राजधानी को स्वच्छ, सुंदर एवं जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अतिक्रमण मुक्त अभियान के तहत गुरुवार को डोरंडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर रांची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम ने पुराने हाईकोर्ट के पास से अंबेडकर चौक, डोरंडा बाजार होते हुए एजी मोड़ तक कार्रवाई की। डोरंडा बाजार के करीब 200 अस्थायी दुकानदारों ने बताया कि उनके पास नगर निगम द्वारा जारी वेंडिंग सर्टिफिकेट है। उनका कहना है कि राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पहले बसाने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। दुकानदारों ने चेतावनी दी कि यदि व्यवसाय के लिए जगह नहीं दी गई तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे। अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में 500 से अधिक अवैध संरचनाएं हटाई गईं। नगर निगम की टीम जैसे ही दल-बल के साथ मौके पर पहुंची, पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। दुकानदार सामान समेटते और अपनी दुकानें बचाने की कोशिश करते नजर आए। अभियान में 10 ट्रैक्टर और 6 पोकलेन लगाए गए। सड़क के दोनों ओर दुकानों के छज्जे, ठेले, खोमचे, अस्थायी बांस-बल्ली की दुकानें, नाली के ऊपर बने स्लैब और अन्य अवैध संरचनाओं को हटाया गया। दुकानदारों ने कहा कि अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा ठीक है। 2017 में राज्य सरकार ने भी निर्देश दिया था कि पहले बसाएं, फिर उजाड़ें। 2013 में कानून पास हुआ, 2014 में वेंडर मार्केट बना कर देना था। आज तक नगर निगम ने नहीं दिया, लेकिन उजाड़ने आ गए। हम लोगों को पहले कारोबार के लिए नगर निगम वेंडर मार्केट बना कर दे, फिर हटाएं। पूरे घर परिवार की रोजी रोटी का सवाल है। ऐसे हटाया जा रहा है, हम लोग सड़क पर उतरेंगे। डोरंडा बाजार में अपनी दुकान टूटते ही दुकानदार ने कहा कि वह 40 वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहा है, लेकिन हटाने से पहले समय तक नहीं दिया गया। अपनी दुकानें टूटते देख महिलाएं, लड़कियां और बुजुर्ग सिसकते नजर आए। दुकानदारों ने कहा कि अतिक्रमण हटाना न्यायसंगत है, लेकिन पहले वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी। कई लोगों ने नगर निगम पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि अमीरों को छोड़ा जा रहा है और गरीबों को उजाड़ा जा रहा है। राजधानी को स्वच्छ, सुंदर एवं जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अतिक्रमण मुक्त अभियान के तहत गुरुवार को डोरंडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर रांची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम ने पुराने हाईकोर्ट के पास से अंबेडकर चौक, डोरंडा बाजार होते हुए एजी मोड़ तक कार्रवाई की। डोरंडा बाजार के करीब 200 अस्थायी दुकानदारों ने बताया कि उनके पास नगर निगम द्वारा जारी वेंडिंग सर्टिफिकेट है। उनका कहना है कि राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पहले बसाने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। दुकानदारों ने चेतावनी दी कि यदि व्यवसाय के लिए जगह नहीं दी गई तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे। अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में 500 से अधिक अवैध संरचनाएं हटाई गईं। नगर निगम की टीम जैसे ही दल-बल के साथ मौके पर पहुंची, पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। दुकानदार सामान समेटते और अपनी दुकानें बचाने की कोशिश करते नजर आए। अभियान में 10 ट्रैक्टर और 6 पोकलेन लगाए गए। सड़क के दोनों ओर दुकानों के छज्जे, ठेले, खोमचे, अस्थायी बांस-बल्ली की दुकानें, नाली के ऊपर बने स्लैब और अन्य अवैध संरचनाओं को हटाया गया। दुकानदारों ने कहा कि अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा ठीक है। 2017 में राज्य सरकार ने भी निर्देश दिया था कि पहले बसाएं, फिर उजाड़ें। 2013 में कानून पास हुआ, 2014 में वेंडर मार्केट बना कर देना था। आज तक नगर निगम ने नहीं दिया, लेकिन उजाड़ने आ गए। हम लोगों को पहले कारोबार के लिए नगर निगम वेंडर मार्केट बना कर दे, फिर हटाएं। पूरे घर परिवार की रोजी रोटी का सवाल है। ऐसे हटाया जा रहा है, हम लोग सड़क पर उतरेंगे। डोरंडा बाजार में अपनी दुकान टूटते ही दुकानदार ने कहा कि वह 40 वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहा है, लेकिन हटाने से पहले समय तक नहीं दिया गया। अपनी दुकानें टूटते देख महिलाएं, लड़कियां और बुजुर्ग सिसकते नजर आए। दुकानदारों ने कहा कि अतिक्रमण हटाना न्यायसंगत है, लेकिन पहले वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी। कई लोगों ने नगर निगम पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि अमीरों को छोड़ा जा रहा है और गरीबों को उजाड़ा जा रहा है।


