कोलकाता की शेल कंपनियों से 450 करोड़ की फर्जी बिलिंग

कोलकाता की शेल कंपनियों से 450 करोड़ की फर्जी बिलिंग

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), ईटानगर ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, मणिपुर और झारखंड में 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 658 करोड़ रुपए की जाली बिलिंग और करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। ईडी ने यह कार्रवाई मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट, अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की। जांच में सामने आया कि फर्म ने अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के बीच छह माह में 11 राज्यों की 58 कंपनियों को 15,258 फर्जी चालान जारी किए, जिनके जरिए वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 99.31 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ उठाया गया। तलाशी के दौरान सामने आया कि दयाल कमर्शियल, एपी एंटरप्राइजेज, फीनिक्स हाइड्रोलिक्स, राम अवतार बंसल एंड कंपनी और भीमा शंकर इंडस्ट्रीज जैसी कोलकाता आधारित कंपनियां केवल बिल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने का काम कर रही थीं। इन संस्थाओं ने करीब 450 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाए और वाहन खरीद-बिक्री के नकली रिकॉर्ड दिखाकर जीएसटी रिफंड का दावा किया। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), ईटानगर ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, मणिपुर और झारखंड में 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 658 करोड़ रुपए की जाली बिलिंग और करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। ईडी ने यह कार्रवाई मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट, अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की। जांच में सामने आया कि फर्म ने अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के बीच छह माह में 11 राज्यों की 58 कंपनियों को 15,258 फर्जी चालान जारी किए, जिनके जरिए वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 99.31 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ उठाया गया। तलाशी के दौरान सामने आया कि दयाल कमर्शियल, एपी एंटरप्राइजेज, फीनिक्स हाइड्रोलिक्स, राम अवतार बंसल एंड कंपनी और भीमा शंकर इंडस्ट्रीज जैसी कोलकाता आधारित कंपनियां केवल बिल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने का काम कर रही थीं। इन संस्थाओं ने करीब 450 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाए और वाहन खरीद-बिक्री के नकली रिकॉर्ड दिखाकर जीएसटी रिफंड का दावा किया।  

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