अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ चुनाव के दौरान उपजे विवाद में वर्ष 2007 में हुई छात्र की गोली मारकर हत्या के मामले में करीब 19 साल बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अलीगढ़ फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-02 की जज तारकेश्वरी सिंह की अदालत ने गुरुवार को अपना निर्णय दिया। इसमें आसिफ नवी खां, गीतम सिंह कुशवाहा और आविद अंसारी उर्फ चौधरी को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। रात 1:45 बजे हबीब हॉल के सामने बैठे थे छात्र अभियोजन के अनुसार घटना 8 अप्रैल 2007 की रात करीब 1:45 बजे की है। थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एएमयू परिसर स्थित हबीब हॉल के सामने एक ढाबे पर मुल्ला मोहम्मद साबिद अली, उसके साथी नवी हसन (वादी), निजामुद्दीन और मोहम्मद शाहनवाज चाय पी रहे थे। उस समय एएमयू में छात्रसंघ चुनाव का माहौल था। इसमें अध्यक्ष पद के लिए आजमगढ़ और बिहार गुट में वर्चस्व की जंग चल रही थी। चाय के ढाबे पर हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग इसी चुनावी रंजिश के चलते दो मोटरसाइकिलों पर चार से पांच युवक वहां पहुंचे और आते ही तमंचों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में मुल्ला मोहम्मद साबिद अली को बगल के नीचे गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय तोड़ा दम घटना के बाद वादी नवी हसन अपने साथियों के साथ घायल छात्र को जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक मूल रूप से उड़ीसा का रहने वाला था। यह मामला उस समय एएमयू परिसर से जुड़ा एक चर्चित प्रकरण बन गया था। निष्कासित छात्रों पर लगा हत्या का आरोप जांच में सामने आया कि हमलावरों में शामिल आविद अंसारी उर्फ चौधरी (बीकॉम) और इमरान निष्कासित छात्र थे। अभियोजन के अनुसार हमलावरों में इटावा निवासी आसिफ नवी, इमरान, शिकारपुर, बुलंदशहर निवासी आविद अंसारी उर्फ चौधरी और अलीगढ़ के छर्रा निवासी गीतम कुशवाहा शामिल थे। घटना के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शी की तहरीर पर नामजद एफआईआर मृतक के साथी नवी हसन की तहरीर पर थाना सिविल लाइन में नामजद एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना के बाद तीन अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान दूर-दूर से गवाह अदालत में पेश हुए। एक गवाह मोहम्मद शाहनवाज गवाही से पलट गया। हालांकि निजामुद्दीन और वादी नवी हसन ने अदालत में दिए अपने बयानों में कहा कि फायरिंग उनके सामने ही हुई थी। अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी गवाही को विश्वसनीय और घटनाक्रम से मेल खाता पाया। आला-ए-कत्ल बरामद, आयुध अधिनियम में भी सजा विवेचना के दौरान अभियुक्तों की निशानदेही पर तमंचा (आला-ए-कत्ल) बरामद किया गया। अभियुक्त वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके चलते उनके खिलाफ धारा 25 आयुध अधिनियम के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। अदालत ने आयुध अधिनियम के मामलों में भी तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष का कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, जुर्माना न देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। चुनावी रंजिश में जघन्य अपराध अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण मुरारी जौहरी और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप तोमर ने बताया कि यह हत्या एएमयू छात्रसंघ चुनाव की रंजिश में की गई थी। निष्कासित छात्रों और पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच हुए इस विवाद में एक छात्र की जान चली गई। अदालत ने इसे गंभीर और जघन्य अपराध मानते हुए कठोर सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी अदालत ने आदेश दिया कि अभियुक्तों को दी गई सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। फैसले की प्रति अभियुक्तों को निःशुल्क प्रदान कर उन्हें जेल भेज दिया गया।


