NEET छात्रा से रेप-मौत,एम्स को डॉक्यूमेंट नहीं दे पाई SIT:डॉक्टर बोले-अधूरे कागज से जांच पूरी नहीं हो सकती, 5 डिपार्टमेंट के डॉक्टर्स बना रहे रिपोर्ट

NEET छात्रा से रेप-मौत,एम्स को डॉक्यूमेंट नहीं दे पाई SIT:डॉक्टर बोले-अधूरे कागज से जांच पूरी नहीं हो सकती, 5 डिपार्टमेंट के डॉक्टर्स बना रहे रिपोर्ट

NEET छात्रा से रेप-मौत के मामले में SIT अभी तक एम्स के मेडिकल बोर्ड को कंपलीट डॉक्यूमेंट नहीं दे पाई है। हालांकि इस बीच SIT ने DGP को बेसिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें अब तक की पूछताछ का जिक्र किया गया है। SIT ने अब तक करीब 15 से 17 लोगों से पूछताछ की है। जिसमें हॉस्पिटल्स, हॉस्टल और लड़की के मां-बाप, मामा और भाई शामिल हैं। SIT का ज्यादातर जोर जहानाबाद और लड़की के परिजनों की ओर दिखा रहा है। इस बीच दैनिक भास्कर ने AIIMS पहुंचकर ये जानने की कोशिश की है कि आखिर PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर AIIMS की जांच या रिव्यू कहां तक पहुंचा। जिस पर अब पूरे मामले की जांच केंद्रित कर दी गई है। PMCH की रिपोर्ट में नीट छात्रा से सेक्सुअल असॉल्ट की बात कही गई थी। अब देखना है, AIIMS की रिपोर्ट क्या और कब तक आता है। यह रिव्यू AIIMS फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर विनय कुमार की टीम कर रही है। AIIMS के डॉक्टर बोले- अभी पूरे दस्तावेज नहीं मिले सवाल 1: क्या PMCH के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का रिव्यू हो चुका है?
जवाब: अभी नहीं, हम कोई भी प्री-मेच्योर जवाब नहीं दे सकते, अभी कुछ डॉक्यूमेंट मिलने बाकी हैं? सवाल 1: क्या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट रिव्यू के लिए पर्याप्त डॉक्यूमेंट नहीं मिले?
जवाब : अभी तक जो डॉक्यूमेंट मिले हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूरे इलाज का रिकॉर्ड जरूरी है। जब तक सभी दस्तावेज नहीं मिल जाते, किसी निष्कर्ष पर पहुंचना वैज्ञानिक और नैतिक रूप से गलत होगा। सवाल 2: क्या अभी तक SIT ने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए हैं?
जवाब : नहीं, अभी सारे डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कुछ महत्वपूर्ण मेडिकल और फोरेंसिक दस्तावेज अभी भी प्रतीक्षित हैं। हम SIT से लगातार मांग कर रहे हैं। बिना पूरे डॉक्यूमेंट देखे जांच अधूरी रहती है और किसी भी तरह की राय देना जल्दबाजी होगी। SIT अपना काम कर रही है, जैसे-जैसे डॉक्यूमेंट मिल जाएगा, जांच पूरी करेंगे। सवाल 3: जो डॉक्यूमेंट मिले हैं, उनके आधार पर क्या कुछ स्पष्ट हुआ?
जवाब : अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहना संभव नहीं है। जो दस्तावेज मिले हैं, वे केवल आंशिक जानकारी देते हैं। पूरे मेडिकल चेन को समझने के लिए सभी रिकॉर्ड जरूरी हैं। जांच में जल्दबाजी से गलत निष्कर्ष निकल सकता है, इसलिए हम अभी कुछ कह नहीं सकते। सवाल 4: पोस्टमॉर्टम वीडियो कितनी अहम भूमिका निभाता है?
