कुशल मानव संसाधन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जरिए देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। इस समारोह का आयोजन भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने किया था। चर्चा का मुख्य केंद्र भारत के समग्र विकास में झारखंड के योगदान को रेखांकित करना रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के पास बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं। राज्य की युवा आबादी आने वाले वर्षों में विकास की बड़ी ताकत बनेगी। संवाद के दौरान यूनाइटेड किंगडम के साथ विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी के अवसरों पर विशेष चर्चा हुई। उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल तथा महत्वपूर्ण खनिजों और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से झारखंड के युवाओं को वैश्विक अवसर मिलेंगे। सीएम को स्टोनहेंज और एवेबरी भ्रमण का निमंत्रण सीएम के नेतृत्व में झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने हिस्टोरिक इंग्लैंड के साथ बैठक की। यह संस्था यूके की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालती है। बैठक में मेगालिथ, मोनोलिथ, प्रागैतिहासिक परिदृश्य और जीवाश्म पार्कों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रलेखन और समुदाय-आधारित विरासत प्रबंधन पर चर्चा हुई। इस दौरान हिस्टोरिक इंग्लैंड ने मुख्यमंत्री को शनिवार को एवेबरी और स्टोनहेंज जैसे विश्व-प्रसिद्ध स्थलों के भ्रमण का विशेष आमंत्रण दिया। झारखंड की ‘जीवित विरासत’ को पहचान देने की कोशिश बैठक यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम 2025 के तहत आयोजित हुई। सीएम ने कहा कि झारखंड उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो इस ढांचे के जरिए अपनी प्राचीन और आदिवासी विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने बताया कि झारखंड उन गिने-चुने क्षेत्रों में है, जहाँ मेगालिथिक परंपराएँ आज भी जीवित सांस्कृतिक प्रथाओं के रूप में मौजूद हैं। बैठक में हजारीबाग का पकरी बरवाडीह मेगालिथिक परिसर, साहिबगंज का मंदर जीवाश्म उद्यान और राज्य के विभिन्न जिलों में फैले मोनोलिथ, शैलचित्र व पाषाण स्मारक विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर ‘सेंटिनल्स ऑफ टाइम’ नामक कॉफी टेबल बुक भी भेंट की गई, जिसमें झारखंड की प्रागैतिहासिक विरासत को शोध और चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार, कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार व गृह सचिव वंदना डाडेल मौजूद थे। लंदन में झारखंड के 25 वर्ष का जश्न: झारखंडी परंपरा-संस्कृति की झलक दिखी झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लंदन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मारंग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना के तहत यूके में पढ़ रहे छात्र, चेवनींग मरांग गोमके स्कॉलर्स, यूके में कार्यरत युवा, फैकल्टी सदस्य, शोधकर्ता, उद्यमी और झारखंड से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के करीब 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मरांग गोमके स्कॉलर्स और यूके में रह रहे झारखंडवासियों ने राज्य की परंपरा व संस्कृति की झांकी प्रस्तुत की। इस मौके पर हेमंत सोरेन ने कहा कि यह कार्यक्रम 25 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए अनंत संभावनाओं की ओर अग्रसर झारखंड की कहानी कहता है, जहाँ विकास प्रकृति के साथ संतुलन में निहित है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लंदन दौरे के दौरान झारखंड की आर्थिक ताकत, औद्योगिक संभावनाओं, प्राकृतिक संसाधनों और युवा शक्ति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा। भारत के उच्चायोग में स्वागत समारोह में उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा, कुशल मानव संसाधन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जरिए देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। इस समारोह का आयोजन भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने किया था। चर्चा का मुख्य केंद्र भारत के समग्र विकास में झारखंड के योगदान को रेखांकित करना रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के पास बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं। राज्य की युवा आबादी आने वाले वर्षों में विकास की बड़ी ताकत बनेगी। संवाद के दौरान यूनाइटेड किंगडम के साथ विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी के अवसरों पर विशेष चर्चा हुई। उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल तथा महत्वपूर्ण खनिजों और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से झारखंड के युवाओं को वैश्विक अवसर मिलेंगे। सीएम को स्टोनहेंज और एवेबरी भ्रमण का निमंत्रण सीएम के नेतृत्व में झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने हिस्टोरिक इंग्लैंड के साथ बैठक की। यह संस्था यूके की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालती है। बैठक में मेगालिथ, मोनोलिथ, प्रागैतिहासिक परिदृश्य और जीवाश्म पार्कों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रलेखन और समुदाय-आधारित विरासत प्रबंधन पर चर्चा हुई। इस दौरान हिस्टोरिक इंग्लैंड ने मुख्यमंत्री को शनिवार को एवेबरी और स्टोनहेंज जैसे विश्व-प्रसिद्ध स्थलों के भ्रमण का विशेष आमंत्रण दिया। झारखंड की ‘जीवित विरासत’ को पहचान देने की कोशिश बैठक यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम 2025 के तहत आयोजित हुई। सीएम ने कहा कि झारखंड उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो इस ढांचे के जरिए अपनी प्राचीन और आदिवासी विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने बताया कि झारखंड उन गिने-चुने क्षेत्रों में है, जहाँ मेगालिथिक परंपराएँ आज भी जीवित सांस्कृतिक प्रथाओं के रूप में मौजूद हैं। बैठक में हजारीबाग का पकरी बरवाडीह मेगालिथिक परिसर, साहिबगंज का मंदर जीवाश्म उद्यान और राज्य के विभिन्न जिलों में फैले मोनोलिथ, शैलचित्र व पाषाण स्मारक विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर ‘सेंटिनल्स ऑफ टाइम’ नामक कॉफी टेबल बुक भी भेंट की गई, जिसमें झारखंड की प्रागैतिहासिक विरासत को शोध और चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार, कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार व गृह सचिव वंदना डाडेल मौजूद थे। लंदन में झारखंड के 25 वर्ष का जश्न: झारखंडी परंपरा-संस्कृति की झलक दिखी झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लंदन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मारंग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना के तहत यूके में पढ़ रहे छात्र, चेवनींग मरांग गोमके स्कॉलर्स, यूके में कार्यरत युवा, फैकल्टी सदस्य, शोधकर्ता, उद्यमी और झारखंड से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के करीब 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मरांग गोमके स्कॉलर्स और यूके में रह रहे झारखंडवासियों ने राज्य की परंपरा व संस्कृति की झांकी प्रस्तुत की। इस मौके पर हेमंत सोरेन ने कहा कि यह कार्यक्रम 25 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए अनंत संभावनाओं की ओर अग्रसर झारखंड की कहानी कहता है, जहाँ विकास प्रकृति के साथ संतुलन में निहित है।  

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