तीन महीने में नहीं भगाए जा सके 23 हाथी, 50 एकड़ फसल रौंदी, दहशत

तीन महीने में नहीं भगाए जा सके 23 हाथी, 50 एकड़ फसल रौंदी, दहशत

भास्कर न्यूज | रामगढ़ रामगढ़ जिले में तीन माह से 23 जंगली हाथी उत्पात मचा रहे हैं। जिले के सभी क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर हाथियों का झुंड पहुंच रहा है। इससे गांव ही नहीं रामगढ़ शहर के लोगों में भय का माहौल है। शहर के निकटवर्ती गांव कांकेबार में हर एक दिन बाद हाथी पहुंच रहे हैं और नुकसान फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाथियों ने करीब 50 एकड़ भूमि में लगी करीब 11 लाख से अधिक की फसलों को नष्ट किया है। जबकि 30 से अधिक घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है। शहर के कांकेबार, रामगढ़ प्रखंड के दोहाकातू क्षेत्र के चुटूपालू, वनखेता, पतरातू प्रखंड के सिऊर कंडेर, कच्चूदाग, मांडू प्रखंड के घाटो, लाइयो, आरा, ओरला, चितरपुर प्रखंड के मायल, भुचुंगडीह, जनियामारा, गोला के रकुवा, सुतरी, हैसापोड़ा, बंदा, संग्रामपुर, बेटुलकला, चोकाद, कोरांबे, दुलमी प्रखंड के कुल्ही, बयांग, उरबा, कारो में हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दहशत के कारण गांवों में लोग रतजगा कर रहे हैं ताकि, घरों, फसलों के साथ खुद को सुरक्षित रख सके। वहीं वन विभाग के 15 से अधिक कर्मी प्रतिदिन हाथियों को भगाने में लगे हैं। इसके बावजूद हाथी गांवों में घुस रहे हैं। बरकाकाना में कंडेर पंचायत के कच्चुदाग गांव में बड़े इलाके में लोग हाथियों की डर से छत के ऊपर मचान बनाकर रह रहे हैं ताकि हाथी आए तो उन्हें नुकसान न पहुंच सके। लोगों ने बताया कि हाथी के डर से गांव में मेहमान भी नहीं आ रहे हैं। स्कूली बच्चे डर से शाम में कोचिंग भी करने नहीं जा रहे हैं। कच्चुदाग गांव में एक महीने में चार बार हाथी आकर दरवाज़ा तोड़ कर अनाज व खेतों में लगी फसल को बर्बाद कर दिया है। वन विभाग के रेंजर बटेश्वर पासवान ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयासरत है। हाथी कई ग्रुप में बट कर जगह-जगह पहुंच जा रहे हैं। लोगों के घर और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रतिदिन दो टीम में 15 लोग शामिल हाथियों को भगाने में लगे हैं। करीब 20 हजार से अधिक प्रतिदिन खर्च हो रहा है। गोला की रकुआ पंचायत में बुधवार की रात तीन की संख्या में आए जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथियों ने गांव में प्रवेश करते ही किसानों के खेत में लगी फसल को रौंदते हुए चट कर गए। जिसमें सिकंदर महतो, सुगनी देवी, जगदेव महतो के खेत में लगे फसलों को बर्बाद कर दिया। भास्कर न्यूज | रामगढ़ रामगढ़ जिले में तीन माह से 23 जंगली हाथी उत्पात मचा रहे हैं। जिले के सभी क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर हाथियों का झुंड पहुंच रहा है। इससे गांव ही नहीं रामगढ़ शहर के लोगों में भय का माहौल है। शहर के निकटवर्ती गांव कांकेबार में हर एक दिन बाद हाथी पहुंच रहे हैं और नुकसान फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाथियों ने करीब 50 एकड़ भूमि में लगी करीब 11 लाख से अधिक की फसलों को नष्ट किया है। जबकि 30 से अधिक घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है। शहर के कांकेबार, रामगढ़ प्रखंड के दोहाकातू क्षेत्र के चुटूपालू, वनखेता, पतरातू प्रखंड के सिऊर कंडेर, कच्चूदाग, मांडू प्रखंड के घाटो, लाइयो, आरा, ओरला, चितरपुर प्रखंड के मायल, भुचुंगडीह, जनियामारा, गोला के रकुवा, सुतरी, हैसापोड़ा, बंदा, संग्रामपुर, बेटुलकला, चोकाद, कोरांबे, दुलमी प्रखंड के कुल्ही, बयांग, उरबा, कारो में हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दहशत के कारण गांवों में लोग रतजगा कर रहे हैं ताकि, घरों, फसलों के साथ खुद को सुरक्षित रख सके। वहीं वन विभाग के 15 से अधिक कर्मी प्रतिदिन हाथियों को भगाने में लगे हैं। इसके बावजूद हाथी गांवों में घुस रहे हैं। बरकाकाना में कंडेर पंचायत के कच्चुदाग गांव में बड़े इलाके में लोग हाथियों की डर से छत के ऊपर मचान बनाकर रह रहे हैं ताकि हाथी आए तो उन्हें नुकसान न पहुंच सके। लोगों ने बताया कि हाथी के डर से गांव में मेहमान भी नहीं आ रहे हैं। स्कूली बच्चे डर से शाम में कोचिंग भी करने नहीं जा रहे हैं। कच्चुदाग गांव में एक महीने में चार बार हाथी आकर दरवाज़ा तोड़ कर अनाज व खेतों में लगी फसल को बर्बाद कर दिया है। वन विभाग के रेंजर बटेश्वर पासवान ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयासरत है। हाथी कई ग्रुप में बट कर जगह-जगह पहुंच जा रहे हैं। लोगों के घर और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रतिदिन दो टीम में 15 लोग शामिल हाथियों को भगाने में लगे हैं। करीब 20 हजार से अधिक प्रतिदिन खर्च हो रहा है। गोला की रकुआ पंचायत में बुधवार की रात तीन की संख्या में आए जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथियों ने गांव में प्रवेश करते ही किसानों के खेत में लगी फसल को रौंदते हुए चट कर गए। जिसमें सिकंदर महतो, सुगनी देवी, जगदेव महतो के खेत में लगे फसलों को बर्बाद कर दिया।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *