ऑपरेशन मेगाबुरू… नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता
तीन होमगार्ड जवानों व एक आम नागरिक की हत्या कर लूटा था 2000 कारतूस व 183 राइफल अनल उर्फ पातीराम मांझी पर झारखंड के विभिन्न थानों में 149 केस दर्ज हैं। इनमें तीन दर्जन मामले हत्या व हत्या के प्रयास के हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ लूट, आर्म्स एक्ट, लेवी वसूली, रंगदारी समेत कई मामले दर्ज हैं। पश्चिम सिंहभूम में उसके विरुद्ध 92, सरायकेला में 23 रांची में एक, हजारीबाग में 2, बोकारो में तीन, गिरिडीह में 32 और ओडिशा में एक मामला दर्ज है। अनल ने 11 नवंबर 2005 को गिरिडीह स्थित होमगार्ड प्रशिक्षण संस्थान पर हमला किया था। हमले में 3 होमगार्ड जवान व एक आम आदमी की हत्या कर 183 राइफल, दो रिवाल्वर और 2000 कारतूस लूटा था। इसके बाद 2006 में अनल दस्ते ने बोकारो स्थित सीआईएसएफ कैंप पर 3 मार्च को हमला किया था। इस हमले में जिला बल के पांच जवान शहीद हो गए थे। सीआईएसएफ के 2 जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। नक्सलियों ने विस्फोटक लगाकर बैरक को उड़ा दिया था। 2018 में कुचाई थाना क्षेत्र के कसरौली पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस के साथ अनल दस्ते की मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में एक पुलिस कर्मी व एक कोबरा जवान की मौत हुई थी। मई 2019 में खरसावां थाना क्षेत्र के रहेसुरू डैम की सुरक्षा में लगे हुड़गदा पुलिस पिकेट पार्टी पर घात लगाकर आईईडी ब्लास्ट की घटना को अंजाम दिया था। इस घटना में 2 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मई 2019 में ही अनल दस्ते ने कुचाई थाना क्षेत्र के रायसिंदरी में पुलिस पर घात लगाकर आईईडी से हमला किया था। इस घटना में कोबरा व झारखंड जगुआर के 15 पदाधिकारी व जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 1987 से नक्सल नेटवर्क का सूत्रधार: गिरिडीह में नक्सलवाद की पैठ जमा कर सारंडा में सक्रिय हुआ भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल रणनीतिकार अनल तीन दशकों तक झारखंड-बिहार में नक्सली नेटवर्क का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना रहा। अनल का मुख्य रूप से कोल्हान और सारंडा के जंगलों में अपना साम्राज्य चला। गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र से निकला यह उग्रवादी 1987 से सक्रिय था। उसने पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह में संगठन की जड़ें इतनी गहरी कर दीं थी कि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल हिंसा का केंद्र बना रहा।
अनल ने 1987 से 2000 के बीच ‘गोपाल दा’ के नाम से पीरटांड़, टुंडी और तोपचांची इलाके में अपनी धमक कायम की। इसी दौर में नक्सली संगठन ने इस पूरे क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई बड़े हमलों को अंजाम दिया। पुलिस के बीच उसका नाम दहशत का पर्याय बन चुका था। अनल ने सरायकेला, रांची, हजारीबाग, बोकारो, गिरिडीह और पश्चिम सिंहभूम के दुर्गम जंगलों में नक्सली नेटवर्क को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। वह सिर्फ एक फील्ड कमांडर नहीं, बल्कि संगठन की रणनीतियों को जमीन पर उतारने वाला प्रमुख योजनाकार था। कई बड़े हमलों की रूपरेखा उसी ने तैयार की, जिससे उस दौर में नक्सलवाद झारखंड के इस हिस्से में चरम पर पहुंच गया। रणनीतिक कौशल के कारण केंद्रीय कमेटी में शामिल था अनल माओवादी संगठन ने वर्ष 2000 में अनल को बिहार के जमुई भेजा था। वहां वह एक बार गिरफ्तार हुआ और बाद में उसे गिरिडीह जेल स्थानांतरित किया गया। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उसने अपनी गतिविधियां फिर शुरू कर दीं। जमानत के बाद अनल को रांची और गुमला जिलों की कमान सौंपी गई। यहां उसने संगठन को नई दिशा दी और तेजी से उसका प्रभाव बढ़ता चला गया। अपने रणनीतिक कौशल और संगठनात्मक क्षमता के कारण अनल को भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया। वह संगठन के उन गिने-चुने नेताओं में रहा, जो बड़े फैसले लेने वाली कोर टीम का हिस्सा थे। ऑपरेशन मेगाबुरू… नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता
तीन होमगार्ड जवानों व एक आम नागरिक की हत्या कर लूटा था 2000 कारतूस व 183 राइफल अनल उर्फ पातीराम मांझी पर झारखंड के विभिन्न थानों में 149 केस दर्ज हैं। इनमें तीन दर्जन मामले हत्या व हत्या के प्रयास के हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ लूट, आर्म्स एक्ट, लेवी वसूली, रंगदारी समेत कई मामले दर्ज हैं। पश्चिम सिंहभूम में उसके विरुद्ध 92, सरायकेला में 23 रांची में एक, हजारीबाग में 2, बोकारो में तीन, गिरिडीह में 32 और ओडिशा में एक मामला दर्ज है। अनल ने 11 नवंबर 2005 को गिरिडीह स्थित होमगार्ड प्रशिक्षण संस्थान पर हमला किया था। हमले में 3 होमगार्ड जवान व एक आम आदमी की हत्या कर 183 राइफल, दो रिवाल्वर और 2000 कारतूस लूटा था। इसके बाद 2006 में अनल दस्ते ने बोकारो स्थित सीआईएसएफ कैंप पर 3 मार्च को हमला किया था। इस हमले में जिला बल के पांच जवान शहीद हो गए थे। सीआईएसएफ के 2 जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। नक्सलियों ने विस्फोटक लगाकर बैरक को उड़ा दिया था। 2018 में कुचाई थाना क्षेत्र के कसरौली पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस के साथ अनल दस्ते की मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में एक पुलिस कर्मी व एक कोबरा जवान की मौत हुई थी। मई 2019 में खरसावां थाना क्षेत्र के रहेसुरू डैम की सुरक्षा में लगे हुड़गदा पुलिस पिकेट पार्टी पर घात लगाकर आईईडी ब्लास्ट की घटना को अंजाम दिया था। इस घटना में 2 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मई 2019 में ही अनल दस्ते ने कुचाई थाना क्षेत्र के रायसिंदरी में पुलिस पर घात लगाकर आईईडी से हमला किया था। इस घटना में कोबरा व झारखंड जगुआर के 15 पदाधिकारी व जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 1987 से नक्सल नेटवर्क का सूत्रधार: गिरिडीह में नक्सलवाद की पैठ जमा कर सारंडा में सक्रिय हुआ भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल रणनीतिकार अनल तीन दशकों तक झारखंड-बिहार में नक्सली नेटवर्क का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना रहा। अनल का मुख्य रूप से कोल्हान और सारंडा के जंगलों में अपना साम्राज्य चला। गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र से निकला यह उग्रवादी 1987 से सक्रिय था। उसने पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह में संगठन की जड़ें इतनी गहरी कर दीं थी कि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल हिंसा का केंद्र बना रहा।
अनल ने 1987 से 2000 के बीच ‘गोपाल दा’ के नाम से पीरटांड़, टुंडी और तोपचांची इलाके में अपनी धमक कायम की। इसी दौर में नक्सली संगठन ने इस पूरे क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई बड़े हमलों को अंजाम दिया। पुलिस के बीच उसका नाम दहशत का पर्याय बन चुका था। अनल ने सरायकेला, रांची, हजारीबाग, बोकारो, गिरिडीह और पश्चिम सिंहभूम के दुर्गम जंगलों में नक्सली नेटवर्क को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। वह सिर्फ एक फील्ड कमांडर नहीं, बल्कि संगठन की रणनीतियों को जमीन पर उतारने वाला प्रमुख योजनाकार था। कई बड़े हमलों की रूपरेखा उसी ने तैयार की, जिससे उस दौर में नक्सलवाद झारखंड के इस हिस्से में चरम पर पहुंच गया। रणनीतिक कौशल के कारण केंद्रीय कमेटी में शामिल था अनल माओवादी संगठन ने वर्ष 2000 में अनल को बिहार के जमुई भेजा था। वहां वह एक बार गिरफ्तार हुआ और बाद में उसे गिरिडीह जेल स्थानांतरित किया गया। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उसने अपनी गतिविधियां फिर शुरू कर दीं। जमानत के बाद अनल को रांची और गुमला जिलों की कमान सौंपी गई। यहां उसने संगठन को नई दिशा दी और तेजी से उसका प्रभाव बढ़ता चला गया। अपने रणनीतिक कौशल और संगठनात्मक क्षमता के कारण अनल को भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया। वह संगठन के उन गिने-चुने नेताओं में रहा, जो बड़े फैसले लेने वाली कोर टीम का हिस्सा थे।


