गंगा सिर्फ नदी नहीं, जीवन रेखा है:फर्रुखाबाद में गाय-गंगा संरक्षण संगोष्ठी में राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने दिया बयान

गंगा सिर्फ नदी नहीं, जीवन रेखा है:फर्रुखाबाद में गाय-गंगा संरक्षण संगोष्ठी में राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने दिया बयान

फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर चल रहे श्री राम नगरिया मेले में बुधवार को ‘गाय गंगा भारतीय संस्कृति संरक्षण’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। इस मेले में हजारों की संख्या में संत और श्रद्धालु कल्पवास कर रहे हैं। सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित इस संगोष्ठी का शुभारंभ राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। पहले 2 तस्वीरें देखिए… कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री ने कहा कि हम सभी गर्व महसूस करते हैं कि गंगा मैया हमारे पास हैं, जिससे हमें जब चाहें उनका आशीर्वाद मिल जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं है, बल्कि यह जीवन रेखा है जो हमें जन्म देती है, जीवित रखती है और हमारे जीवन में सबसे बड़ा योगदान देती है। जल, जीवन और भोजन सब कुछ गंगा मैया की ही देन है। रजनी तिवारी ने गाय के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर और गोमूत्र का विशेष स्थान है। उन्होंने प्राचीन भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पश्चिमी संस्कृति का उदय भी नहीं हुआ था, तब हमारे यहां नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षण संस्थान थे और वेदों की ऋचाएं लिखी गई थीं। उन्होंने अपनी वैदिक संस्कृति और धरोहर पर गर्व करने का आह्वान किया। राज्य मंत्री ने कहा कि हमें अपनी गाय की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि गाय हमें जीवन देती है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसे ऋषि-मुनियों ने पहले ही बताया था और अब हम उस पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने मोटे अनाज के सेवन को भी जीवन के लिए उपयोगी बताया, जिसका जिक्र हमारे शास्त्रों में बहुत पहले से है। उन चीजों का उपयोग अब हम समझ रहे हैं जबकि हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत पहले यह सब वेदों में लिख दिया था। विज्ञान जिसको अब बता रहा है वह भी हमारे वेदों और शास्त्रों में बहुत पहले ही लिख दिया गया था। सत्य ही सनातन है यह सारी चीज हमारे वेदों में लिखी हैं। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए हमें अपने शस्त्रों पर गर्व होना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। अपनी संस्कृति अपनी साहित्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़े। अंत में उन्होंने कार्यक्रम संयोजक विपिन शुक्ला और विनीत को धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं मंच का संचालन कविता पांडेय ने किया। इस दौरान मंच पर जूना अखाड़ा के महंत सत्य गिरी महाराज, डीएम आशुतोष कुमार द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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