BPSC में ‘गुजरात मॉडल’… अभ्यर्थी लॉटरी से चुनेंगे अपना इंटरव्यू बोर्ड

BPSC में ‘गुजरात मॉडल’… अभ्यर्थी लॉटरी से चुनेंगे अपना इंटरव्यू बोर्ड

बिहार में पहली बार 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा से नई व्यवस्था लागू
बिहार में पहली बार 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा के इंटरव्यू में गुजरात मॉडल लागू होगा। अभ्यर्थी खुद ही इंटरव्यू बोर्ड का चयन करेंगे। इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थी बीपीएससी कार्यालय में रखे बाक्स से एक पर्ची निकालेंगे। जिसके स्क्रैच के बाद ही उन्हें इंटरव्यू बोर्ड के बारे में जानकारी मिलेगी। अभ्यर्थियों को रोल नंबर की जगह कोड संख्या आवंटित किया गया है। इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों को केवल अभ्यर्थी को आवंटित कोड संख्या की जानकारी होगी। जानकारी के मुताबिक 2035 पदों के लिए मुख्य परीक्षा 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 के बीच पटना के 32 परीक्षा केंद्रों पर हुआ था। इसमें 20034 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इसका रिजल्ट 16 दिसंबर को जारी हुआ था। मुख्य परीक्षा पास अभ्यर्थियों के मार्कशीट का वेरिफिकेशन 17 जनवरी से शुरु हुआ है। अब, 21 से 28 जनवरी तक इंटरव्यू होगा। निष्पक्ष मूल्यांकन होगा, पहचान की गोपनीयता बनी रहेगी यदि इंटरव्यू बोर्ड का आवंटन पहले से तय होता है, तो ऐसी आशंका बनी रहती है कि कोई अभ्यर्थी किसी विशेष बोर्ड के सदस्य से संपर्क करने की कोशिश कर सकता है। पर्ची निकालकर बोर्ड चुनने से यह पूरी तरह अनिश्चित हो जाता है कि अभ्यर्थी का इंटरव्यू कौन लेगा। बोर्ड चयन में अभ्यर्थी की अपनी भागीदारी होने से चयन प्रक्रिया पर उम्मीदवारों का भरोसा बढ़ता है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि इंटरव्यू गुजरात मॉडल क्या? “गुजरात मॉडल” मुख्य रूप से लॉटरी सिस्टम पर आधारित एक चयन प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य इंटरव्यू में होने वाले किसी भी प्रकार के पक्षपात या “मैनेजमेंट” को पूरी तरह समाप्त करना है। इंटरव्यू बोर्ड का निर्धारण पहले से नहीं होता। अभ्यर्थी को अपने बोर्ड की जानकारी इंटरव्यू शुरू होने से कुछ मिनट पहले मिलती है। अभ्यर्थियों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। उन्हें नाम या रोल नंबर के बजाय एक विशिष्ट कोड दिया जाता है। फायदा क्या? पारदर्शिता बढ़ेगी। आयोग पर लगने वाले आरोपों से मुक्ति मिलेगी। इंटरव्यू में पक्षपात के आरोप भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। बीपीएससी और अभ्यर्थी को भी 10 मिनट पहले तक नहीं पता होगा कि कौन अधिकारी किस अभ्यर्थी का इंटरव्यू लेंगे। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की पहचान भी गुप्त रहेगी, इसमें केवल कोड आवंटित होगा। कोड ही अभ्यर्थी की पहचान होगी। बीपीएससी अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक विश्वसनीय और आधुनिक बनाना चाहता है। जरूरत क्यों? बीपीएससी में इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों का आरोप होता है कि बोर्ड द्वारा पक्षपात किया गया है। पहचान के लोग अपने अभ्यर्थी को अधिक नंबर दे रहे है। इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर के बारे में जानकारी होने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा उनपर अतिरिक्त दबाव होता था। ऐसे में रिजल्ट प्रकाशित होने के बाद अभ्यर्थी पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करते थे। ऐसे में बिहार में गुजरात मॉडल लागू किया गया है। गुजरात में पहले से ही अभ्यर्थी इंटरव्यू बोर्ड का चयन करते है। बिहार में पहली बार 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा से नई व्यवस्था लागू
