महाराष्ट्र के अमरावती की अचलपुर नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव के बाद राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई, जब भाजपा (BJP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गईं। दावा किया जा रहा था कि सभापति पद के चुनाव में दोनों दलों ने एक-दूसरे का साथ दिया, जिसके चलते AIMIM को शिक्षा और क्रीड़ा समिति का सभापति पद भी मिला। इन खबरों के सामने आते ही भाजपा बैकफुट पर आ गई और पार्टी नेतृत्व ने इस पर स्थानीय इकाई को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा।
क्या है पूरा विवाद?
अचलपुर नगर परिषद की विषय समितियों के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में AIMIM के पार्षद को शिक्षा एवं खेल समिति का सभापति चुना गया। चर्चा थी कि भाजपा, एमआईएम, अजित पवार गुट की एनसीपी और कुछ निर्दलीय पार्षदों ने मिलकर एक गुट बनाया और सत्ता का बंटवारा किया। चूंकि भाजपा और एमआईएम की विचारधाराएं एक-दूसरे के धुर विपरीत हैं, इसलिए इस बेमेल गठबंधन की चर्चा पूरे महाराष्ट्र में होने लगी।
भाजपा ने खबर को बताया गलत
एआईएमआईएम से गठबंधन की खबर फैलते ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तत्काल संज्ञान लिया और अचलपुर की नगराध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अचलपुर की भाजपा नगराध्यक्षा रूपाली अभय माथने ने बिना देरी किए बावनकुले को पत्र लिखकर जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा ने AIMIM के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है।
जवाब में रूपाली माथने ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी एक हिंदुत्ववादी पार्टी है। हमने हिंदू विरोधी पार्टी AIMIM के साथ किसी भी प्रकार का कोई गठबंधन नहीं किया है। अचलपुर नगर परिषद में AIMIM का कोई गुट अस्तित्व में नहीं है और मीडिया में चल रही गठबंधन की खबरें पूरी तरह झूठी और निराधार हैं।
इसके बाद अमरावती जिले के पालक मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “अचलपुर में भाजपा अल्पमत में है और सिर्फ 9 नगरसेवक (पार्षद) है। बाकि अन्य दलों के पार्षद ज्यादा जीते हैं। उन्होंने अपना-अपना गुट बनाया है, लेकिन भाजपा के गुट में एआईएमआईएम या कांग्रेस नहीं है। भाजपा एआईएमआईएम के साथ कभी गठबंधन नहीं करेगी, कभी उसे साथ नहीं लेगी।”
नगर परिषद का सियासी गणित
नगराध्यक्षा माथने ने स्पष्ट किया कि अचलपुर नगर परिषद में एमआईएम का कोई आधिकारिक गुट नहीं है। उन्होंने बताया कि परिषद में कांग्रेस के 15 पार्षद हैं, जिन्होंने 21 जनवरी को हुए विषय समिति चुनावों में भाग नहीं लिया। विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया, जिसमें निर्विरोध चुनाव हुए। यहां कांग्रेस गठबंधन का समूह, अचलपुर विकास गठबंधन, अचलपुर परतवाडा विकास गठबंधन और भाजपा का अलग गुट सक्रिय हैं।
इससे पहले अकोला की अकोट नगर परिषद में भी भाजपा-एमआईएम के साथ आने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त नाराजगी जताई थी। जिसके बाद वहां भाजपा ने एमआईएम से दूरी बना ली थी। अब अचलपुर में भी वैसी ही स्थिति बनने पर भाजपा ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है।