जवाब : पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे चोटों, समय और प्रकृति को समझने में मदद मिलती है। बिना वीडियो देखे रिपोर्ट का सही मूल्यांकन संभव नहीं है। इसलिए वीडियो, सभी रिपोर्ट का मिलना जांच के लिए अनिवार्य होता है। सवाल 5: क्या SIT से डॉक्यूमेंट मिलने में देरी जांच को प्रभावित कर रही है?
जवाब: ऐसा नहीं कह सकते, SIT अपना काम कर रही है, मेडिकल जांच समय और दस्तावेजों पर आधारित होती है। अगर रिकॉर्ड देर से मिलता है, तो रिव्यू में थोड़ा बाधा आती है। सवाल 6: AIIMS की टीम में कितने विशेषज्ञ शामिल हैं?
जवाब : फिलहाल पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम काम कर रही है। इसमें फोरेंसिक, गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों को भी जोड़ा जाएगा ताकि जांच बहु-विषयक और निष्पक्ष रहे। सवाल 7: क्या अभी किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ा जा सकता है?
जवाब : नहीं, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। जब तक सभी दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती। जांच का उद्देश्य सत्य तक पहुंचना है, न कि जल्दबाजी में राय देना। सवाल 8: अगर SIT समय पर डॉक्यूमेंट नहीं दे पाती, तो क्या होगा? SIT की परिवार वालों से 5 बार की पूछताछ नीट छात्रा के माता-पिता का आरोप है कि SIT हम पर ही दबाव बना रही है। पता नहीं क्या साबित करना चाहती है, पांच बार हमारे ही घर पूछताछ के लिए आ चुकी है। हर बार एक ही जैसे सवाल पूछती रहती है। पिता से हमने जाना कि आपसे SIT क्या पूछ रही है, तो उन्होंने सवाल और जवाब दोनों बताए। सवाल 1: बेटी की मौत से पहले घर का माहौल कैसा था?
जवाब : घर का माहौल बिल्कुल सामान्य था। हमने कभी बेटी पर दबाव नहीं डाला। वह खुद पढ़ाई करना चाहती थी। डॉक्टर बनने का सपना उसका अपना था। घर में कोई विवाद या तनाव नहीं था, जिसे उसकी मौत से जोड़ा जा सके। सवाल 2: क्या बेटी हाल के दिनों में परेशान थी?
जवाब : नहीं, उसने कभी परेशानी या डर की बात नहीं कही। फोन पर भी वह सामान्य बातें करती थी। अगर उसे कोई खतरा महसूस होता, तो वह जरूर हमें बताती। उसकी बातचीत से कभी नहीं लगा कि वह तनाव में है। सवाल 3: मामा और ममेरे भाई से उसका रिश्ता कैसा था?
जवाब : रिश्ता बिल्कुल सामान्य था, भाई-बहन जैसा। परिवार में रहते हैं, तो बातचीत होती है। इसमें शक की कोई बात नहीं है। पुलिस बेवजह इस रिश्ते को गलत एंगल से देख रही है, जिससे हमें मानसिक पीड़ा हो रही है। सवाल 4: क्या बेटी ने किसी के खिलाफ शिकायत की थी?
जवाब : नहीं, उसने किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। अगर उसने ऐसा कुछ बताया होता, तो हम तुरंत कार्रवाई करते। उसने कभी हॉस्टल या किसी व्यक्ति को लेकर डर या शिकायत नहीं जताई। सवाल: आपकी बेटी किसी से फोन पर कितनी देर बात करती थी?
जवाब: मेरी बेटी अपने मामा, भाई या फिर मां से बात करती थी। मैंने किसी लड़के से उसे फोन पर ज्यादा बातचीत करते नहीं देखा। सवाल : पुलिस की जांच से आप संतुष्ट क्यों नहीं हैं?
जवाब : पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि पुलिस असली आरोपियों की बजाय हमसे ही सवाल कर रही है। मेरी बेटी मरी और हम ही शक के घेरे में हैं। यह बहुत दर्दनाक है। जांच की दिशा गलत लग रही है। अब पढ़िए SIT ने मामा से क्या सवाल जवाब किए सवाल : आखिरी बार छात्रा से कब बात हुई?
