मानेगांव क्षेत्र से एम-सैंड व गिट्टी के अवैध परिवहन और जांच के दौरान वाहन रोकने पर राजस्व व माइनिंग टीम से अभद्रता के मामले में प्रशासन ने संयुक्त जांच कराई। जांच में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण सामने आने के बाद सवा तीन करोड़ रुपए से अधिक की पेनाल्टी प्रस्तावित की गई है। माइनिंग विभाग ने पेनाल्टी का प्रकरण बनाकर शुक्रवार को कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। अब कलेक्टर कोर्ट में अंतिम निर्णय होगा। कुल पेनाल्टी में 1 करोड़ 62 लाख रुपए पर्यावरण क्षतिपूर्ति के शामिल हैं। मामला 9 जनवरी का है, जब मानेगांव क्षेत्र से हाइवा वाहनों में एम-सैंड व गिट्टी का परिवहन किया जा रहा था। जांच में टीपी से अधिक खनिज पाया गया। वाहन बरगी थाने ले जाए जा रहे थे, तभी जबलपुर-नागपुर टोलनाका के पास कुछ लोगों ने वाहनों को रोककर अधिकारियों से अभद्रता की और वाहन चढ़ाने के लिए चालक को उकसाया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद प्रशासन ने संबंधित क्रेशर व आसपास के स्टॉक की जांच की, जिसमें गंभीर अनियमितताएं मिलीं। 10 व 12 जनवरी को घाघरा क्षेत्र में संयुक्त जांच के दौरान पाया गया कि स्वीकृत खसरा नंबर के अलावा अन्य शासकीय व निजी खसरों पर भी खनिज का अवैध भंडारण किया गया था। कुल 9 हजार घनमीटर गिट्टी पर रॉयल्टी की 15 गुना राशि और पर्यावरण क्षतिपूर्ति जोड़कर 3 करोड़ 24 लाख रुपए की पेनाल्टी तय की गई है। पेनाल्टी का गणित
जांच में 9 हजार घनमीटर अवैध गिट्टी पाई गई। इस पर 10.80 लाख रुपए की रॉयल्टी तय की गई। रॉयल्टी की 15 गुना राशि 1.62 करोड़ रुपए और इतनी ही राशि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जोड़कर कुल 3.24 करोड़ रुपए की पेनाल्टी प्रस्तावित की गई है। इस प्रकरण में मूल्यांकन के बाद तीन करोड़ 24 लाख रुपए की पेनाल्टी का प्रस्ताव कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया है। -एके राय, जिला माइनिंग अधिकारी


