आज पांच शुभ योग में सरस्वती पूजा मनाई जाएगी। माघ शुक्ल पंचमी में पूर्वाभाद्र व उत्तरभाद्र नक्षत्र, परिघ योग, शिव योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी-नारायण योग और बुधादित्य योग का संयोग बन रहा है। बसंत पंचमी का पर्व विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत व कला की अधिष्ठात्री देवी मां बागेश्वरी को समर्पित है। पूजा के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाएंगे। नवजात शिशुओं का होगा अक्षरारंभ आचार्य राकेश झा ने बताया कि आज देवी सरस्वती की पूजा के बाद नवजात शिशुओं का पारंपरिक विधि से अक्षरारंभ संस्कार होगा। शिक्षा आरंभ करने से बालक में ज्ञान, संस्कार व विवेक का विकास होता है। इस संस्कार के अंतर्गत बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाएगा। माता-पिता, गुरु, आचार्य, पुरोहित के द्वारा आज नवजात बच्चों से ॐ, श्री, अ जैसे पवित्र अक्षरों से लेखन की शुरुआत होगी। सरस्वती माता के स्वरूप का महत्व श्वेत वर्ण- मां सरस्वती का श्वेत रंग का अर्थ पवित्रता, शुद्धता, ज्ञान, शांति और सात्त्विकता से है। यह रंग मन की निर्मलता, विद्या के प्रति समर्पण और सांसारिक मोह से मुक्ति का प्रतीक है। हंस वाहन- मां सरस्वती का वाहन हंस है, जो विवेक का प्रतीक है। वह दूध और पानी को अलग कर सकता है। यह संकेत देता है कि उनका वाहन साधक को सत्य और असत्य में भेद करना सिखाता है। वीणा- माता सरस्वती का वीणा धारण करना बताता है कि नाद या ध्वनि ही ब्रह्म तक पहुंचने का माध्यम है। मंत्र-जप, भजन, कीर्तन व स्वाध्याय से सरस्वती तत्व को जागृत करते हैं और साधक को आंतरिक आनंद की अनुभूति कराते हैं। बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण किए जाते बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण कर देवी सरस्वती की आराधना करने से रिश्तों में मधुरता का प्रवाह होता है। श्रीकृष्ण ने पीतांबर धारण करके सरस्वती माता का पूजन माघ शुक्ल पंचमी को किए थे। पीले रंग का संबंध गुरु ग्रह से है जो ज्ञान, धन व शुभता के कर्क माने जाते हैं। इस ग्रह के प्रभाव से धना आगमन, सुख व समृद्धि की प्राप्त होती है। पीला रंग शुद्धता, सादगी, निर्मलता व सात्विकता का प्रतीक है। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त पंचमी तिथि: देर रात 12:22 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: प्रातः 06:38 बजे से 10:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:40 बजे से 12:23 बजे तक शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 01:22 बजे तक वृष लग्न मुहूर्त: दोपहर 12:28 बजे से 02:25 बजे तक राशि के अनुसार मां सरस्वती की पूजा मेष: सिंदूर, लाल फूल, गुलाबी अबीर अर्पण करें। वृष: हरे रंग की कलम, पीला फूल चढ़ाए। मिथुन: श्वेत रंग की कलम, अपराजिता पुष्प, नारियल अर्पण करें। कर्क: लाल कलम, इत्र, अभ्रक चढ़ाए। सिंह: पीले रंग की कलम, लाल फूल, अभ्रक अर्पित करें। कन्या: गुड़, अबीर, इत्र अर्पण तथा पुस्तक का दान करें। तुला: नीला कलम, पंचामृत, गुलाबी अबीर, इत्र चढ़ाए। वृश्चिक: सफेद रेशमी वस्त्र, ऋतुफल, गंगाजल अर्पित करें। धनु: श्वेत चंदन, अबीर, पीला फूल चढ़ाए। मकर: अरवा चावल, दही, पुष्प माला, शहद अर्पण करें। कुंभ: खीर, पीला अबीर, इत्र चढ़ाए। मीन: सफेद वस्त्र, पीला फूल, घी अर्पित करें। आर्टिफिशियल तालाब में ही होगा मूर्ति विसर्जन सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना में आर्टिफिशियल तालाब बनाए गय है, जिसमें मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। इसे लेकर पटना नगर निगम द्वारा विभिन्न घाटों पर कुल 7 आर्टिफिशियल तालाबों का निर्माण किया गया है। ये तालाब विशेष रूप से पूजा के दौरान मूर्ति और पूजन सामग्री के विसर्जन को लेकर बनाए गए हैं। निर्धारित स्थलों के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर विसर्जन किए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई के साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा। 