जवाब : घटना से कुछ दिन पहले सामान्य बातचीत हुई थी। पढ़ाई और घर की बातें हुई थीं। कोई असामान्य बात नहीं हुई। सवाल: क्या छात्रा तनाव में थी?
जवाब : नहीं, उसने कभी तनाव की बात नहीं कही। वह पढ़ाई को लेकर बात करती थी, लेकिन कभी परेशान नहीं रहती थी। सवाल : क्या परिवार में कोई विवाद था?
जवाब : नहीं, परिवार में कोई विवाद नहीं था। सवाल : घटना से पहले आपकी मुलाकात हुई?
जवाब : नहीं, घटना से पहले मेरी उससे मुलाकात नहीं हुई। अभी SIT की जांच क्या खामियां दिख रही हैं.. अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा केस समझिए इस केस की शुरुआत 6 जनवरी से होती है। उसी दिन NEET छात्रा चित्रगुप्‍त नगर के शंभु गर्ल्‍स में बेहोशी की हालत में मिली थी। एक दिन पहले ही वो 5 जनवरी को अपने घर जहानाबाद से पटना आई थी। बेहोशी की हालत में पहले उसे कंकड़बाग के सहज अस्‍पताल ले जाया गया। बाद में प्रभात मेमोरियल अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उसे मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने प्रारंभ‍िक जांच में घटनास्‍थल, एफएसएल, सीसीटीवी कैमरे का फुटेज, संचालक, वार्डन और डॉक्‍टर के बयान के आधार पर यौन हिंसा से इनकार किया था। नींद की दवा खाने के थ्योरी सामने आई पुलिस के मुताबिक यूरि‍न टेस्‍ट में नींद की दवा खाने के सबूत मिले थे। साथ ही NEET छात्रा के मोबाइल के गूगल सर्च हिस्‍ट्री में 24 द‍िसंबर 2025 और 5 जनवरी को सुसाइड और नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था। पोस्टमॉर्टम ने बदली पुलिस की थ्योरी PMCH से जो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, उसने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर दिया। रिपोर्ट में यह कहा गया कि, यौन हिंसा की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर पर जख्‍म, बल प्रयोग, जबरन संबंध बनाए जाने के साक्ष्‍य म‍िले। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद लड़की के पिता ने चित्रगुप्‍त नगर थाने में FIR कराई। SIT ने संभाला जांच का जिम्मा 16 जनवरी को पटना पुलिस की किरकिरी होने के बाद SIT का गठन किया गया। SIT ने शंभू गर्ल्स होस्टल, सहज अस्पताल और प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। टीम लड़की के जहानाबाद गांव में भी गई। वहां भी उसने अपने स्तर से जांच की और सबूत जुटाई। ऐसा माना जा रहा है कि, FSL रिपोर्ट और एम्स की रिव्यू रिपोर्ट आने के बाद पुलिस इस केस का खुलासा कर सकती है। किन एंगल पर जांच हो रही है, वो जानिए थ्योरी 1: पटना पहुंचने से पहले छात्रा की स्थिति क्या थी? पुलिस की पहली थ्योरी इस सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है कि 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना के बीच छात्रा की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा ने दोपहर 1 बजे जहानाबाद से ट्रेन पकड़ी और करीब 3 बजे पटना जंक्शन पर देखी गई। 3:35 बजे वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और पिता को फोन कर बताया कि वह ठीक है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यात्रा के दौरान या उससे पहले किसी तरह की असामान्य घटना हुई थी। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और स्टेशन के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब तक इस थ्योरी में कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं, जो यह साबित करें कि छात्रा पहले से किसी गंभीर तनाव में थी। इसके उलट, परिजनों और परिचितों के बयान बताते हैं कि वह सामान्य अवस्था में पटना पहुंची थी। थ्योरी 2: हॉस्टल पहुंचने के बाद किन लोगों से संपर्क हुआ? पुलिस की दूसरी थ्योरी पटना पहुंचने के बाद छात्रा की मूवमेंट पर केंद्रित है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हॉस्टल पहुंचने के बाद वह बाहर गई या किसी से मिली थी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, छात्रा 3:35 बजे हॉस्टल पहुंची थी और शाम को ही उसे बेहोशी की हालत में मेडिकल दुकान ले जाया गया। यानी चार से पांच घंटे का एक ऐसा गैप, जिसमें सबसे बड़ी घटना घटित हुई। पुलिस यह भी जांच रही है कि मेडिकल दुकान तक छात्रा को कौन लेकर गया और क्यों उसे सीधे अस्पताल नहीं ले जाया गया। थ्योरी 3: क्या अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर हुआ? तीसरी और सबसे अहम थ्योरी यह है कि अगर छात्रा हॉस्टल पहुंचते वक्त पूरी तरह सामान्य थी, तो अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर ही हुआ है। उसमें भी यह जांचा जा रहा है कि घटना उसके कमरे में हुई या हॉस्टल के किसी अन्य रूम में। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की शुरुआती MLC में चोट और खरोंच के निशान दर्ज किए गए थे। प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में 6 जनवरी को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने यह जानकारी अस्पताल प्रबंधन, पुलिस और परिजनों को दी थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हॉस्टल के किस हिस्से में, किस कमरे और किन लोगों की मौजूदगी में यह सब हुआ। तीन दरवाजों वाले हॉस्टल में पीछे के गेट और लिंक रोड कनेक्शन को खास तौर पर जांच के दायरे में लिया गया है। थ्योरी 4: किसी करीबी से कई बार बातचीत हुई सूत्रों के मुताबिक, इस केस में एक चौथी और बहुत ही संवेदनशील थ्योरी भी सामने आ रही है। छात्रा अपने मोबाइल से एक खास नंबर पर बार-बार बात कर रही थी। यह नंबर किसी अनजान व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके करीबी सर्कल से जुड़े शख्स का बताया जा रहा है। यह कॉल पैटर्न 5 जनवरी को छात्रा के पटना पहुंचने से पहले और बाद दोनों समय में एक्टिव दिखा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह सिर्फ सामान्य बातचीत थी या किसी तरह का मानसिक दबाव, या फिर किसी से मुलाकात इसमें जुड़ी हुई है। पुलिस यह भी देख रही है कि जहानाबाद में भी छात्रा कब और किससे मिली थी। NEET छात्रा से रेप-मौत के मामले में SIT अभी तक एम्स के मेडिकल बोर्ड को कंपलीट डॉक्यूमेंट नहीं दे पाई है। हालांकि इस बीच SIT ने DGP को बेसिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें अब तक की पूछताछ का जिक्र किया गया है। SIT ने अब तक करीब 15 से 17 लोगों से पूछताछ की है। जिसमें हॉस्पिटल्स, हॉस्टल और लड़की के मां-बाप, मामा और भाई शामिल हैं। SIT का ज्यादातर जोर जहानाबाद और लड़की के परिजनों की ओर दिखा रहा है। इस बीच दैनिक भास्कर ने AIIMS पहुंचकर ये जानने की कोशिश की है कि आखिर PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर AIIMS की जांच या रिव्यू कहां तक पहुंचा। जिस पर अब पूरे मामले की जांच केंद्रित कर दी गई है। PMCH की रिपोर्ट में नीट छात्रा से सेक्सुअल असॉल्ट की बात कही गई थी। अब देखना है, AIIMS की रिपोर्ट क्या और कब तक आता है। यह रिव्यू AIIMS फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर विनय कुमार की टीम कर रही है। AIIMS के डॉक्टर बोले- अभी पूरे दस्तावेज नहीं मिले सवाल 1: क्या PMCH के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का रिव्यू हो चुका है?
जवाब: अभी नहीं, हम कोई भी प्री-मेच्योर जवाब नहीं दे सकते, अभी कुछ डॉक्यूमेंट मिलने बाकी हैं? सवाल 1: क्या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट रिव्यू के लिए पर्याप्त डॉक्यूमेंट नहीं मिले?
जवाब : अभी तक जो डॉक्यूमेंट मिले हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूरे इलाज का रिकॉर्ड जरूरी है। जब तक सभी दस्तावेज नहीं मिल जाते, किसी निष्कर्ष पर पहुंचना वैज्ञानिक और नैतिक रूप से गलत होगा। सवाल 2: क्या अभी तक SIT ने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए हैं?
जवाब : नहीं, अभी सारे डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कुछ महत्वपूर्ण मेडिकल और फोरेंसिक दस्तावेज अभी भी प्रतीक्षित हैं। हम SIT से लगातार मांग कर रहे हैं। बिना पूरे डॉक्यूमेंट देखे जांच अधूरी रहती है और किसी भी तरह की राय देना जल्दबाजी होगी। SIT अपना काम कर रही है, जैसे-जैसे डॉक्यूमेंट मिल जाएगा, जांच पूरी करेंगे। सवाल 3: जो डॉक्यूमेंट मिले हैं, उनके आधार पर क्या कुछ स्पष्ट हुआ?
जवाब : अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहना संभव नहीं है। जो दस्तावेज मिले हैं, वे केवल आंशिक जानकारी देते हैं। पूरे मेडिकल चेन को समझने के लिए सभी रिकॉर्ड जरूरी हैं। जांच में जल्दबाजी से गलत निष्कर्ष निकल सकता है, इसलिए हम अभी कुछ कह नहीं सकते। सवाल 4: पोस्टमॉर्टम वीडियो कितनी अहम भूमिका निभाता है?
जवाब : पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे चोटों, समय और प्रकृति को समझने में मदद मिलती है। बिना वीडियो देखे रिपोर्ट का सही मूल्यांकन संभव नहीं है। इसलिए वीडियो, सभी रिपोर्ट का मिलना जांच के लिए अनिवार्य होता है। सवाल 5: क्या SIT से डॉक्यूमेंट मिलने में देरी जांच को प्रभावित कर रही है?
जवाब: ऐसा नहीं कह सकते, SIT अपना काम कर रही है, मेडिकल जांच समय और दस्तावेजों पर आधारित होती है। अगर रिकॉर्ड देर से मिलता है, तो रिव्यू में थोड़ा बाधा आती है। सवाल 6: AIIMS की टीम में कितने विशेषज्ञ शामिल हैं?
जवाब : फिलहाल पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम काम कर रही है। इसमें फोरेंसिक, गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों को भी जोड़ा जाएगा ताकि जांच बहु-विषयक और निष्पक्ष रहे। सवाल 7: क्या अभी किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ा जा सकता है?
जवाब : नहीं, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। जब तक सभी दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती। जांच का उद्देश्य सत्य तक पहुंचना है, न कि जल्दबाजी में राय देना। सवाल 8: अगर SIT समय पर डॉक्यूमेंट नहीं दे पाती, तो क्या होगा? SIT की परिवार वालों से 5 बार की पूछताछ नीट छात्रा के माता-पिता का आरोप है कि SIT हम पर ही दबाव बना रही है। पता नहीं क्या साबित करना चाहती है, पांच बार हमारे ही घर पूछताछ के लिए आ चुकी है। हर बार एक ही जैसे सवाल पूछती रहती है। पिता से हमने जाना कि आपसे SIT क्या पूछ रही है, तो उन्होंने सवाल और जवाब दोनों बताए। सवाल 1: बेटी की मौत से पहले घर का माहौल कैसा था?
जवाब : घर का माहौल बिल्कुल सामान्य था। हमने कभी बेटी पर दबाव नहीं डाला। वह खुद पढ़ाई करना चाहती थी। डॉक्टर बनने का सपना उसका अपना था। घर में कोई विवाद या तनाव नहीं था, जिसे उसकी मौत से जोड़ा जा सके। सवाल 2: क्या बेटी हाल के दिनों में परेशान थी?
