दरभंगा महारानी के श्राद्धकर्म में 56 भोग:करीब 1 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था, पूरे मिथिलांचल को आमंत्रण; राज्यपाल भी आएंगे

दरभंगा महारानी के श्राद्धकर्म में 56 भोग:करीब 1 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था, पूरे मिथिलांचल को आमंत्रण; राज्यपाल भी आएंगे

दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी काम सुंदरी साहिबा के निधन के बाद पूरे मिथिलांचल में शोक है। महारानी के श्राद्धकर्म को दरभंगा राज की गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जा रहा है। इस अवसर पर देशभर के राजघरानों, साधु-संतों और विशिष्ट अतिथियों का दरभंगा आगमन हो रहा है। दूसरी ओर, कल्याणी निवास में श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए भव्य भोज की व्यापक तैयारी की गई है। राज परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, दो दिनों में लाखों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहले दिन लगभग 50 हजार लोगों के भोजन की तैयारी की गई है, जबकि दूसरे दिन इससे कहीं अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। पूरे मिथिलांचल से आमंत्रण भेजा गया है और कल लाखों श्रद्धालुओं के दरभंगा पहुंचने की उम्मीद है। भोज की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें 56 भोग, पारंपरिक मिथिला व्यंजन, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और राजसी खान-पान की व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार करीब 3,000 प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं, ताकि दूर-दूर से आने वाले अतिथियों को राजसी परंपरा के अनुरूप सम्मानपूर्वक भोजन कराया जा सके।
विशाल आयोजन के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम भोजन व्यवस्था से जुड़े कृष्ण हलवाई ने बताया कि इस विशाल आयोजन के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम यहां तैनात है। अलग-अलग समूहों में कारीगर पारंपरिक मिठाइयों, पकवानों और भोग की तैयारी में जुटे हैं। बड़े स्तर पर रसोई संचालन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्याम मंदिर परिसर स्थित महारानी के चिता स्थल पर महाराज परिवार की ओर से वैदिक कर्मकांड किया जा रहा है। पंडितों की ओर से मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक रीति से श्राद्धकर्म की सभी रस्में निभाई जा रही हैं। राज्यपाल के साथ-साथ कई मंत्री भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आएंगे दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दादी और दरभंगा राज की अंतिम महारानी के निधन पर देश के विभिन्न राजघरानों से लोग श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं। डुमराव महाराज का आगमन हो चुका है, जबकि आवागढ़ के राज परिवार के सदस्य भी पहुंच रहे हैं। गुजरात से बरताल के स्वामी जी सहित कई प्रमुख संतों का आगमन हो चुका है। उन्होंने बताया कि बिहार के राज्यपाल के साथ-साथ कई मंत्री भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात सहित सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। ऐतिहासिक दरभंगा राज परिवार की परंपराओं के अनुरूप श्राद्धकर्म और संबंधित सभी रस्में भव्य, अनुशासित और गरिमामय ढंग से निभाई जा रही हैं। यह आयोजन न सिर्फ एक शोक अवसर है, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, राजसी परंपरा और सामाजिक समरसता का भी जीवंत उदाहरण बन गया है। दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी काम सुंदरी साहिबा के निधन के बाद पूरे मिथिलांचल में शोक है। महारानी के श्राद्धकर्म को दरभंगा राज की गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जा रहा है। इस अवसर पर देशभर के राजघरानों, साधु-संतों और विशिष्ट अतिथियों का दरभंगा आगमन हो रहा है। दूसरी ओर, कल्याणी निवास में श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए भव्य भोज की व्यापक तैयारी की गई है। राज परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, दो दिनों में लाखों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहले दिन लगभग 50 हजार लोगों के भोजन की तैयारी की गई है, जबकि दूसरे दिन इससे कहीं अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। पूरे मिथिलांचल से आमंत्रण भेजा गया है और कल लाखों श्रद्धालुओं के दरभंगा पहुंचने की उम्मीद है। भोज की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें 56 भोग, पारंपरिक मिथिला व्यंजन, विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और राजसी खान-पान की व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार करीब 3,000 प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं, ताकि दूर-दूर से आने वाले अतिथियों को राजसी परंपरा के अनुरूप सम्मानपूर्वक भोजन कराया जा सके।
विशाल आयोजन के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम भोजन व्यवस्था से जुड़े कृष्ण हलवाई ने बताया कि इस विशाल आयोजन के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम यहां तैनात है। अलग-अलग समूहों में कारीगर पारंपरिक मिठाइयों, पकवानों और भोग की तैयारी में जुटे हैं। बड़े स्तर पर रसोई संचालन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्याम मंदिर परिसर स्थित महारानी के चिता स्थल पर महाराज परिवार की ओर से वैदिक कर्मकांड किया जा रहा है। पंडितों की ओर से मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक रीति से श्राद्धकर्म की सभी रस्में निभाई जा रही हैं। राज्यपाल के साथ-साथ कई मंत्री भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आएंगे दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दादी और दरभंगा राज की अंतिम महारानी के निधन पर देश के विभिन्न राजघरानों से लोग श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं। डुमराव महाराज का आगमन हो चुका है, जबकि आवागढ़ के राज परिवार के सदस्य भी पहुंच रहे हैं। गुजरात से बरताल के स्वामी जी सहित कई प्रमुख संतों का आगमन हो चुका है। उन्होंने बताया कि बिहार के राज्यपाल के साथ-साथ कई मंत्री भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात सहित सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। ऐतिहासिक दरभंगा राज परिवार की परंपराओं के अनुरूप श्राद्धकर्म और संबंधित सभी रस्में भव्य, अनुशासित और गरिमामय ढंग से निभाई जा रही हैं। यह आयोजन न सिर्फ एक शोक अवसर है, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, राजसी परंपरा और सामाजिक समरसता का भी जीवंत उदाहरण बन गया है।  

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