बीमा कंपनी ने लीक किया ग्राहक का निजी डेटा:अधिवक्ता ने निजी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दी तहरीर, साइबर फ्रॉड की आशंका

बीमा कंपनी ने लीक किया ग्राहक का निजी डेटा:अधिवक्ता ने निजी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दी तहरीर, साइबर फ्रॉड की आशंका

प्रयागराज में बीमा क्लेम प्रक्रिया के दौरान ग्राहक की व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला सामने आया है। कर्नलगंज निवासी अधिवक्ता पीयूष ओझा ने एक निजी इंश्योरेंस कंपनी और लखनऊ स्थित कार सर्विस सेंटर के खिलाफ थाना कर्नलगंज में लिखित शिकायत देकर अभियोग पंजीकृत किए जाने की मांग की है। इंश्योरेंस क्लेम के दौरान आया संदिग्ध कॉल शिकायत के अनुसार, अधिवक्ता ने अपनी कार को 14 जनवरी को लखनऊ स्थित एक कार सर्विस सेंटर में इंश्योरेंस क्लेम के लिए जमा किया था। वाहन का बीमा एक निजी इंश्योरेंस कंपनी से था। इसी दौरान 16 जनवरी को अपराह्न लगभग 3:51 बजे उनके मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने पहले गलत नाम से पहचान पूछी और फिर यह सवाल किया कि क्या वाहन टैक्सी में चलाया जाता है। चौंकाने वाली बात यह रही कि कॉल करने वाले को वाहन का सटीक नंबर पहले से ज्ञात था। कॉल के बाद गहराया शक अधिवक्ता के अनुसार, बातचीत के तुरंत बाद कॉल काट दी गई। इससे उन्हें यह गंभीर आशंका हुई कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी किसी बीमा कंपनी या कार सर्विस सेंटर द्वारा किसी बाहरी व्यक्ति को उपलब्ध कराई गई है, जिससे साइबर फ्रॉड या अन्य आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया जा सकता है। सोशल मीडिया पर की गई शिकायत घटना के तुरंत बाद अधिवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से संबंधित निजी इंश्योरेंस कंपनी को टैग करते हुए सार्वजनिक शिकायत दर्ज कराई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कॉल कंपनी या उसके किसी अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा कराई गई थी या नहीं। अब क्लेम निरस्त, बताया गया ‘टैक्सी उपयोग’ शिकायत में कहा गया है कि 22 जनवरी को उन्हें यह जानकारी दी गई कि उक्त कॉल को बीमा कंपनी की ओर से कराई गई कॉल बताया जा रहा है और इसी आधार पर यह कहते हुए इंश्योरेंस क्लेम निरस्त कर दिया गया कि वाहन टैक्सी में प्रयुक्त होता है। प्रार्थी का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और षड्यंत्रपूर्ण है। डेटा चोरी और निजता उल्लंघन का आरोप अधिवक्ता ने बताया कि बीमा लेते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, पता और वाहन से संबंधित सभी संवेदनशील दस्तावेज बीमा कंपनी को उपलब्ध कराए गए थे। ऐसे में आशंका है कि यह संवेदनशील जानकारी भी अनधिकृत रूप से साझा की गई हो, जो आईटी एक्ट 2000 और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। उन्होंने यह भी कहा कि IRDAI की गाइडलाइंस में स्पष्ट प्रावधान है कि ग्राहक की जानकारी गोपनीय रखी जानी चाहिए और बिना स्पष्ट सहमति किसी भी प्रकार की टेली-कॉलिंग या थर्ड पार्टी को डेटा देना प्रतिबंधित है। फिलहाल कर्नलगंज पुलिस ने इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस से की गई प्रमुख मांगें शिकायत में थाना प्रभारी से मांग की गई है कि— कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की जाए यह जांच हो कि वह व्यक्ति किसी बीमा कंपनी या अधिकृत एजेंसी से जुड़ा है या नहीं यह पता लगाया जाए कि व्यक्तिगत जानकारी किस स्तर से और किस उद्देश्य से साझा की गई निजी इंश्योरेंस कंपनी और लखनऊ स्थित कार सर्विस सेंटर के जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए मामले को साइबर अपराध मानते हुए विधिक कार्रवाई की जाए

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *