अलीगंज पंचायत में मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां लगभग 3 करोड़ रुपये की सरकारी राशि कागजों में योजनाएं पूरी दिखाकर निकाल ली गई, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) नीरज कुमार की जांच में यह खुलासा हुआ है। डीपीओ नीरज कुमार ने अलीगंज पंचायत के उरवा पहाड़ के नीचे जंगली इलाके में वर्ष 2023-24 के दौरान संचालित मनरेगा योजनाओं की स्थलीय जांच की। इस दौरान पंचायत में दर्ज 37 तालाब खुदाई योजनाओं और 10 बांध निर्माण कार्यों की फाइलों और कथित कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 37 में से 30 तालाब योजनाएं धरातल पर मौजूद ही नहीं थीं। कई स्थानों पर न तो खुदाई के कोई निशान मिले और न ही बांध निर्माण के प्रमाण, जबकि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया था। मानपुर गांव सहित अन्य स्थानों पर दिखाई गई योजनाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। डीपीओ नीरज कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर स्थल निरीक्षण किया गया है। जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला के वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में लापरवाही और गड़बड़ी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि तत्कालीन अधिकारियों, रोजगार सेवक, मनरेगा कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों की मिलीभगत से बिना वास्तविक कार्य कराए ही करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी कर ली गई। इस पूरे मामले की शिकायत अलीगंज पंचायत निवासी मनोज मेहता, अरुण उर्फ पप्पू मेहता, मुकेश यादव, अमरेश कुमार और परशुराम प्रसाद ने की थी। शिकायत के बाद आरटीआई के जरिए जब दस्तावेज सामने आए, तब इन अनियमितताओं का खुलासा हुआ। अलीगंज पंचायत में मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां लगभग 3 करोड़ रुपये की सरकारी राशि कागजों में योजनाएं पूरी दिखाकर निकाल ली गई, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) नीरज कुमार की जांच में यह खुलासा हुआ है। डीपीओ नीरज कुमार ने अलीगंज पंचायत के उरवा पहाड़ के नीचे जंगली इलाके में वर्ष 2023-24 के दौरान संचालित मनरेगा योजनाओं की स्थलीय जांच की। इस दौरान पंचायत में दर्ज 37 तालाब खुदाई योजनाओं और 10 बांध निर्माण कार्यों की फाइलों और कथित कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 37 में से 30 तालाब योजनाएं धरातल पर मौजूद ही नहीं थीं। कई स्थानों पर न तो खुदाई के कोई निशान मिले और न ही बांध निर्माण के प्रमाण, जबकि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया था। मानपुर गांव सहित अन्य स्थानों पर दिखाई गई योजनाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। डीपीओ नीरज कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर स्थल निरीक्षण किया गया है। जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला के वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में लापरवाही और गड़बड़ी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि तत्कालीन अधिकारियों, रोजगार सेवक, मनरेगा कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों की मिलीभगत से बिना वास्तविक कार्य कराए ही करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी कर ली गई। इस पूरे मामले की शिकायत अलीगंज पंचायत निवासी मनोज मेहता, अरुण उर्फ पप्पू मेहता, मुकेश यादव, अमरेश कुमार और परशुराम प्रसाद ने की थी। शिकायत के बाद आरटीआई के जरिए जब दस्तावेज सामने आए, तब इन अनियमितताओं का खुलासा हुआ।


