राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने पटवारी भर्ती से जुड़े एक मामले में अहम व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी महिला की शादी विवाह योग्य उम्र से पहले हुई थी, तो भी उसे विधवा कोटे के आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने राजसमंद के नाथद्वारा निवासी प्रीति गुर्जर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड और राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि वे जनरल-विडो कैटेगरी में एक पद याचिकाकर्ता के लिए खाली रखें। 31 दिसंबर को रद्द कर दी थी उम्मीदवारी मामले के अनुसार, प्रीति गुर्जर ने पटवारी भर्ती के लिए ओबीसी और जनरल-विडो कैटेगरी में आवेदन किया था। भर्ती परीक्षा में मेरिट में आने पर चयन बोर्ड ने उन्हें प्रोविजनल लिस्ट में शामिल कर लिया। लेकिन, 31 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई। अधिकारियों का तर्क था कि शादी के समय याचिकाकर्ता की उम्र विवाह योग्य कानूनी उम्र से कम थी, इसलिए उन्हें विधवा कोटे का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट की टिप्पणी- शादी को चुनौती नहीं दी तो वह वैध याचिकाकर्ता के वकील ने इस फैसले को चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा, “अधिनियम की धारा 5(iii) के तहत दुल्हन के लिए 18 वर्ष और दूल्हे के लिए 21 वर्ष की उम्र तय है। धारा 12 के अनुसार, इस नियम का उल्लंघन होने पर शादी ‘शून्यकरणीय’ होती है, यानी इसे रद्द करवाया जा सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब कम उम्र में शादी करने वाला पक्ष खुद इसे चुनौती दे।” कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा- “मौजूदा मामले में चूंकि शादी को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए इसे सभी उद्देश्यों के लिए वैध माना जाएगा। नतीजतन, शादी के समय की उम्र का विधवा आरक्षण की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता।” विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं कोर्ट ने भर्ती विज्ञापन की शर्तों का भी अवलोकन किया। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि विज्ञापन की शर्तों को देखने से यह कहीं भी नहीं झलकता कि यदि कोई विधवा विवाह के समय कम उम्र की थी, तो वह अयोग्य होगी। कोर्ट ने टिप्पणी की, “आरक्षण का लाभ लेने के लिए एकमात्र शर्त यह है कि महिला विधवा होनी चाहिए, इसके अलावा कोई और शर्त नहीं है।” कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी सरकार और बोर्ड का तर्क प्रथम दृष्टया सही नहीं है। कोर्ट ने राजस्व विभाग सचिव और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।


