आईआईएम बोधगया में 21 देशों के प्रतिभागी शामिल:विदेश मंत्रालय के सहयोग से कार्यक्रम, मुश्किल परिस्थिति से निपटने के लिए की चर्चा

आईआईएम बोधगया में 21 देशों के प्रतिभागी शामिल:विदेश मंत्रालय के सहयोग से कार्यक्रम, मुश्किल परिस्थिति से निपटने के लिए की चर्चा

आईआईएम बोधगया ने ‘बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नेतृत्व’ विषय पर पांच दिवसीय मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपी) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 13 से 17 जनवरी 2026 तक चला, जिसे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) पहल के तहत आयोजित किया गया था। इसमें 21 देशों के 33 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 17 महिलाएं और 16 पुरुष शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य पेशेवरों को अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करना था। इसमें अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। सत्रों में माइंडफुल लीडरशिप, नेतृत्व में लचीलापन, नैतिक निर्णय-निर्माण, रणनीतिक सोच और जटिल परिस्थितियों से निपटने जैसे विषयों पर चर्चा हुई, जिससे प्रतिभागियों के बीच अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिला। पुराने नालंदा खंडहरों का दौरा किया एमडीपी की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका अनुभव-आधारित सीखने का दृष्टिकोण था। प्रतिभागियों ने पुराने नालंदा खंडहरों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर का दौरा किया। इन स्थलों पर माइंडफुलनेस, आत्म-नियंत्रण और चिंतनशील नेतृत्व पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिससे उन्हें भारत की पुराने सभ्यता से सीखने और उसे आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों से जोड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन एक सत्र के साथ हुआ, जिसका नेतृत्व प्रोग्राम डायरेक्टर्स डॉ. विनिता एस. सहाय और डॉ. टीना भारती ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक स्तर पर सार्थक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने ऐसे नेतृत्व के महत्व पर जोर दिया जो रणनीतिक समझ के साथ-साथ संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक समझ को भी अपनाए। आईआईएम बोधगया ने ‘बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नेतृत्व’ विषय पर पांच दिवसीय मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपी) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 13 से 17 जनवरी 2026 तक चला, जिसे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) पहल के तहत आयोजित किया गया था। इसमें 21 देशों के 33 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 17 महिलाएं और 16 पुरुष शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य पेशेवरों को अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करना था। इसमें अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। सत्रों में माइंडफुल लीडरशिप, नेतृत्व में लचीलापन, नैतिक निर्णय-निर्माण, रणनीतिक सोच और जटिल परिस्थितियों से निपटने जैसे विषयों पर चर्चा हुई, जिससे प्रतिभागियों के बीच अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिला। पुराने नालंदा खंडहरों का दौरा किया एमडीपी की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका अनुभव-आधारित सीखने का दृष्टिकोण था। प्रतिभागियों ने पुराने नालंदा खंडहरों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर का दौरा किया। इन स्थलों पर माइंडफुलनेस, आत्म-नियंत्रण और चिंतनशील नेतृत्व पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिससे उन्हें भारत की पुराने सभ्यता से सीखने और उसे आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों से जोड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन एक सत्र के साथ हुआ, जिसका नेतृत्व प्रोग्राम डायरेक्टर्स डॉ. विनिता एस. सहाय और डॉ. टीना भारती ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक स्तर पर सार्थक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने ऐसे नेतृत्व के महत्व पर जोर दिया जो रणनीतिक समझ के साथ-साथ संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक समझ को भी अपनाए।  

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