भास्कर न्यूज | रामगढ़ बसंत पंचमी पर विद्या दायिनी मां सरस्वती की पूजा के लिए भव्य तैयारी की गई है। 23 जनवरी को मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाएगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर सहित अनेक जगहों पर पंडाल बनाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई है। इधर, उत्साहित छात्र-छात्राएं अपने घरों से लेकर मुहल्ले में प्रतिमा स्थापित कर पूजा करेंगे। इसे लेकर विद्यार्थी अपने मुहल्लों में पूजा करने की तैयारी में जुटे हैं। इस संबंध में शिवाजी रोड के किला मंदिर के ज्योतिषाचार्य गोविंद वल्लभ शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी तिथि पर शुक्रवार को सूर्योदय से ही पूजा का मुहूर्त है। सूर्यास्त तक पूजा की जा सकेगी। पूजा करने वाले विद्यार्थियों के अलावा लोग मां सरस्वती की मूर्ति व फोटो रख कर पूजा कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में पीले कपड़े पहनकर सुबह 7:15 बजे से मां शारदे की पूजा करें। मां सरस्वती से ज्ञान की कामना करें। ज्योतिषाचार्य गोविंद वल्लभ शर्मा ने बताया पूजा करने के बाद मां सरस्वती के समक्ष बैठकर ऊं ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करें। इस मंत्र के जाप से एकाग्रता और बुद्धि बढ़ती है। यह बच्चों की पढ़ाई में रुचि और बुद्धि को भी मजबूत करता है। जो लोग नई विद्या सीखना चाहते हैं या अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें वसंत पंचमी पर सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए। इस दिन से नए कोर्स की शुरुआत भी कर सकते हैं। शहर के सभी गली-मुहल्लों में बच्चे पूजा को लेकर पंडाल बनाने में जुटे हैं। वहीं, बाजार में भी पूजा सामाग्री व सजावट के सामान को लेकर दुकानें सजी हुई है। शहर के बंगाली टोला, गोला रोड, थाना चौक में मां सरस्वती की मूर्तियां बनाई गई। मूर्तिकारों ने वस्त्र व शृंगार के सामान मिट्टी व चट से बनाए हैं। वहीं बच्चों ने मां सरस्वती की प्रतिमा में अपनी पसंद की साड़ी व शृंगार के लिए सामाग्री की खरीदारी की है। मूर्तिकारों ने बताया कि इस वर्ष 750 छोटी से बड़ी मूर्तियां बनाई गई है। सभी मूर्तियों की खरीदारी की जा चुकी है। भास्कर न्यूज | रामगढ़ बसंत पंचमी पर विद्या दायिनी मां सरस्वती की पूजा के लिए भव्य तैयारी की गई है। 23 जनवरी को मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाएगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर सहित अनेक जगहों पर पंडाल बनाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई है। इधर, उत्साहित छात्र-छात्राएं अपने घरों से लेकर मुहल्ले में प्रतिमा स्थापित कर पूजा करेंगे। इसे लेकर विद्यार्थी अपने मुहल्लों में पूजा करने की तैयारी में जुटे हैं। इस संबंध में शिवाजी रोड के किला मंदिर के ज्योतिषाचार्य गोविंद वल्लभ शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी तिथि पर शुक्रवार को सूर्योदय से ही पूजा का मुहूर्त है। सूर्यास्त तक पूजा की जा सकेगी। पूजा करने वाले विद्यार्थियों के अलावा लोग मां सरस्वती की मूर्ति व फोटो रख कर पूजा कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में पीले कपड़े पहनकर सुबह 7:15 बजे से मां शारदे की पूजा करें। मां सरस्वती से ज्ञान की कामना करें। ज्योतिषाचार्य गोविंद वल्लभ शर्मा ने बताया पूजा करने के बाद मां सरस्वती के समक्ष बैठकर ऊं ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करें। इस मंत्र के जाप से एकाग्रता और बुद्धि बढ़ती है। यह बच्चों की पढ़ाई में रुचि और बुद्धि को भी मजबूत करता है। जो लोग नई विद्या सीखना चाहते हैं या अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें वसंत पंचमी पर सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए। इस दिन से नए कोर्स की शुरुआत भी कर सकते हैं। शहर के सभी गली-मुहल्लों में बच्चे पूजा को लेकर पंडाल बनाने में जुटे हैं। वहीं, बाजार में भी पूजा सामाग्री व सजावट के सामान को लेकर दुकानें सजी हुई है। शहर के बंगाली टोला, गोला रोड, थाना चौक में मां सरस्वती की मूर्तियां बनाई गई। मूर्तिकारों ने वस्त्र व शृंगार के सामान मिट्टी व चट से बनाए हैं। वहीं बच्चों ने मां सरस्वती की प्रतिमा में अपनी पसंद की साड़ी व शृंगार के लिए सामाग्री की खरीदारी की है। मूर्तिकारों ने बताया कि इस वर्ष 750 छोटी से बड़ी मूर्तियां बनाई गई है। सभी मूर्तियों की खरीदारी की जा चुकी है।


