तिरुपत्तूर में पहली बार दिखा दुर्लभ ब्लूथ्रोट, पोंगल Bird Count में 343 प्रजातियां दर्ज

तिरुपत्तूर में पहली बार दिखा दुर्लभ ब्लूथ्रोट, पोंगल Bird Count में 343 प्रजातियां दर्ज

तिरुपत्तूर में पोंगल बर्ड काउंट के दौरान पहली बार दुर्लभ ब्लूथ्रोट पक्षी देखने को मिला है। 14 से 17 जनवरी तक चले इस सर्वेक्षण में तमिलनाडु और पुदुचेरी के विभिन्न स्थानों पर कुल 343 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। यह पक्षी गिनती इलाके की जैव विविधता और प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी को उजागर करती है।

पोंगल Bird Count में क्या हुआ?

पोंगल बर्ड काउंट में पहली बार तिरुपत्तूर में एक मादा ब्लूथ्रोट, जो सर्दियों में प्रवास करने वाली प्रजाति है, देखी गई। इसके अलावा, रोजी स्टर्लिंग, बार्न स्वैलो और नॉर्दर्न पिंटेल जैसी प्रवासी प्रजातियां भी बड़ी संख्या में नजर आईं। स्थानीय पक्षियों में ईस्टर्न कैटल एग्रीट, ग्लॉसी आइबिस और इंडियन पॉण्ड हेरॉन शामिल हैं। टफ्टेड डक, टैगा फ्लाइकैचर और ब्लू-चीक्ड बी-ईटर जैसे पक्षी भी इस बार की गिनती में शामिल हुए, जिससे इलाके की जैव विविधता सामने आई।

आद्रभूमियों का सर्वे और प्रजातियों की संख्या

पुदुचेरी के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बी. सुरेन्द्र के नेतृत्व में 52 आद्रभूमियों का सर्वे हुआ, जिसमें 150 प्रजातियां दर्ज की गईं। उन्होंने बताया कि टफ्टेड डक पहली बार विल्लुपुरम में देखी गई। वहीं, पश्चिमी घाटों से जुड़ी थिक-बिल्ड वॉर्बलर भी देखी गई। दक्षिण तमिलनाडु की डॉ. बी. कविता भारती ने तिरुनेलवेली में बड़ी संख्या में नॉब-बिल्ड डक और पेंटेड स्टॉर्क दर्ज की। उनकी निगरानी में 30 छात्रों ने पूम्पुहार कॉलेज सहित विभिन्न स्थानों पर 70 प्रजातियां दर्ज कीं।

पक्षी प्रजातियों में कमी क्यों आई?

पिछले वर्ष 383 प्रजातियां दर्ज की गई थीं, जबकि इस बार यह संख्या 343 रही। निरीक्षकों के अनुसार, जलाशयों में कम पानी या सूखे के कारण कई बतख प्रजातियों की संख्या घटी है। फिलहाल, कुछ अवलोकनों की समीक्षा बाकी है, जिससे अंतिम आंकड़ों में बदलाव संभव है।

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तिरुपत्तूर में पहली बार दिखा दुर्लभ ब्लूथ्रोट, पोंगल Bird Count में 343 प्रजातियां दर्ज

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