जीविका दीदियां जुबानी बताएंगी जमा-खर्च, वर्चुअल अकाउंटेंट तैयार करेगा अकाउंट

जीविका दीदियां जुबानी बताएंगी जमा-खर्च, वर्चुअल अकाउंटेंट तैयार करेगा अकाउंट

कम पढ़ी-लिखी या निरक्षर जीविका दीदियों के अपने समूह के जमा और खर्च के बारे मुंह से बोलते ही अपने-आप अकाउंट तैयार हो जाएगा। वर्चुअल अकाउंटेंट (एआई की मदद से बना एनिमेटेड इंसान) यह जीविका की ऑनलाइन प्रणाली का हिस्सा भी बन जाएगा। जल्दी ही यह संभव होने जा रहा है। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ताकत काम करेगी। ग्रामीण विकास विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जीविका के संचालन का आधार बनाने की तैयारी की है। जीविका समूहों के संचालन को एआई की ताकत से जोड़ने के लिए ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार के हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (एनआईआर डीपीआर) की मदद लेगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। कहां सेहत पर संकट, कहां कुपोषण… तुरंत रिपोर्ट जीविका के एआई कार्यक्रम से जुड़े जानकारों ने बताया कि एनआईआर डीपीआर की मदद से स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रमों में काफी मदद मिलेगी। खासकर स्वास्थ्य से संबंधित मानकों के बारे में इनपुट डालते ही एआई के माध्यम से यह पता चल जाएगा कि किस इलाके की जीविका दीदियों पर किसी खास बीमारी का असर है। इसके अलावा जीविका के स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े इलाकों में कुपोषण आदि की समस्या के बारे में भी आसानी से जानकारी हासिल हो जाएगी। वहीं, एआई की मदद से इसका आसान निदान खोजकर भी तुरंत लागू किया जा सकेगा। वर्चुअल ट्रेनर देगा कौशल विकास का प्रशिक्षण जीविका में होने जा रहे एआई के प्रयोग के तहत कौशल विकास के प्रशिक्षण पर भी फोकस होगा। इसमें एआई की मदद से बना एनिमेटेड ट्रेनर जीविका दीदियों से उनके रोजगार संबंधी जरूरतों के बारे में पूरा संवाद करेगा। इस संवाद के जरिए जीविका दीदियों के कौशल संबंधी जरूरतों को भी जाना जा सकेगा। उसके आधार पर एआई ट्रेनर ट्रेनिंग देगा। जीविका दीदियों की ओर से उस ट्रेनिंग के बारे में सवाल करने पर तुरंत जवाब भी देगा। कुशलता हासिल करने के गुर भी सिखाएगा। साथ ही दिए जा रहे प्रशिक्षण के आधार पर किन-किन क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त किए जा सकते हैं, इस बारे में पूरी जानकारी भी देगा। एनआईआर डीपीआर की ओर से जल्दी ही जीविका के अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद बुलाया जा सकता है। कई तरह के टूल्स बनेंगे एनआईआर डीपीआर जीविका के लिए कई तरह के टूल्स विकसित कर देगा। इन टूल्स का उपयोग करने के लिए जीविका दीदियों को समय-समय पर प्रशिक्षित भी किया जाएगा। एनआईआर डीपीआर के एक्सपर्ट समय-समय पर बिहार आकर एआई के माध्यम से जीविका संचालन को सहज करने की भी कोशिश करेंगे। बता दें कि बिहार में जीविका समूह से करीब 1.40 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। कम पढ़ी-लिखी या निरक्षर जीविका दीदियों के अपने समूह के जमा और खर्च के बारे मुंह से बोलते ही अपने-आप अकाउंट तैयार हो जाएगा। वर्चुअल अकाउंटेंट (एआई की मदद से बना एनिमेटेड इंसान) यह जीविका की ऑनलाइन प्रणाली का हिस्सा भी बन जाएगा। जल्दी ही यह संभव होने जा रहा है। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ताकत काम करेगी। ग्रामीण विकास विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जीविका के संचालन का आधार बनाने की तैयारी की है। जीविका समूहों के संचालन को एआई की ताकत से जोड़ने के लिए ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार के हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (एनआईआर डीपीआर) की मदद लेगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। कहां सेहत पर संकट, कहां कुपोषण… तुरंत रिपोर्ट जीविका के एआई कार्यक्रम से जुड़े जानकारों ने बताया कि एनआईआर डीपीआर की मदद से स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रमों में काफी मदद मिलेगी। खासकर स्वास्थ्य से संबंधित मानकों के बारे में इनपुट डालते ही एआई के माध्यम से यह पता चल जाएगा कि किस इलाके की जीविका दीदियों पर किसी खास बीमारी का असर है। इसके अलावा जीविका के स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े इलाकों में कुपोषण आदि की समस्या के बारे में भी आसानी से जानकारी हासिल हो जाएगी। वहीं, एआई की मदद से इसका आसान निदान खोजकर भी तुरंत लागू किया जा सकेगा। वर्चुअल ट्रेनर देगा कौशल विकास का प्रशिक्षण जीविका में होने जा रहे एआई के प्रयोग के तहत कौशल विकास के प्रशिक्षण पर भी फोकस होगा। इसमें एआई की मदद से बना एनिमेटेड ट्रेनर जीविका दीदियों से उनके रोजगार संबंधी जरूरतों के बारे में पूरा संवाद करेगा। इस संवाद के जरिए जीविका दीदियों के कौशल संबंधी जरूरतों को भी जाना जा सकेगा। उसके आधार पर एआई ट्रेनर ट्रेनिंग देगा। जीविका दीदियों की ओर से उस ट्रेनिंग के बारे में सवाल करने पर तुरंत जवाब भी देगा। कुशलता हासिल करने के गुर भी सिखाएगा। साथ ही दिए जा रहे प्रशिक्षण के आधार पर किन-किन क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त किए जा सकते हैं, इस बारे में पूरी जानकारी भी देगा। एनआईआर डीपीआर की ओर से जल्दी ही जीविका के अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद बुलाया जा सकता है। कई तरह के टूल्स बनेंगे एनआईआर डीपीआर जीविका के लिए कई तरह के टूल्स विकसित कर देगा। इन टूल्स का उपयोग करने के लिए जीविका दीदियों को समय-समय पर प्रशिक्षित भी किया जाएगा। एनआईआर डीपीआर के एक्सपर्ट समय-समय पर बिहार आकर एआई के माध्यम से जीविका संचालन को सहज करने की भी कोशिश करेंगे। बता दें कि बिहार में जीविका समूह से करीब 1.40 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं।  

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