‘मेरे पति राजदेव भारती, ससुर सुंदर भारती चार दिन पहले रविवार को ही कमाने गए थे। ठेकेदार मेरे पति, ससुर और गांव के अन्य लोगों को झूठ बोलकर, अच्छा काम दिलाने का बहाना बनाकर छत्तीसगढ़ ले गया था। कहा था काम अच्छा है, पैसे अच्छे मिलेंगे,लेकिन स्टील प्लांट में खतरनाक काम में उन्हें लगा दिया।’ 20 साल की आरती देवी ने ये बातें कही। आरती देवी के पति राजदेव भारती उन 6 लोगों में शामिल हैं, जिनकी गुरुवार को छत्तीसगढ़ स्टील प्लांट में हुए ब्लास्ट में मौत हो गई। रोजगार की तलाश में घर से निकले राजदेव समेत गोटीबांध गांव के छह लोग अब कभी लौट कर नहीं आएंगे। गोटीबांध गांव मातम में डूबा है। विस्फोट में गांव के 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में कोहराम मच गया, रोने-बिलखने की आवाजें गूंज रही हैं। गांव के हर आंगन में सन्नाटा पसरा है, चूल्हे तक नहीं जले हैं और लोग एक-दूसरे को ढांढस देने की कोशिश कर रहे हैं। महिलाएं रो-रोकर बेहोश हो रही हैं। जानिए उन 6 मजदूरों की कहानी जो दो जून की रोटी कमाने गए थे, लेकिन उनकी जिंदगी भट्ठी में जल गई… सबसे पहले ब्लास्ट की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले प्रत्यक्षदर्शियों से जानिए खौफनाक कहानी अचानक धुआं निकला, भागो-भागो की आवाज आई प्रत्यक्षदर्शी जोगेंद्र राम ने कांपती आवाज में बताया, ‘हमलोग हेल्पर का काम कर रहे थे। सुबह करीब 10 बजे भट्टे से अचानक धुआं निकलने लगा। साहेब लोग चिल्लाए भागो-भागो। हम लोग जान बचाकर भागे। कुल 11 लोग थे, लेकिन बाद में सिर्फ 3 ही दिखे। बाकी लोग अंदर ही फंस गए।’ वहीं रामस्वरूप भारती ने बताया, ‘गैस निकलते ही अफरा-तफरी मच गई। कोई निकल सका, कोई नहीं । इस हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। स्टील प्लांट ब्लास्ट में पिता और पुत्र की एक साथ मौत हो गई। सुंदर भुइया और उनके बेटे राजदेव भुइया दोनों ने एक ही दिन दम तोड़ दिया।’ ‘वहीं विनय भुइया अपने पीछे एक बेटा और चार बेटियां छोड़ गए हैं। उनका बेटा बचपन से ही मानसिक रूप से अस्वस्थ है। जितेंद्र भारती की चार महीने की दूधमुंही बेटी है, जो शायद कभी अपने पिता को पहचान भी नहीं पाएगी।’ अब जानिए, मृतकों के परिजन ने क्या बताया? हादसे में परिवार खत्मः पिता-पुत्र की मौत हादसे में मारे गए लोगों में पिता-पुत्र के अलावा एक ही परिवार के तीन लोग भी शामिल हैं। गांव के एक अन्य मजदूर की भी मौत हुई है। घायलों में गांव के ही रहने वाले 44 साल के कल्पू भुइयां, जबकि डुमरिया थाना क्षेत्र के ही देवरी गांव के 34 साल के रामू भुइयां भी शामिल हैं। मृतकों के परिजन ने बताया, ‘कुछ दिन पहले ठेकेदार आया था। उसने कहा कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में एक काम है। गांव के कुछ लोग मेरे साथ चलो। अच्छे पैसे मिलेंगे। काम भी ठीक है, ज्यादा देर काम भी नहीं करना है।’ ‘जब गांव के लोगों ने काम के बारे में पूछा तो कहा कि कुछ नहीं मजदूरी ही करनी है, लेकिन किसी तरह का कोई जोखिम नहीं है, खतरा नहीं है। मृतकों में से एक के परिजन ने बताया कि ठेकेदार रविवार को ही सभी 7 लोगों को लेकर गया था। वहां जाने के बाद पता चला कि सभी को स्टील प्लांट में काम करना है।’ मृतकों के साथी मजदूर राजेश कुमार ठाकुर ने बताया, ‘हम लोग 7 जनवरी को 25 मजदूरों के साथ घर से निकले थे। झारखंड के ठेकेदार ने कहा था कि क्रेशर मशीन पर हल्का काम है। लेकिन वहां जबरन स्टील प्लांट में झोंक दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘मैं 18 जनवरी को किसी कारण से घर लौट आया था, वरना आज मैं भी इस हादसे का शिकार हो सकता था।’ अनाज बेचकर टिकट के पैसे जुटाए थे मृतक के परिजन के मुताबिक, ‘पहले तो गांव से गए सभी 7 लोगों ने काम देखकर मना कर दिया, लेकिन फिर आपस में मशविरा किया और काम पर जाने लगे। उन्होंने बताया कि जो भी लोग काम के लिए छत्तीसगढ़ गए थे, उनके पास टिकट के भी पैसे नहीं थे। कुछ लोगों ने अनाज बेचा तो कुछ लोगों ने बकरियों और मुर्गियों को बेचा। फिर जो पैसा इक्ट्ठा हुआ, उससे टिकट खरीदकर छत्तीसगढ़ गए थे।’ मृतक के परिजन के मुताबिक, ‘अगर काम नहीं करते तो फिर वापस आना पड़ता, लेकिन आने के लिए भी पैसे नहीं थे। इसलिए सोचा कि कुछ दिन काम कर लेते हैं, फिर कुछ पैसे इक्ट्ठा हो जाएंगे तो होली में घर लौट जाएंगे।’ सुदंर की पत्नी बोली- पति के साथ इकलौता बेटा भी चला गया मृतकों में शामिल सुंदर भारती की पत्नी ने बताया, ‘राजदेव मेरा इकलौता बेटा था। पति सुंदर भारती पहले भी काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों में जाते रहे हैं। बेटा राजदेव गांव में ही रहता था। इस बार जब पति आए थे, तब उन्होंने राजदेव से कहा था कि बेटा तुम भी इस बार मेरे साथ चलना। ठेकेदार से बात हो गई है, हम दोनों एक साथ कमाएंगे तो घर अच्छे से चलेगा।’ सुंदर भारती की पत्नी ने कहा, ‘शुरुआत में मेरा मन बिल्कुल नहीं था कि इकलौते बेटे को मैं अपनी नजरों से दूर करूं, क्योंकि घर में मेरे अलावा राजदेव की पत्नी है। घर के और भी काम हैं, कैसे होगा, लेकिन सोचा कि कुछ साल पति और बेटा मिलकर अच्छी कमाई कर लेंगे तो घर-गांव में ही कोई दुकान खोल लेंगे या कोई और काम कर लेंगे, लेकिन मुझे क्या पता था कि बेटा का जाना जीवनभर का दर्द बन जाएगा।’ ‘2 साल पहले ही बेटे की शादी की थी, अब पोता, बहू का क्या होगा’ सुंदर भारती की पत्नी ने कहा, ‘दो साल पहले ही धूमधाम से इकलौते बेटे राजदेव की शादी की थी। एक साल का मेरा पोता है, अब न पोते के पापा रहे, न दादा। मैं अब पोते और बहू को छोड़कर कैसे भगवान के पास जाऊंगी, इनका क्या होगा, कौन इनकी देखभाल करेगा?’ गांव के ही एक अन्य परिवार के तीन लोगों की मौत स्टील प्लांट ब्लास्ट में हुई है। मरने वालों में बद्री भारती, जितेंद्र भारती और श्रवण कुमार शामिल है। बद्री भारती और जितेंद्र भारती चचेरे भाई हैं, जबकि श्रवण कुमार उनका भतीजा है। इनके अलावा, इसी गांव के एक अन्य मजदूर विनय भारती की भी धमाके में मौत हुई है। मृतक श्रवण भारती के पिता शंकर भारती ने रोते हुए कहा, ‘मेरा बेटा रोजी-रोटी के लिए गया था। ठेकेदार ने धोखा दिया। सरकार से बस यही मांग है कि हमारे बच्चों की मौत बेकार न जाए।’ उन्होंने ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। अब जहां धमाका हुआ, उस स्पंज आयरन प्लांट के बारे में जानिए स्पंज आयरन प्लांट में लौह अयस्क (Iron Ore) से स्पंज आयरन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया डायरेक्ट रिडक्शन तकनीक से होती है, जिसमें कोयला या गैस की मदद से अयस्क से ऑक्सीजन हटाई जाती है। इससे बना स्पंज आयरन आगे चलकर स्टील बनाने का कच्चा माल होता है, जिसे स्टील प्लांट में भेजा जाता है। प्लांट के मालिक नितेश अग्रवाल ने बताया कि रोज की तरह हाउस कीपिंग का काम चल रहा था, तभी डीएससी में डस्ट मटेरियल गिरा, जो काफी गर्म रहता है। मटेरियल नीचे काम कर रहे लोगों के ऊपर गिरने से ये हादसा हो गया। प्लांट प्रबंधन की ओर से मृतकों को 20 लाख और घायलों को 5 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। घटना के वक्त किसी ने सेफ्टी सूट नहीं पहना था
हादसे के वक्त मृत और घायल मजदूरों में किसी ने भी सेफ्टी सूट नहीं पहना था। घटना के वक्त प्लांट में मौजूद लोगों ने अफसरों को बताया कि ज्वलनशील गैस और गर्म राख को डस्ट सेटलिंग चेम्बर से आगे ले जाने वाली पाइपलाइन में अचानक जोर का ब्लास्ट हुआ। प्लांट में सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही
प्लॉट में ब्लास्ट होने के साथ सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को लेकर आखिरी बार जांच कब की गई थी और पर्यावरण विभाग की टीम ने भी यहां आखिरी बार कब इंस्पेक्शन किया था। बलौदाबाजार में राष्ट्रीय स्तर के बड़े सीमेंट कारखाने भी लगे हैं, जहां पिछले सालों में हादसे बढ़े हैं। इन दुर्घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर इनसाइटः स्क्रबर को मार रहे थे रॉड, इसी से हुआ ब्लास्ट
प्लांट के जिस वेट स्क्रबर में ब्लास्ट होने से 6 श्रमिकों की मौत हुई, उसके मेंटेनेंस में बैड प्रैक्टिस की बात सामने आई है। प्रशासन ने अपनी जांच में पाया कि वेट स्क्रबर से डस्ट झाड़ने के लिए यहां हैमरिंग की जा रही थी। श्रमिक लोहे की रॉड मारकर डस्ट झाड़ रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि आयरन ओर को स्पंज आयरन बनाने के प्रोसेस में ज्वलनशील मोनो कार्बन समेत कई गमं गैस और बड़ी मात्रा में राख निकलती है। डस्ट सेटलिंग चेंबर से होते हुए गैस और राख वेट स्क्रबर में पहुंचती है, जहां इसे पानी के जरिए धोकर और ठंडा किया जाता है। शुरुआती जांच में पता चला है कि प्लांट में बेट स्क्रबर की नियमित सफाई नहीं हो रही थी। ऐसे में इसके भीतर स्लरी जमना बहुत सामान्य है। बार-बार हैमरिंग से स्लरी टूटकर गिर सकती है और लीकेज का खतरा बढ़ जाता है। हैमरिंग से स्पार्क भी पैदा होता है। इसी से वेट स्क्रबर के भीतर मौजूद गैस में आग लगती है। बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि हादसे के शिकार लोगों के परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। प्रशासन ने प्लांट सील कर जांच शुरू कर दी है।छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने भी घटना पर दुख जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। ‘मेरे पति राजदेव भारती, ससुर सुंदर भारती चार दिन पहले रविवार को ही कमाने गए थे। ठेकेदार मेरे पति, ससुर और गांव के अन्य लोगों को झूठ बोलकर, अच्छा काम दिलाने का बहाना बनाकर छत्तीसगढ़ ले गया था। कहा था काम अच्छा है, पैसे अच्छे मिलेंगे,लेकिन स्टील प्लांट में खतरनाक काम में उन्हें लगा दिया।’ 20 साल की आरती देवी ने ये बातें कही। आरती देवी के पति राजदेव भारती उन 6 लोगों में शामिल हैं, जिनकी गुरुवार को छत्तीसगढ़ स्टील प्लांट में हुए ब्लास्ट में मौत हो गई। रोजगार की तलाश में घर से निकले राजदेव समेत गोटीबांध गांव के छह लोग अब कभी लौट कर नहीं आएंगे। गोटीबांध गांव मातम में डूबा है। विस्फोट में गांव के 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में कोहराम मच गया, रोने-बिलखने की आवाजें गूंज रही हैं। गांव के हर आंगन में सन्नाटा पसरा है, चूल्हे तक नहीं जले हैं और लोग एक-दूसरे को ढांढस देने की कोशिश कर रहे हैं। महिलाएं रो-रोकर बेहोश हो रही हैं। जानिए उन 6 मजदूरों की कहानी जो दो जून की रोटी कमाने गए थे, लेकिन उनकी जिंदगी भट्ठी में जल गई… सबसे पहले ब्लास्ट की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले प्रत्यक्षदर्शियों से जानिए खौफनाक कहानी अचानक धुआं निकला, भागो-भागो की आवाज आई प्रत्यक्षदर्शी जोगेंद्र राम ने कांपती आवाज में बताया, ‘हमलोग हेल्पर का काम कर रहे थे। सुबह करीब 10 बजे भट्टे से अचानक धुआं निकलने लगा। साहेब लोग चिल्लाए भागो-भागो। हम लोग जान बचाकर भागे। कुल 11 लोग थे, लेकिन बाद में सिर्फ 3 ही दिखे। बाकी लोग अंदर ही फंस गए।’ वहीं रामस्वरूप भारती ने बताया, ‘गैस निकलते ही अफरा-तफरी मच गई। कोई निकल सका, कोई नहीं । इस हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। स्टील प्लांट ब्लास्ट में पिता और पुत्र की एक साथ मौत हो गई। सुंदर भुइया और उनके बेटे राजदेव भुइया दोनों ने एक ही दिन दम तोड़ दिया।’ ‘वहीं विनय भुइया अपने पीछे एक बेटा और चार बेटियां छोड़ गए हैं। उनका बेटा बचपन से ही मानसिक रूप से अस्वस्थ है। जितेंद्र भारती की चार महीने की दूधमुंही बेटी है, जो शायद कभी अपने पिता को पहचान भी नहीं पाएगी।’ अब जानिए, मृतकों के परिजन ने क्या बताया? हादसे में परिवार खत्मः पिता-पुत्र की मौत हादसे में मारे गए लोगों में पिता-पुत्र के अलावा एक ही परिवार के तीन लोग भी शामिल हैं। गांव के एक अन्य मजदूर की भी मौत हुई है। घायलों में गांव के ही रहने वाले 44 साल के कल्पू भुइयां, जबकि डुमरिया थाना क्षेत्र के ही देवरी गांव के 34 साल के रामू भुइयां भी शामिल हैं। मृतकों के परिजन ने बताया, ‘कुछ दिन पहले ठेकेदार आया था। उसने कहा कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में एक काम है। गांव के कुछ लोग मेरे साथ चलो। अच्छे पैसे मिलेंगे। काम भी ठीक है, ज्यादा देर काम भी नहीं करना है।’ ‘जब गांव के लोगों ने काम के बारे में पूछा तो कहा कि कुछ नहीं मजदूरी ही करनी है, लेकिन किसी तरह का कोई जोखिम नहीं है, खतरा नहीं है। मृतकों में से एक के परिजन ने बताया कि ठेकेदार रविवार को ही सभी 7 लोगों को लेकर गया था। वहां जाने के बाद पता चला कि सभी को स्टील प्लांट में काम करना है।’ मृतकों के साथी मजदूर राजेश कुमार ठाकुर ने बताया, ‘हम लोग 7 जनवरी को 25 मजदूरों के साथ घर से निकले थे। झारखंड के ठेकेदार ने कहा था कि क्रेशर मशीन पर हल्का काम है। लेकिन वहां जबरन स्टील प्लांट में झोंक दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘मैं 18 जनवरी को किसी कारण से घर लौट आया था, वरना आज मैं भी इस हादसे का शिकार हो सकता था।’ अनाज बेचकर टिकट के पैसे जुटाए थे मृतक के परिजन के मुताबिक, ‘पहले तो गांव से गए सभी 7 लोगों ने काम देखकर मना कर दिया, लेकिन फिर आपस में मशविरा किया और काम पर जाने लगे। उन्होंने बताया कि जो भी लोग काम के लिए छत्तीसगढ़ गए थे, उनके पास टिकट के भी पैसे नहीं थे। कुछ लोगों ने अनाज बेचा तो कुछ लोगों ने बकरियों और मुर्गियों को बेचा। फिर जो पैसा इक्ट्ठा हुआ, उससे टिकट खरीदकर छत्तीसगढ़ गए थे।’ मृतक के परिजन के मुताबिक, ‘अगर काम नहीं करते तो फिर वापस आना पड़ता, लेकिन आने के लिए भी पैसे नहीं थे। इसलिए सोचा कि कुछ दिन काम कर लेते हैं, फिर कुछ पैसे इक्ट्ठा हो जाएंगे तो होली में घर लौट जाएंगे।’ सुदंर की पत्नी बोली- पति के साथ इकलौता बेटा भी चला गया मृतकों में शामिल सुंदर भारती की पत्नी ने बताया, ‘राजदेव मेरा इकलौता बेटा था। पति सुंदर भारती पहले भी काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों में जाते रहे हैं। बेटा राजदेव गांव में ही रहता था। इस बार जब पति आए थे, तब उन्होंने राजदेव से कहा था कि बेटा तुम भी इस बार मेरे साथ चलना। ठेकेदार से बात हो गई है, हम दोनों एक साथ कमाएंगे तो घर अच्छे से चलेगा।’ सुंदर भारती की पत्नी ने कहा, ‘शुरुआत में मेरा मन बिल्कुल नहीं था कि इकलौते बेटे को मैं अपनी नजरों से दूर करूं, क्योंकि घर में मेरे अलावा राजदेव की पत्नी है। घर के और भी काम हैं, कैसे होगा, लेकिन सोचा कि कुछ साल पति और बेटा मिलकर अच्छी कमाई कर लेंगे तो घर-गांव में ही कोई दुकान खोल लेंगे या कोई और काम कर लेंगे, लेकिन मुझे क्या पता था कि बेटा का जाना जीवनभर का दर्द बन जाएगा।’ ‘2 साल पहले ही बेटे की शादी की थी, अब पोता, बहू का क्या होगा’ सुंदर भारती की पत्नी ने कहा, ‘दो साल पहले ही धूमधाम से इकलौते बेटे राजदेव की शादी की थी। एक साल का मेरा पोता है, अब न पोते के पापा रहे, न दादा। मैं अब पोते और बहू को छोड़कर कैसे भगवान के पास जाऊंगी, इनका क्या होगा, कौन इनकी देखभाल करेगा?’ गांव के ही एक अन्य परिवार के तीन लोगों की मौत स्टील प्लांट ब्लास्ट में हुई है। मरने वालों में बद्री भारती, जितेंद्र भारती और श्रवण कुमार शामिल है। बद्री भारती और जितेंद्र भारती चचेरे भाई हैं, जबकि श्रवण कुमार उनका भतीजा है। इनके अलावा, इसी गांव के एक अन्य मजदूर विनय भारती की भी धमाके में मौत हुई है। मृतक श्रवण भारती के पिता शंकर भारती ने रोते हुए कहा, ‘मेरा बेटा रोजी-रोटी के लिए गया था। ठेकेदार ने धोखा दिया। सरकार से बस यही मांग है कि हमारे बच्चों की मौत बेकार न जाए।’ उन्होंने ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। अब जहां धमाका हुआ, उस स्पंज आयरन प्लांट के बारे में जानिए स्पंज आयरन प्लांट में लौह अयस्क (Iron Ore) से स्पंज आयरन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया डायरेक्ट रिडक्शन तकनीक से होती है, जिसमें कोयला या गैस की मदद से अयस्क से ऑक्सीजन हटाई जाती है। इससे बना स्पंज आयरन आगे चलकर स्टील बनाने का कच्चा माल होता है, जिसे स्टील प्लांट में भेजा जाता है। प्लांट के मालिक नितेश अग्रवाल ने बताया कि रोज की तरह हाउस कीपिंग का काम चल रहा था, तभी डीएससी में डस्ट मटेरियल गिरा, जो काफी गर्म रहता है। मटेरियल नीचे काम कर रहे लोगों के ऊपर गिरने से ये हादसा हो गया। प्लांट प्रबंधन की ओर से मृतकों को 20 लाख और घायलों को 5 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। घटना के वक्त किसी ने सेफ्टी सूट नहीं पहना था
हादसे के वक्त मृत और घायल मजदूरों में किसी ने भी सेफ्टी सूट नहीं पहना था। घटना के वक्त प्लांट में मौजूद लोगों ने अफसरों को बताया कि ज्वलनशील गैस और गर्म राख को डस्ट सेटलिंग चेम्बर से आगे ले जाने वाली पाइपलाइन में अचानक जोर का ब्लास्ट हुआ। प्लांट में सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही
प्लॉट में ब्लास्ट होने के साथ सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को लेकर आखिरी बार जांच कब की गई थी और पर्यावरण विभाग की टीम ने भी यहां आखिरी बार कब इंस्पेक्शन किया था। बलौदाबाजार में राष्ट्रीय स्तर के बड़े सीमेंट कारखाने भी लगे हैं, जहां पिछले सालों में हादसे बढ़े हैं। इन दुर्घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर इनसाइटः स्क्रबर को मार रहे थे रॉड, इसी से हुआ ब्लास्ट
प्लांट के जिस वेट स्क्रबर में ब्लास्ट होने से 6 श्रमिकों की मौत हुई, उसके मेंटेनेंस में बैड प्रैक्टिस की बात सामने आई है। प्रशासन ने अपनी जांच में पाया कि वेट स्क्रबर से डस्ट झाड़ने के लिए यहां हैमरिंग की जा रही थी। श्रमिक लोहे की रॉड मारकर डस्ट झाड़ रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि आयरन ओर को स्पंज आयरन बनाने के प्रोसेस में ज्वलनशील मोनो कार्बन समेत कई गमं गैस और बड़ी मात्रा में राख निकलती है। डस्ट सेटलिंग चेंबर से होते हुए गैस और राख वेट स्क्रबर में पहुंचती है, जहां इसे पानी के जरिए धोकर और ठंडा किया जाता है। शुरुआती जांच में पता चला है कि प्लांट में बेट स्क्रबर की नियमित सफाई नहीं हो रही थी। ऐसे में इसके भीतर स्लरी जमना बहुत सामान्य है। बार-बार हैमरिंग से स्लरी टूटकर गिर सकती है और लीकेज का खतरा बढ़ जाता है। हैमरिंग से स्पार्क भी पैदा होता है। इसी से वेट स्क्रबर के भीतर मौजूद गैस में आग लगती है। बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि हादसे के शिकार लोगों के परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। प्रशासन ने प्लांट सील कर जांच शुरू कर दी है।छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने भी घटना पर दुख जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।