जवाब : नहीं, उसने कभी परेशानी या डर की बात नहीं कही। फोन पर भी वह सामान्य बातें करती थी। अगर उसे कोई खतरा महसूस होता, तो वह जरूर हमें बताती। उसकी बातचीत से कभी नहीं लगा कि वह तनाव में है। सवाल 3: मामा और ममेरे भाई से उसका रिश्ता कैसा था?
जवाब : रिश्ता बिल्कुल सामान्य था, भाई-बहन जैसा। परिवार में रहते हैं, तो बातचीत होती है। इसमें शक की कोई बात नहीं है। पुलिस बेवजह इस रिश्ते को गलत एंगल से देख रही है, जिससे हमें मानसिक पीड़ा हो रही है। सवाल 4: क्या बेटी ने किसी के खिलाफ शिकायत की थी?
जवाब : नहीं, उसने किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। अगर उसने ऐसा कुछ बताया होता, तो हम तुरंत कार्रवाई करते। उसने कभी हॉस्टल या किसी व्यक्ति को लेकर डर या शिकायत नहीं जताई। सवाल: आपकी बेटी किसी से फोन पर कितनी देर बात करती थी?
जवाब: मेरी बेटी अपने मामा, भाई या फिर मां से बात करती थी। मैंने किसी लड़के से उसे फोन पर ज्यादा बातचीत करते नहीं देखा। सवाल : पुलिस की जांच से आप संतुष्ट क्यों नहीं हैं?
जवाब : पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि पुलिस असली आरोपियों की बजाय हमसे ही सवाल कर रही है। मेरी बेटी मरी और हम ही शक के घेरे में हैं। यह बहुत दर्दनाक है। जांच की दिशा गलत लग रही है। अब पढ़िए SIT ने मामा से क्या सवाल जवाब किए सवाल : आखिरी बार छात्रा से कब बात हुई?
जवाब : घटना से कुछ दिन पहले सामान्य बातचीत हुई थी। पढ़ाई और घर की बातें हुई थीं। कोई असामान्य बात नहीं हुई। सवाल: क्या छात्रा तनाव में थी?
जवाब : नहीं, उसने कभी तनाव की बात नहीं कही। वह पढ़ाई को लेकर बात करती थी, लेकिन कभी परेशान नहीं रहती थी। सवाल : क्या परिवार में कोई विवाद था?
जवाब : नहीं, परिवार में कोई विवाद नहीं था। सवाल : घटना से पहले आपकी मुलाकात हुई?
जवाब : नहीं, घटना से पहले मेरी उससे मुलाकात नहीं हुई। अभी SIT की जांच क्या खामियां दिख रही हैं.. अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा केस समझिए इस केस की शुरुआत 6 जनवरी से होती है। उसी दिन NEET छात्रा चित्रगुप्‍त नगर के शंभु गर्ल्‍स में बेहोशी की हालत में मिली थी। एक दिन पहले ही वो 5 जनवरी को अपने घर जहानाबाद से पटना आई थी। बेहोशी की हालत में पहले उसे कंकड़बाग के सहज अस्‍पताल ले जाया गया। बाद में प्रभात मेमोरियल अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उसे मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने प्रारंभ‍िक जांच में घटनास्‍थल, एफएसएल, सीसीटीवी कैमरे का फुटेज, संचालक, वार्डन और डॉक्‍टर के बयान के आधार पर यौन हिंसा से इनकार किया था। नींद की दवा खाने के थ्योरी सामने आई पुलिस के मुताबिक यूरि‍न टेस्‍ट में नींद की दवा खाने के सबूत मिले थे। साथ ही NEET छात्रा के मोबाइल के गूगल सर्च हिस्‍ट्री में 24 द‍िसंबर 2025 और 5 जनवरी को सुसाइड और नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था। पोस्टमॉर्टम ने बदली पुलिस की थ्योरी PMCH से जो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, उसने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर दिया। रिपोर्ट में यह कहा गया कि, यौन हिंसा की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर पर जख्‍म, बल प्रयोग, जबरन संबंध बनाए जाने के साक्ष्‍य म‍िले। