खाली जगह छोड़ने के नियम में भी मिलेगी छूट:राज्य में व्यावसायिक भवनों का निर्माण अब 40 की जगह 70% जमीन पर होगा

खाली जगह छोड़ने के नियम में भी मिलेगी छूट:राज्य में व्यावसायिक भवनों का निर्माण अब 40 की जगह 70% जमीन पर होगा

उप-मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी घोषणा की
राज्य में बनने वाले व्यावसायिक भवनों के निर्माण नियमों में जल्द बड़े बदलाव होंगे। अब कॉमर्शियल भवनों में 70 फीसदी जमीन पर निर्माण की अनुमति मिलेगी। अभी तक केवल 40 फीसदी जमीन पर ही निर्माण हो सकता था। शेष 60 फीसदी हिस्से में सेटबैक या खाली जगह छोड़नी पड़ती थी। बुधवार को उप-मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय बैठक में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि व्यवसाय और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। सेटबैक के नियमों में मिलेगी बड़ी छूट नए प्रावधान के तहत अब सेटबैक के लिए कुल जमीन का सिर्फ 30% हिस्सा छोड़ना होगा। पहले यह सीमा 60 % थी। उप-मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे राज्य में कॉमर्शियल भवनों के लिए सेटबैक को कम किया जाए। इसके लिए नए सिरे से एसओपी तैयार की जा रही है। भूखंड के आकार के अनुसार बदलेगा सेटबैक… कॉमर्शियल भवनों का सेटबैक अब भूखंड के आकार और उपयोग के अनुसार तय किया जाएगा। छोटे और मध्यम आकार के भूखंडों को इससे खास फायदा मिलेगा। पहले छोटे प्लॉट पर भी ज्यादा खुली जगह छोड़ना अनिवार्य था। अब सामने, पीछे और साइड में जरूरत के हिसाब से सेटबैक तय किया जाएगा। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है क्यों जरूरी था संशोधन दुकान, कार्यालय और औद्योगिक भवन जैसे कॉमर्शियल निर्माण छोटे भूखंडों पर भी आसानी से हो सकें, इसके लिए नियम बदले जा रहे हैं। इससे राज्य में निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। जमीन का अधिकतम उपयोग संभव नए नियम लागू होने के बाद भूमि का बेहतर और अधिकतम उपयोग हो सकेगा। भूमि मालिक अब व्यावसायिक भवनों में ज्यादा क्षेत्र में निर्माण कर सकेंगे। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार की नई पहल के तहत यह फैसला लिया गया है। इसका उद्देश्य “सबका सम्मान, जीवन आसान” के संकल्प को पूरा करना है। बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन सरकार ने हाल ही में बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन किया है। इसके तहत सेटबैक समेत कई नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है। बिल्डिंग बायलॉज-2025 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया है। इसमें वर्ष 2014 के पुराने नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। संशोधन के बाद ही नए एसओपी को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी घोषणा की
राज्य में बनने वाले व्यावसायिक भवनों के निर्माण नियमों में जल्द बड़े बदलाव होंगे। अब कॉमर्शियल भवनों में 70 फीसदी जमीन पर निर्माण की अनुमति मिलेगी। अभी तक केवल 40 फीसदी जमीन पर ही निर्माण हो सकता था। शेष 60 फीसदी हिस्से में सेटबैक या खाली जगह छोड़नी पड़ती थी। बुधवार को उप-मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय बैठक में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि व्यवसाय और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। सेटबैक के नियमों में मिलेगी बड़ी छूट नए प्रावधान के तहत अब सेटबैक के लिए कुल जमीन का सिर्फ 30% हिस्सा छोड़ना होगा। पहले यह सीमा 60 % थी। उप-मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे राज्य में कॉमर्शियल भवनों के लिए सेटबैक को कम किया जाए। इसके लिए नए सिरे से एसओपी तैयार की जा रही है। भूखंड के आकार के अनुसार बदलेगा सेटबैक… कॉमर्शियल भवनों का सेटबैक अब भूखंड के आकार और उपयोग के अनुसार तय किया जाएगा। छोटे और मध्यम आकार के भूखंडों को इससे खास फायदा मिलेगा। पहले छोटे प्लॉट पर भी ज्यादा खुली जगह छोड़ना अनिवार्य था। अब सामने, पीछे और साइड में जरूरत के हिसाब से सेटबैक तय किया जाएगा। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है क्यों जरूरी था संशोधन दुकान, कार्यालय और औद्योगिक भवन जैसे कॉमर्शियल निर्माण छोटे भूखंडों पर भी आसानी से हो सकें, इसके लिए नियम बदले जा रहे हैं। इससे राज्य में निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। जमीन का अधिकतम उपयोग संभव नए नियम लागू होने के बाद भूमि का बेहतर और अधिकतम उपयोग हो सकेगा। भूमि मालिक अब व्यावसायिक भवनों में ज्यादा क्षेत्र में निर्माण कर सकेंगे। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार की नई पहल के तहत यह फैसला लिया गया है। इसका उद्देश्य “सबका सम्मान, जीवन आसान” के संकल्प को पूरा करना है। बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन सरकार ने हाल ही में बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन किया है। इसके तहत सेटबैक समेत कई नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है। बिल्डिंग बायलॉज-2025 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया है। इसमें वर्ष 2014 के पुराने नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। संशोधन के बाद ही नए एसओपी को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।  

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