4 अंचल में बनाए जा रहे 7 आर्टिफिशियल तालाब बांकीपुर अंचल में लॉ कॉलेज घाट, पाटलिपुत्र अंचल में पाटीपुल घाट और मीनार घाट, अजीमाबाद अंचल में घाट और मित्तन घाट, पटना सिटी अंचल में कंगन घाट और दमराही घाट में आर्टिफिशियल तालाब बनाए गए हैं। इस दौरान कपड़े से बैरिकेडिंग की गई और लाइट भी लगाया गया। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि, इन आर्टिफिशियल तालाबों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जल स्त्रोतों की स्वच्छता बनी रहे। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरस्वती पूजा का आयोजन पर्यावरणीय दायित्व के साथ सुनिश्चित किया जाए। अपने संबंधित अंचल में बने कृत्रिम तालाब में ही करें मूर्ति विसर्जन सरस्वती पूजा के दिन पटना नगर निगम की टीम अपने निर्धारित अंचल में बने पंडालों में घूमेगी और मॉनिटरिंग करेगी कि मानक के अनुसार पंडाल बैठे हो। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने लोगों से अपील की है कि जहां पर भी पंडाल बनाकर मूर्ति बैठाई जा रही है, वहां पर स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। पूजन सामग्री को जहां-तहां न फेंके। सूखा और गीला कचरा के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखें। वहीं, मूर्ति विसर्जन अपने संबंधित अंचल में बने कृत्रिम तालाब में ही जाकर करें। गंगा में विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा पटना शहर को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पटना नगर निगम द्वारा ये तैयारियां की गई है। गंगा नदी सहित अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए पटना नगर निगम द्वारा विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। सरस्वती पूजा के अवसर पर अभियान को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए पटना नगर निगम की विशेष जागरूकता टीमें भी घाटों पर तैनात रहेंगी। ये टीमें श्रद्धालुओं एवं पूजा समितियों को प्लास्टिक रैपर, पॉलीथिन तथा अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग से बचने के लिए प्रेरित करेगी। आज पांच शुभ योग में सरस्वती पूजा मनाई जाएगी। माघ शुक्ल पंचमी में पूर्वाभाद्र व उत्तरभाद्र नक्षत्र, परिघ योग, शिव योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी-नारायण योग और बुधादित्य योग का संयोग बन रहा है। बसंत पंचमी का पर्व विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत व कला की अधिष्ठात्री देवी मां बागेश्वरी को समर्पित है। पूजा के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाएंगे। नवजात शिशुओं का होगा अक्षरारंभ आचार्य राकेश झा ने बताया कि आज देवी सरस्वती की पूजा के बाद नवजात शिशुओं का पारंपरिक विधि से अक्षरारंभ संस्कार होगा। शिक्षा आरंभ करने से बालक में ज्ञान, संस्कार व विवेक का विकास होता है। इस संस्कार के अंतर्गत बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाएगा। माता-पिता, गुरु, आचार्य, पुरोहित के द्वारा आज नवजात बच्चों से ॐ, श्री, अ जैसे पवित्र अक्षरों से लेखन की शुरुआत होगी। सरस्वती माता के स्वरूप का महत्व श्वेत वर्ण- मां सरस्वती का श्वेत रंग का अर्थ पवित्रता, शुद्धता, ज्ञान, शांति और सात्त्विकता से है। यह रंग मन की निर्मलता, विद्या के प्रति समर्पण और सांसारिक मोह से मुक्ति का प्रतीक है। हंस वाहन- मां सरस्वती का वाहन हंस है, जो विवेक का प्रतीक है। वह दूध और पानी को अलग कर सकता है। यह संकेत देता है कि उनका वाहन साधक को सत्य और असत्य में भेद करना सिखाता है। वीणा- माता सरस्वती का वीणा धारण करना बताता है कि नाद या ध्वनि ही ब्रह्म तक पहुंचने का माध्यम है। मंत्र-जप, भजन, कीर्तन व स्वाध्याय से सरस्वती तत्व को जागृत करते हैं और साधक को आंतरिक आनंद की अनुभूति कराते हैं। बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण किए जाते बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण कर देवी सरस्वती की आराधना करने से रिश्तों में मधुरता का प्रवाह होता है। श्रीकृष्ण ने पीतांबर धारण करके सरस्वती माता का पूजन माघ शुक्ल पंचमी को किए थे। पीले रंग का संबंध गुरु ग्रह से है जो ज्ञान, धन व शुभता के कर्क माने जाते हैं। इस ग्रह के प्रभाव से धना आगमन, सुख व समृद्धि की प्राप्त होती है। पीला रंग शुद्धता, सादगी, निर्मलता व सात्विकता का प्रतीक है। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त पंचमी तिथि: देर रात 12:22 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: प्रातः 06:38 बजे से 10:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:40 बजे से 12:23 बजे तक शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 01:22 बजे तक वृष लग्न मुहूर्त: दोपहर 12:28 बजे से 02:25 बजे तक राशि के अनुसार मां सरस्वती की पूजा मेष: सिंदूर, लाल फूल, गुलाबी अबीर अर्पण करें। वृष: हरे रंग की कलम, पीला फूल चढ़ाए। मिथुन: श्वेत रंग की कलम, अपराजिता पुष्प, नारियल अर्पण करें। कर्क: लाल कलम, इत्र, अभ्रक चढ़ाए। सिंह: पीले रंग की कलम, लाल फूल, अभ्रक अर्पित करें। कन्या: गुड़, अबीर, इत्र अर्पण तथा पुस्तक का दान करें। तुला: नीला कलम, पंचामृत, गुलाबी अबीर, इत्र चढ़ाए। वृश्चिक: सफेद रेशमी वस्त्र, ऋतुफल, गंगाजल अर्पित करें। धनु: श्वेत चंदन, अबीर, पीला फूल चढ़ाए। मकर: अरवा चावल, दही, पुष्प माला, शहद अर्पण करें। कुंभ: खीर, पीला अबीर, इत्र चढ़ाए। मीन: सफेद वस्त्र, पीला फूल, घी अर्पित करें। आर्टिफिशियल तालाब में ही होगा मूर्ति विसर्जन सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना में आर्टिफिशियल तालाब बनाए गय है, जिसमें मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। इसे लेकर पटना नगर निगम द्वारा विभिन्न घाटों पर कुल 7 आर्टिफिशियल तालाबों का निर्माण किया गया है। ये तालाब विशेष रूप से पूजा के दौरान मूर्ति और पूजन सामग्री के विसर्जन को लेकर बनाए गए हैं। निर्धारित स्थलों के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर विसर्जन किए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई के साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा। 4 अंचल में बनाए जा रहे 7 आर्टिफिशियल तालाब बांकीपुर अंचल में लॉ कॉलेज घाट, पाटलिपुत्र अंचल में पाटीपुल घाट और मीनार घाट, अजीमाबाद अंचल में घाट और मित्तन घाट, पटना सिटी अंचल में कंगन घाट और दमराही घाट में आर्टिफिशियल तालाब बनाए गए हैं। इस दौरान कपड़े से बैरिकेडिंग की गई और लाइट भी लगाया गया। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि, इन आर्टिफिशियल तालाबों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जल स्त्रोतों की स्वच्छता बनी रहे। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरस्वती पूजा का आयोजन पर्यावरणीय दायित्व के साथ सुनिश्चित किया जाए। अपने संबंधित अंचल में बने कृत्रिम तालाब में ही करें मूर्ति विसर्जन सरस्वती पूजा के दिन पटना नगर निगम की टीम अपने निर्धारित अंचल में बने पंडालों में घूमेगी और मॉनिटरिंग करेगी कि मानक के अनुसार पंडाल बैठे हो। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने लोगों से अपील की है कि जहां पर भी पंडाल बनाकर मूर्ति बैठाई जा रही है, वहां पर स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। पूजन सामग्री को जहां-तहां न फेंके। सूखा और गीला कचरा के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखें। वहीं, मूर्ति विसर्जन अपने संबंधित अंचल में बने कृत्रिम तालाब में ही जाकर करें। गंगा में विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा पटना शहर को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पटना नगर निगम द्वारा ये तैयारियां की गई है। गंगा नदी सहित अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए पटना नगर निगम द्वारा विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। सरस्वती पूजा के अवसर पर अभियान को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए पटना नगर निगम की विशेष जागरूकता टीमें भी घाटों पर तैनात रहेंगी। ये टीमें श्रद्धालुओं एवं पूजा समितियों को प्लास्टिक रैपर, पॉलीथिन तथा अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग से बचने के लिए प्रेरित करेगी।


