शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया में जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने जिले के 422 निबंधित निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दो दिन के अंदर ज्ञानदीप पोर्टल पर प्रवेश क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) अपलोड करने का अल्टीमेटम दिया है। आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की चेतावनी भी दी गई है। विभागीय आदेशों की खुली अवहेलना शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कई निजी स्कूल प्रशासन विभागीय निर्देशों को ताक पर रखते हुए अपनी प्रवेश क्षमता की जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। डीईओ ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कई स्कूलों ने रिक्तियों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, जो न सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना है, बल्कि मनमानेपन को भी दर्शाता है। डीईओ आनंद विजय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभागीय आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो स्कूल दो दिनों के अंदर स्पष्टीकरण नहीं देंगे, उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया? जिले के 801 निबंधित निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के छात्रों के नामांकन के लिए ज्ञानदीप पोर्टल पर 31 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद 2 फरवरी तक पंजीकृत छात्रों के आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा। 6 फरवरी तक सत्यापित छात्रों का ऑनलाइन स्कूल आवंटन होगा और 7 से 21 फरवरी के बीच चयनित छात्रों का विद्यालयों में प्रवेश पूरा किया जाएगा। लक्ष्य से काफी पीछे आवेदन चिंताजनक बात यह है कि मंगलवार तक केवल 568 छात्रों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है, जो लक्ष्य से काफी कम है। इस पर डीईओ ने नाराजगी जताते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्रों का ऑनलाइन आवेदन कराने का निर्देश दिया है। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने बच्चों का पंजीकरण अवश्य कराएं। हर हाल में होगा आदेश का पालन डीईओ आनंद विजय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा की जा रही है। हर हाल में सभी को विभागीय आदेश का पालन करना होगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया में जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने जिले के 422 निबंधित निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दो दिन के अंदर ज्ञानदीप पोर्टल पर प्रवेश क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) अपलोड करने का अल्टीमेटम दिया है। आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की चेतावनी भी दी गई है। विभागीय आदेशों की खुली अवहेलना शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कई निजी स्कूल प्रशासन विभागीय निर्देशों को ताक पर रखते हुए अपनी प्रवेश क्षमता की जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। डीईओ ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कई स्कूलों ने रिक्तियों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, जो न सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना है, बल्कि मनमानेपन को भी दर्शाता है। डीईओ आनंद विजय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभागीय आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो स्कूल दो दिनों के अंदर स्पष्टीकरण नहीं देंगे, उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया? जिले के 801 निबंधित निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के छात्रों के नामांकन के लिए ज्ञानदीप पोर्टल पर 31 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद 2 फरवरी तक पंजीकृत छात्रों के आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा। 6 फरवरी तक सत्यापित छात्रों का ऑनलाइन स्कूल आवंटन होगा और 7 से 21 फरवरी के बीच चयनित छात्रों का विद्यालयों में प्रवेश पूरा किया जाएगा। लक्ष्य से काफी पीछे आवेदन चिंताजनक बात यह है कि मंगलवार तक केवल 568 छात्रों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है, जो लक्ष्य से काफी कम है। इस पर डीईओ ने नाराजगी जताते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्रों का ऑनलाइन आवेदन कराने का निर्देश दिया है। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने बच्चों का पंजीकरण अवश्य कराएं। हर हाल में होगा आदेश का पालन डीईओ आनंद विजय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा की जा रही है। हर हाल में सभी को विभागीय आदेश का पालन करना होगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