बिहार में पहली बार 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा के इंटरव्यू में गुजरात मॉडल लागू होगा। अभ्यर्थी खुद ही इंटरव्यू बोर्ड का चयन करेंगे। इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थी बीपीएससी कार्यालय में रखे बाक्स से एक पर्ची निकालेंगे। जिसके स्क्रैच के बाद ही उन्हें इंटरव्यू बोर्ड के बारे में जानकारी मिलेगी। अभ्यर्थियों को रोल नंबर की जगह कोड संख्या आवंटित किया गया है। इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों को केवल अभ्यर्थी को आवंटित कोड संख्या की जानकारी होगी। जानकारी के मुताबिक 2035 पदों के लिए मुख्य परीक्षा 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 के बीच पटना के 32 परीक्षा केंद्रों पर हुआ था। इसमें 20034 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इसका रिजल्ट 16 दिसंबर को जारी हुआ था। मुख्य परीक्षा पास अभ्यर्थियों के मार्कशीट का वेरिफिकेशन 17 जनवरी से शुरु हुआ है। अब, 21 से 28 जनवरी तक इंटरव्यू होगा। निष्पक्ष मूल्यांकन होगा, पहचान की गोपनीयता बनी रहेगी यदि इंटरव्यू बोर्ड का आवंटन पहले से तय होता है, तो ऐसी आशंका बनी रहती है कि कोई अभ्यर्थी किसी विशेष बोर्ड के सदस्य से संपर्क करने की कोशिश कर सकता है। पर्ची निकालकर बोर्ड चुनने से यह पूरी तरह अनिश्चित हो जाता है कि अभ्यर्थी का इंटरव्यू कौन लेगा। बोर्ड चयन में अभ्यर्थी की अपनी भागीदारी होने से चयन प्रक्रिया पर उम्मीदवारों का भरोसा बढ़ता है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि इंटरव्यू गुजरात मॉडल क्या? “गुजरात मॉडल” मुख्य रूप से लॉटरी सिस्टम पर आधारित एक चयन प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य इंटरव्यू में होने वाले किसी भी प्रकार के पक्षपात या “मैनेजमेंट” को पूरी तरह समाप्त करना है। इंटरव्यू बोर्ड का निर्धारण पहले से नहीं होता। अभ्यर्थी को अपने बोर्ड की जानकारी इंटरव्यू शुरू होने से कुछ मिनट पहले मिलती है। अभ्यर्थियों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। उन्हें नाम या रोल नंबर के बजाय एक विशिष्ट कोड दिया जाता है। फायदा क्या? पारदर्शिता बढ़ेगी। आयोग पर लगने वाले आरोपों से मुक्ति मिलेगी। इंटरव्यू में पक्षपात के आरोप भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। बीपीएससी और अभ्यर्थी को भी 10 मिनट पहले तक नहीं पता होगा कि कौन अधिकारी किस अभ्यर्थी का इंटरव्यू लेंगे। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की पहचान भी गुप्त रहेगी, इसमें केवल कोड आवंटित होगा। कोड ही अभ्यर्थी की पहचान होगी। बीपीएससी अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक विश्वसनीय और आधुनिक बनाना चाहता है। जरूरत क्यों? बीपीएससी में इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों का आरोप होता है कि बोर्ड द्वारा पक्षपात किया गया है। पहचान के लोग अपने अभ्यर्थी को अधिक नंबर दे रहे है। इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर के बारे में जानकारी होने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा उनपर अतिरिक्त दबाव होता था। ऐसे में रिजल्ट प्रकाशित होने के बाद अभ्यर्थी पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करते थे। ऐसे में बिहार में गुजरात मॉडल लागू किया गया है। गुजरात में पहले से ही अभ्यर्थी इंटरव्यू बोर्ड का चयन करते है।  

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