सड़क-नाली के फंड से 17 सिटी बसें खरीदेगा निगम:3 रूट के लिए होगा ऑपरेटर का चयन, नगर विकास विभाग से मिले नागरिक सुविधा मद के पैसे से सिटी बस

ट्रक-ट्रैक्टर और एसयूवी की होगी खरीददारी
राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नगर निगम 17 नई सिटी बसों की खरीदारी करेगा। 32 सीटर 17 बसों की खरीदारी के लिए निगम ने प्रस्ताव माँगा है। 16 फरवरी को इसका टेंडर खुलेगा। इसके अलावा बसों को चलाने, ऑपरेशन-मेंटनेंस और प्रबंधन के लिए ऑपरेटर चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसका टेंडर 2 फरवरी को खुलेगा। दरअसल, निगम द्वारा वर्ष 2011 में खरीदी गई सिटी बसों के 15 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसके बाद उन बसों को परिचालन से बाहर कर दिया गया है। उन बसों के स्थान पर नई बसें खरीदी जाएँगी। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि नगर विकास विभाग से नागरिक सुविधा मद में मिले फंड से नई बसें खरीदी जाएँगी। इसके बाद शहर के तीन रूट पर सिटी बस की सुविधा मिलेगी। फिलहाल मात्र 22 बसें दो रूट पर चल रही हैं। हालाँकि, नागरिक सुविधा के लिए मिले पैसे से सिर्फ सड़क-नाली का निर्माण कराया जा सकता है, लेकिन पिछले दिनों हुई नगर निगम परामर्शदात्री समिति की बैठक में उसी फंड से सिटी बस सहित 50 ट्रैक्टर, 2 ट्रक, 4 एसयूवी, टो-व्हीकल, एक हाइड्रा व्हीकल, 4 स्काई लिफ्टर व्हीकल सहित अन्य वाहन खरीदे जाएँगे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है नई बसों के आने से धुर्वा रूट के यात्रियों को होगा लाभ नगर निगम की ओर से वर्तमान में चलाई जा रही 22 बसें कचहरी चौक से मेन रोड होते हुए राजेंद्र चौक और कचहरी से तुपुदाना तक चल रही हैं। ऐसे में सर्कुलर रोड से कांटाटोली होते हुए धुर्वा रूट में बस की सुविधा नहीं मिल रही है, जबकि इस रूट में सबसे अधिक स्टूडेंट्स का मूवमेंट होता है। नई बस आने के बाद धुर्वा रूट में भी बसें चलेंगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सड़कें खस्ताहाल हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों की बदहाली से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद उनकी मरम्मत कराने का निर्देश दिया था। नगर निगम की ओर से शपथपत्र दाखिल कर बताया गया था कि विभाग से पैसे की माँग की गई है, लेकिन जब विभाग ने पैसे दिए तो उससे वाहनों की खरीदारी हो रही है। दूसरी ओर शहर की 25 से अधिक सड़कों की स्थिति काफी खराब है। ऑटो-टोटो की संख्या 15 हजार, जाम-प्रदूषण भी बढ़ा रांची में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से ऑटो-टोटो की संख्या बढ़ गई है। शहर में 15 हजार से अधिक ऑटो-टोटो चल रहे हैं। इसका असर लोगों की पॉकेट पर भी पड़ रहा है। 15 किमी की दूरी बस से तय करने में जहाँ 20 रुपए खर्च होते हैं, वहीं ऑटो से सफर करने में 40 रुपए लग रहे हैं। शहर में जाम और प्रदूषण आम बात हो गई है। 244 सिटी बसों का मामला नगर विकास में फंसा शहर में 244 सिटी बसें चलाने की योजना है। नगर निगम ने सिटी बस के ऑपरेशन और मेंटनेंस के लिए टेंडर फाइनल करके छह माह पहले ही नगर विकास विभाग को भेजा है। विभाग ने अभी तक इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। इसमें प्रस्ताव है कि बस की आपूर्ति करने वाली एजेंसी को नगर निगम प्रति किलोमीटर की दर से पैसे का भुगतान करेगा। पुरानी बसों की जगह नई बसें खरीदी जाएँगी ^पुरानी बसों की मियाद 15 साल पूरे होने की वजह से समाप्त हो गई है। उसकी जगह 17 नई बसें खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया है। बसों की खरीद नागरिक सुविधा मद से करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन अन्य मद से भी फंड माँगा गया है। जल्द ही बसें खरीदने का प्रयास है। – संजय कुमार, अपर प्रशासक, निगम भास्कर एक्सपर्ट- संजीव विजयवर्गीय, पूर्व डिप्टी मेयर नगर निकाय चुनाव से पहले जनता के पैसे को डायवर्ट किया जा रहा नागरिक सुविधा मद से मिले फंड से सड़क और नाली का निर्माण किया जा सकता है। इसके बावजूद उक्त फंड से बसें सहित अन्य वाहनों की खरीदारी करना उचित नहीं है। एक ओर शहर की अधिकतर सड़कों की स्थिति बदहाल है, दूसरी ओर वाहनों की खरीदारी पर पैसा खर्च हो रहा है। नगर निकाय चुनाव से पहले अफसरों को जल्दबाजी है, क्योंकि उन्हें मालूम है, चुनाव के बाद मनमाने तरीके से खर्च करने की छूट नहीं मिलेगी। ट्रक-ट्रैक्टर और एसयूवी की होगी खरीददारी
राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नगर निगम 17 नई सिटी बसों की खरीदारी करेगा। 32 सीटर 17 बसों की खरीदारी के लिए निगम ने प्रस्ताव माँगा है। 16 फरवरी को इसका टेंडर खुलेगा। इसके अलावा बसों को चलाने, ऑपरेशन-मेंटनेंस और प्रबंधन के लिए ऑपरेटर चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसका टेंडर 2 फरवरी को खुलेगा। दरअसल, निगम द्वारा वर्ष 2011 में खरीदी गई सिटी बसों के 15 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसके बाद उन बसों को परिचालन से बाहर कर दिया गया है। उन बसों के स्थान पर नई बसें खरीदी जाएँगी। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि नगर विकास विभाग से नागरिक सुविधा मद में मिले फंड से नई बसें खरीदी जाएँगी। इसके बाद शहर के तीन रूट पर सिटी बस की सुविधा मिलेगी। फिलहाल मात्र 22 बसें दो रूट पर चल रही हैं। हालाँकि, नागरिक सुविधा के लिए मिले पैसे से सिर्फ सड़क-नाली का निर्माण कराया जा सकता है, लेकिन पिछले दिनों हुई नगर निगम परामर्शदात्री समिति की बैठक में उसी फंड से सिटी बस सहित 50 ट्रैक्टर, 2 ट्रक, 4 एसयूवी, टो-व्हीकल, एक हाइड्रा व्हीकल, 4 स्काई लिफ्टर व्हीकल सहित अन्य वाहन खरीदे जाएँगे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है नई बसों के आने से धुर्वा रूट के यात्रियों को होगा लाभ नगर निगम की ओर से वर्तमान में चलाई जा रही 22 बसें कचहरी चौक से मेन रोड होते हुए राजेंद्र चौक और कचहरी से तुपुदाना तक चल रही हैं। ऐसे में सर्कुलर रोड से कांटाटोली होते हुए धुर्वा रूट में बस की सुविधा नहीं मिल रही है, जबकि इस रूट में सबसे अधिक स्टूडेंट्स का मूवमेंट होता है। नई बस आने के बाद धुर्वा रूट में भी बसें चलेंगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सड़कें खस्ताहाल हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों की बदहाली से जुड़ी याचिका की सुनवाई के बाद उनकी मरम्मत कराने का निर्देश दिया था। नगर निगम की ओर से शपथपत्र दाखिल कर बताया गया था कि विभाग से पैसे की माँग की गई है, लेकिन जब विभाग ने पैसे दिए तो उससे वाहनों की खरीदारी हो रही है। दूसरी ओर शहर की 25 से अधिक सड़कों की स्थिति काफी खराब है। ऑटो-टोटो की संख्या 15 हजार, जाम-प्रदूषण भी बढ़ा रांची में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से ऑटो-टोटो की संख्या बढ़ गई है। शहर में 15 हजार से अधिक ऑटो-टोटो चल रहे हैं। इसका असर लोगों की पॉकेट पर भी पड़ रहा है। 15 किमी की दूरी बस से तय करने में जहाँ 20 रुपए खर्च होते हैं, वहीं ऑटो से सफर करने में 40 रुपए लग रहे हैं। शहर में जाम और प्रदूषण आम बात हो गई है। 244 सिटी बसों का मामला नगर विकास में फंसा शहर में 244 सिटी बसें चलाने की योजना है। नगर निगम ने सिटी बस के ऑपरेशन और मेंटनेंस के लिए टेंडर फाइनल करके छह माह पहले ही नगर विकास विभाग को भेजा है। विभाग ने अभी तक इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। इसमें प्रस्ताव है कि बस की आपूर्ति करने वाली एजेंसी को नगर निगम प्रति किलोमीटर की दर से पैसे का भुगतान करेगा। पुरानी बसों की जगह नई बसें खरीदी जाएँगी ^पुरानी बसों की मियाद 15 साल पूरे होने की वजह से समाप्त हो गई है। उसकी जगह 17 नई बसें खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया है। बसों की खरीद नागरिक सुविधा मद से करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन अन्य मद से भी फंड माँगा गया है। जल्द ही बसें खरीदने का प्रयास है। – संजय कुमार, अपर प्रशासक, निगम भास्कर एक्सपर्ट- संजीव विजयवर्गीय, पूर्व डिप्टी मेयर नगर निकाय चुनाव से पहले जनता के पैसे को डायवर्ट किया जा रहा नागरिक सुविधा मद से मिले फंड से सड़क और नाली का निर्माण किया जा सकता है। इसके बावजूद उक्त फंड से बसें सहित अन्य वाहनों की खरीदारी करना उचित नहीं है। एक ओर शहर की अधिकतर सड़कों की स्थिति बदहाल है, दूसरी ओर वाहनों की खरीदारी पर पैसा खर्च हो रहा है। नगर निकाय चुनाव से पहले अफसरों को जल्दबाजी है, क्योंकि उन्हें मालूम है, चुनाव के बाद मनमाने तरीके से खर्च करने की छूट नहीं मिलेगी।  

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