हाईकोर्ट के रिटायर जजों की सुरक्षा नियमों की जानकारी तलब:कोर्ट ने सरकार से कहा- नियम हैं तो अगली हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के रिटायर जजों के लिए बनाए गए प्रासंगिक सुरक्षा नियमों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि इस संबंध में यदि कोई प्रासंगिक नियम हैं तो अगली सुनवाई पर हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। यह आदेश ​न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एसोसिएशन ऑफ रिटायर सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट जजेस व अन्य याचिका पर दिया है। ​वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव एवं सहयोगी वशिष्ठ दूबे ने कहा कि रिटायर न्यायाधीशों की सुरक्षा गंभीर मुद्दा है और इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश बिना किसी डर या पक्षपात, स्नेह या द्वेष के न्याय करने और संविधान एवं कानूनों को बनाए रखने की शपथ लेता है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए यह आवश्यक हो जाता है क्योंकि एक न्यायाधीश पद छोड़ने के आखिरी दिन भी अपने स्वतंत्र विवेक से निर्णय करता है। जब एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश सार्वजनिक रूप से बाहर निकलता है तो उसे न्यूनतम सुरक्षा मिलना आवश्यक है। एक संवैधानिक पद धारक कम से कम अपने पद छोड़ने के बाद अपने और परिवार के जीवन के लिए इतनी सुरक्षा का हकदार है। खंडपीठ ने कहा कि अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी उच्च न्यायालय के रिटायर न्यायाधीशों के लिए बनाए गए प्रासंगिक सुरक्षा नियम यदि कोई हों तो हलफनामे मे पेश करें। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए नौ फरवरी की तारीख तय की है।

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