खगड़िया में किसानों की जलजमाव समस्या को लेकर बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह टुडू सक्रिय हो गए हैं। बुधवार को उन्होंने वन विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ गोगरी सर्किल नंबर-1 के पैकांत क्षेत्र का दौरा कर स्थल निरीक्षण किया। नए सूलीईश गेट बनाने की प्रक्रिया हो चुकी थी पूरी टुडू ने बताया कि पसरहा सतीश नगर चौर क्षेत्र में लगभग 8000 एकड़ भूमि पर कई वर्षों से जलजमाव की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए बिहार किसान मंच के अनुरोध पर नए सूलीईश गेट बनाने के लिए बाढ़ से पहले ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा निर्माण कार्य में बाधा डाली जा रही है। किसान नेता ने स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र अधिसूचित संरक्षित वन क्षेत्र में नहीं आता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन क्षेत्रों में वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होता, वहां वन विभाग और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिवों द्वारा एक संयुक्त पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि विकास या लोकहित के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न न की जाए। धीरेन्द्र सिंह टुडू ने स्थानीय किसानों और क्षेत्र के विधायक से अपील की है कि वे 24 जनवरी को पैकांत पहुंचकर वन विभाग द्वारा उत्पन्न अवरोध को हटवाएं और सूलीईश निर्माण कार्य शुरू कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग द्वारा बाधा नहीं हटाई गई, तो 5 फरवरी को किसान जिलाधिकारी के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों में नाराजगी देखी जा रही है, और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। वहीं, इस मामले पर वन विभाग के अधिकारी राजकुमार ने बताया कि अधीनस्थ कर्मियों को तलब किया गया है। उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। खगड़िया में किसानों की जलजमाव समस्या को लेकर बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह टुडू सक्रिय हो गए हैं। बुधवार को उन्होंने वन विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ गोगरी सर्किल नंबर-1 के पैकांत क्षेत्र का दौरा कर स्थल निरीक्षण किया। नए सूलीईश गेट बनाने की प्रक्रिया हो चुकी थी पूरी टुडू ने बताया कि पसरहा सतीश नगर चौर क्षेत्र में लगभग 8000 एकड़ भूमि पर कई वर्षों से जलजमाव की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए बिहार किसान मंच के अनुरोध पर नए सूलीईश गेट बनाने के लिए बाढ़ से पहले ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा निर्माण कार्य में बाधा डाली जा रही है। किसान नेता ने स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र अधिसूचित संरक्षित वन क्षेत्र में नहीं आता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन क्षेत्रों में वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होता, वहां वन विभाग और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिवों द्वारा एक संयुक्त पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि विकास या लोकहित के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न न की जाए। धीरेन्द्र सिंह टुडू ने स्थानीय किसानों और क्षेत्र के विधायक से अपील की है कि वे 24 जनवरी को पैकांत पहुंचकर वन विभाग द्वारा उत्पन्न अवरोध को हटवाएं और सूलीईश निर्माण कार्य शुरू कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग द्वारा बाधा नहीं हटाई गई, तो 5 फरवरी को किसान जिलाधिकारी के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों में नाराजगी देखी जा रही है, और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। वहीं, इस मामले पर वन विभाग के अधिकारी राजकुमार ने बताया कि अधीनस्थ कर्मियों को तलब किया गया है। उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।