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद लड़की के पिता ने चित्रगुप्‍त नगर थाने में FIR कराई। SIT ने संभाला जांच का जिम्मा 16 जनवरी को पटना पुलिस की किरकिरी होने के बाद SIT का गठन किया गया। SIT ने शंभू गर्ल्स होस्टल, सहज अस्पताल और प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। टीम लड़की के जहानाबाद गांव में भी गई। वहां भी उसने अपने स्तर से जांच की और सबूत जुटाई। ऐसा माना जा रहा है कि, FSL रिपोर्ट और एम्स की रिव्यू रिपोर्ट आने के बाद पुलिस इस केस का खुलासा कर सकती है। किन एंगल पर जांच हो रही है, वो जानिए थ्योरी 1: पटना पहुंचने से पहले छात्रा की स्थिति क्या थी? पुलिस की पहली थ्योरी इस सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है कि 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना के बीच छात्रा की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा ने दोपहर 1 बजे जहानाबाद से ट्रेन पकड़ी और करीब 3 बजे पटना जंक्शन पर देखी गई। 3:35 बजे वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और पिता को फोन कर बताया कि वह ठीक है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यात्रा के दौरान या उससे पहले किसी तरह की असामान्य घटना हुई थी। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और स्टेशन के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब तक इस थ्योरी में कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं, जो यह साबित करें कि छात्रा पहले से किसी गंभीर तनाव में थी। इसके उलट, परिजनों और परिचितों के बयान बताते हैं कि वह सामान्य अवस्था में पटना पहुंची थी। थ्योरी 2: हॉस्टल पहुंचने के बाद किन लोगों से संपर्क हुआ? पुलिस की दूसरी थ्योरी पटना पहुंचने के बाद छात्रा की मूवमेंट पर केंद्रित है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हॉस्टल पहुंचने के बाद वह बाहर गई या किसी से मिली थी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, छात्रा 3:35 बजे हॉस्टल पहुंची थी और शाम को ही उसे बेहोशी की हालत में मेडिकल दुकान ले जाया गया। यानी चार से पांच घंटे का एक ऐसा गैप, जिसमें सबसे बड़ी घटना घटित हुई। पुलिस यह भी जांच रही है कि मेडिकल दुकान तक छात्रा को कौन लेकर गया और क्यों उसे सीधे अस्पताल नहीं ले जाया गया। थ्योरी 3: क्या अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर हुआ? तीसरी और सबसे अहम थ्योरी यह है कि अगर छात्रा हॉस्टल पहुंचते वक्त पूरी तरह सामान्य थी, तो अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर ही हुआ है। उसमें भी यह जांचा जा रहा है कि घटना उसके कमरे में हुई या हॉस्टल के किसी अन्य रूम में। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की शुरुआती MLC में चोट और खरोंच के निशान दर्ज किए गए थे। प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में 6 जनवरी को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने यह जानकारी अस्पताल प्रबंधन, पुलिस और परिजनों को दी थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हॉस्टल के किस हिस्से में, किस कमरे और किन लोगों की मौजूदगी में यह सब हुआ। तीन दरवाजों वाले हॉस्टल में पीछे के गेट और लिंक रोड कनेक्शन को खास तौर पर जांच के दायरे में लिया गया है। थ्योरी 4: किसी करीबी से कई बार बातचीत हुई सूत्रों के मुताबिक, इस केस में एक चौथी और बहुत ही संवेदनशील थ्योरी भी सामने आ रही है। छात्रा अपने मोबाइल से एक खास नंबर पर बार-बार बात कर रही थी। यह नंबर किसी अनजान व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके करीबी सर्कल से जुड़े शख्स का बताया जा रहा है। यह कॉल पैटर्न 5 जनवरी को छात्रा के पटना पहुंचने से पहले और बाद दोनों समय में एक्टिव दिखा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह सिर्फ सामान्य बातचीत थी या किसी तरह का मानसिक दबाव, या फिर किसी से मुलाकात इसमें जुड़ी हुई है। पुलिस यह भी देख रही है कि जहानाबाद में भी छात्रा कब और किससे मिली थी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *